Home » Economy » Internationalचीन पाकिस्‍तान दोस्‍ती पछतावा घाटा लॉस CPEC Gwadar bane boon

चीन से हाथ मि‍लाकर पछता रहा पाक, गले की हड्डी बनी 3.5 लाख करोड़ की दोस्‍ती

CPEC को लेकर पाकिस्‍तान जिस तरह चीन की आवभगत कर रहा है, उसमें कुछ भी हैरानी नहीं होनी चाहिए..

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नई दिल्‍ली। चीन और पाकिस्‍तान के साझा प्रोजेक्‍ट CPEC के पूरा होने में अभी लंबा वक्‍त है। हालांकि इसके पूरा होने और फिर सफल होने को लेकर सवाल अब भी बने हुए है। हाल में एक बार फिर से चीन के नागरिकों पर पाकिस्‍तान में हमला हुआ और एक  की मौत हो गई। इससे पहले भी चीन के लोग पाकिस्‍तान में हमला झेल चुके हैं। इसे देखते हुए पूरी परियोजना की सुरक्षा का जिम्‍मा पाक आर्मी को सौंपा गया। इसके बाद जो हालात बने हैं, उसे लेकर आप पाकिस्‍तानी के मन में इस परियाजना को लेकर पछतावा ज्‍यादा है। 

 

हम चीन के गुलाम बनने की ओर अग्रसर 
हाल में छपी एनआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्‍तान की सरकार ने हाल के सालों में जिस तरह पाकिस्‍तान के लिए रेड कॉर्पेट बिछाया है, वह आप पाकिस्‍तानी अब पचा नहीं पा रहा है। उनका मानना है कि करीब 55 अरब डॉलर या 3.5 लाख करोड़ रुपए की यह परियोजना गले की हड्डी बनती जा रही है। कराची यूनिवर्सिटी के एक स्‍टूडेंट के मुताबिक, पारियोजना को लेकर पाकिस्‍तान जिस तरह चीन की आवभगत कर रहा है, उसमें कुछ भी हैरानी नहीं होनी चाहिए। अगर आप उधार ले रहे हैं तो निश्चित तौर पर आपकी स्थित कमजोर होगी। पहले हम ब्रिटेन ने अपना गुलाम बनाया और चीन के साथ भी हम इसी राह पर हैं।   

गले की हड्डी बनी 3.5 लाख करोड़ की दोस्‍ती
पाकिस्‍तान के लिए चीन की दोस्‍ती नासूर साबित हो रही है। हाल में आए पाकिस्‍तान के ट्रेड से जुड़े आंकड़े इसकी साफ गवाही दे रहे हैं। अक्‍टूबर के आंकड़ों के मुताबिक, पाकिस्‍तान का करेंट ट्रेड डेफिसिट 3.04 अरब डॉलर (32 हजार करोड़ पाकिस्‍तानी रूपए) पर पहुंच गया है। यह पिछले साल के अक्‍टूबर मुकाबले करीब 36 फीसदी ज्‍यादा है। पहले से खराब हालत में चल रही पाकिस्‍तानी इकोनॉमी के लिए ये आंकड़े किसी बुरे सपने से कम नहीं हैं। 
पाकिस्‍तान के प्रमुख अखबार डॉन में पिछले कुछ महीनों से छप रहे लेखों पर नजर डालें तो पाकिस्‍तान की इस मुसीबत की जड़ में पाकिस्‍तान चीन इकोनॉमिक कॉरिडोर है। 


 

सिर्फ अक्‍टूबर में 3.02 अरब डॉलर का ट्रेड डेफिसिट 
पाकिस्‍तान इकोनॉमी की खस्‍ता हालत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसे सिर्फ अक्‍टूबर में ही 3.02  अरब डॉलर का ट्रेड डेफिसिट हुआ है। पिछले साल अक्‍टूबर में उसका ट्रेड डेफिसिट 2.24 अरब डॉलर था। इस हिसाब से यह पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले करीब 36 फीसदी ज्‍यादा है। वहीं जुलाई से लेकर अब तक की बात करें तो यह 12.12 अरब डॉलर पर है, जो पिछले साल की इसी अवधि के 9.24 अरब डॉलर के मुकाबले कहीं ज्‍यादा है। पाकिस्‍तानी इकोनॉमी की यह कहानी कई सालों से जारी है। पिछले साल उसे कुल 32.58 अरब डॉलर का घाटा हुआ था, जो 300 अरब डॉलर की इकोनॉमी का करीब 10 फीसदी है। यह किसी भी देश की इकोनॉमी की खराब सेहत का परिचायक है। 


 

इसलिए चीन है जिम्‍मेदार 
दरअसल पाकिस्‍तान के ट्रेड आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो साफ हो जाता है कि चीन कैसे उसके लिए नासूर साबित हो रहा है। जुलाई से अक्‍टूबर के 4 महीनों की बात करें तो ट्रेड डेफिसिट 23 फीसदी बढ़ा है। पिछले साल यह जहां 15.65 अरब डॉलर था, वहीं अब बढ़कर 19.18 अरब डॉलर हो गया है। पाकिस्‍तानी अखबार डॉन में छपी खबर के मुताबिक, चीन पाकिस्‍तान इकोनॉमिक कॉरिडोर के चलते पाकिस्‍तान को बड़े पैमाने पर मशीनरी का इम्‍पोर्ट करना पड़ा है। इस साल के अप्रैल के आंकड़ों के मुताबिक, देश का इम्‍पोर्ट बढ़ने में 38 फीसदी हिस्‍सा सिर्फ इसी परियोजना की मशीनरी के लिए मंगाया गया। 


 

फंस सकता है पाकिस्‍तान 
एक्‍सपर्ट का मानना है कि पाकिस्‍तान चीन के चंगुल में फंस सकता है। दअरसल चीन का पुराना रिकॉर्ड रहा है। पहले वह छोटे देशों को कर्ज देकर प्रोजेक्‍ट शुरू करता है। बाद में प्रोजेक्‍ट की राशि नहीं लौटा पाने की स्थिति में वह पूरी परियोजना पर कब्‍जा कर लेता है। हाल में उसने श्रीलंका के साथ यही किया। कंबोडिया और नाइजीरिया भी उसकी इसी नीति का शिकार हो चुके है। ज्‍यादातर ग्‍लोबल देश किसी देश को कर्ज उसके रीपेमेंट की कैपेसिटी के आधार पर देते हैं। मतलब वो देखते हैं कि जिस देश को कर्ज दिया जा रहा है‍ उस देश की इकोनॉमी इस स्थिति में है कि वह कर्ज लौटा पाएगी। अगर उस स्थिति में नहीं है तो कर्ज नहीं देते हैं।    

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