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आपकी दवा में जहर घोल रहा है चीन, 8 कंपनियां हो सकती हैं ब्‍लैकलिस्‍ट

खबरों के मुताबिक, चीन की कंपनियां दवाओं में यूज होने वाले कच्‍चे माल की घटिया क्‍वालिटी सप्‍लाई कर रही हैं।

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नई दिल्‍ली. अरुणाचल में भारत चीन सैनिकों के बीच हुई छिटपुट झड़प की खबर के बीच भारत एक बड़ा कदम उठा सकता है। भारत जिस नए कदम पर विचार कर रहा है वह कदम सेना के मोर्चे पर नहीं बल्कि बिजनेस के मोर्चे पर है। खबरों के मुताबिक, चीन की कंपनियां दवाओं में यूज होने वाले कच्‍चे माल की घटिया क्‍वालिटी सप्‍लाई कर रही हैं। इससे हमारी-आपकी दवाओं में जहर घुल रहा है। सरकार अब ऐसी 8 कंपनियों को ब्‍लैक लिस्‍ट करने की तैयारी में है। जांच के बाद भारत सरकार ने इन चाइनीज कंपनियों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। जल्‍द ही इनके ब्‍लैकलिस्‍ट हो जाने की भी संभावना है। भारत में ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) की एक स्‍पेशल इंस्‍पेक्‍शन टीम ने चीन की इन 8 दवा कंपनियों की जांच पड़ताल की, उसके बाद सरकार ने कारण बताओ नोटिस जारी किया। 

 

इन कंपनियों को जारी किया गया नोटिस 

चीन की जिन 8 कंपनियों को नोटिस जारी किया गया है, उनमें M/S किलू तियान्‍हे फार्मास्‍यू‍टिकल्‍स, M/S हिनान जिनजियांग फार्मास्‍यूटिकल्‍स, M/S झुहाई यूनाईटेड लैबोरट्रीज, M/S गुआंगझाओ बायुन्‍शेन फार्मास्‍यूटिकल्‍स, M/S शॉगुआंग फुकांग फार्मास्‍यूटिकल्‍स, M/S किलो एंटीबायोटिक्‍स (Linyi) फार्मास्‍यूटिकल्‍स, M/S क्विंदाओ ब्राइटमून सीवुड्स और M/S शंघाई ि‍ जियानदिया हासेन (शांग्‍क्‍यू) फार्मास्‍यूटिकल्‍स शामिल हैं। 

 

लिया जाएगा कड़ा एक्‍शन 

DCGI के एक अधिकारी के मुताबिक, जिन 8 चाइनीज कंपनियों के खिलाफ घटिया क्‍वालिटी का कच्‍चा माल भेजने के आरोप लगे हैं, उनके खिलाफ सरकार जल्‍द ही एक्‍शन लेगी। यह एक्‍शन कड़ा होगा क्‍योंकि भारत में दवा की क्‍वालिटी को लेकर कोई समझौता नहीं करेंगे। 

 

आगे पढ़ें-इस कदम का भारत पर क्‍या होगा असर  

भारत पर क्‍या होगा असर 

सूत्रों के मुताबिक, चाइनीज कंपनियों के खिलाफ कड़े कदम उठाने का भारत पर नेगेटिव इंपैक्‍ट भी पड़ेगा। हो सकता है कि भारत में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्‍तेमाल होने वाली दवाओं समेत अन्‍य दवाओं की भी कुछ महीनों तक किल्‍लत पैदा हो जाए। इसकी वजह है कि चीन से भारत में दवाओं के लिए बड़े पैमाने पर कच्‍चा माल आना। मिनिस्‍ट्री फॉर केमिकल्‍स एंड फर्टिलाइजर्स के आंकड़े दर्शाते हैं कि भारत में दवाओं के लिए 70 फीसदी कच्‍चा माल चीन से ही आता है। 

 

आगे पढ़ें- अन्‍य देशों के माल पर भी जांच 

अन्‍य देशों से आने वाले माल की भी होगी जांच 

चीन से दवा का घटिया कच्‍चा माल आने की जानकारी के बाद अब भारत सरकार अन्‍य देशों से आने वाले माल की भी जांच करवाने जा रही है। इन देशों में अमेरिका, इटली और यूरोप के कुछ देश शामिल हैं।

 

आगे पढ़ें- कितना होता है चीन से इंपोर्ट

पिछले तीन सालों में दवाओं के लिए चीन से कितना हुआ इंपोर्ट 

आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने 2016-17 में 18,372.54 करोड़ रुपए के एक्टिव फार्मास्‍यूटिकल इन्‍ग्रीडिएंट्स API इंपोर्ट किए। API दवा के बायोलॉजिकली एक्टिव कंपोनेंट होते हैं। API के 2016-17 में हुए इंपोर्ट में से 12,254.97 करोड़ रुपए के API चीन से इंपोर्ट किए गए। वहीं अमेरिका से 820.18 करोड़ रुपए, इटली से 701.85 करोड़ रुपए, जर्मनी से 485.11 करोड़ रुपए और सिंगापुर से 422.01 करोड़ रुपए के API का इंपोर्ट किया गया। 2014-15 में चीन से API का इंपोर्ट 12,757.96 करोड़ रुपए और 2013-14 में 12,061.53 करोड़ रुपए रहा था। 

 

आगे पढ़ें- कई बार जताई जा चुकी है चिंता 

2014-15 में ही दी गई थी चेतावनी 

2014-15 में नेशनल सिक्‍योरिटी एडवाइजर ऑफिस ने सरकार को चेतावनी दी थी कि जरूरी दवाओं और API की सप्‍लाई को लेकर भारत, चीन पर बहुत ज्‍यादा निर्भर है। इसे कम किया जाए। मार्च 2017 में तत्‍कालीन कॉमर्स व इंडस्‍ट्रीज मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी कहा था कि चीन से आने वाला API भारत में प्रॉड्यूस होने वाले API से लगभग 4 गुना सस्‍ता है। कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता आनंद शर्मा ने भी इस मामले पर चिंता जताई थी और अंतर मंत्रालयी कमेटी को इस बारे में विचार करने का सुझाव दिया था। 

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