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चीन खोद रहा है 1200 किलोमीटर का शॉर्टकट, कभी भी आ धमकेगा हिंद महासागर में

चीन के एक और प्रोजेक्‍ट ने भारत के रक्षा जानकारों को चिंता में डाल दिया है..

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नई दिल्‍ली। चीन के एक और प्रोजेक्‍ट ने भारत के रक्षा जानकारों को चिंता में डाल दिया है। इस बार उसने पाकिस्‍तान, बांग्‍लादेश, नेपाल, भूटान या श्रीलंका जैसे भारत के किसी पड़ोसी को नहीं, बल्कि थाईलैंड को अपना मोहरा बनाया है। इंटरनेशनल मीडिया में चल रही खबरों की मानें तो चीन थाईलैंड के महत्‍वाकांक्षी करा कैनाल प्राजेक्‍ट में पैसा लगाने को तैयार हो गया है। अगर यह नहर बनकर तैयार हुई तो चीन हिंद महासागर में भारत के लिए चुनौती पेश कर सकता है। करीब 102 किलोमीटर लंबी नहर 400 मीटर चौड़ी और 25 मीटर गहरी होगी। आइए जानते हैं चीन की इसी चाल के बारे में.. 

 

क्‍या है करा कैनाल प्रोजेक्‍ट ?   
करा कैनाल प्रोजक्‍ट थाई सरकार का महत्‍वाकांक्षी प्रोजेक्‍ट रहा है। थाईलैंड की भौगोलिक स्थिति ऐसी है, जहां उसका एक हिस्‍सा दक्षिण चीन सागर में खुलता है तो दूसरा हिंद महासागर में। थाईलैंड पनामा नहर की तरह पर बीचों-बीच से एक नहर बनाना चाहता है। यह नहर दक्षिणी चीन सागर को सीधा हिंद महासागर से जोड़ देगी। थाईलैंड को उम्‍मीद है कि यह प्रोजक्‍ट उसके लिए गेम चेंजर हो सकता है। इससे सिंगापुर के रास्‍ते हिंद महासागर को जाने वाले जहाज सीधा इस नहर से होकर गुजरेंगे। इससे उसे बड़ा रेवेन्‍यू हा‍सिल हो सकता है। 

 

 

लंबे समय से नहर बनाना चाहता है थाईलैंड  
बता दें कि थाईलैंड इस प्रोजेक्‍ट के लिए 200 सालों से कोशिश कर रहा है। इसको लेकर पहली बार चर्चा 1677 में हुई थी। यही नहीं तब के थाई शासक ने इसके लिए स्‍वेज नहर का निर्माण कराने वाले फ्रेंच इंजीनियर दे लामार को सर्वे के लिए भी बुलाया था। बाद में तकनीकी कारणों के चलते पूरा आइडिया ठंडे बस्‍ते में डाल दिया गया। 19वीं सदी में थाई राजपरिवार ने इसे फिर से डेवलप करने की कोशिश की, लेकिन जब ब्रिटेन के आब्‍जेक्‍शन के चलते यह संभव नहीं हो पाया। बाद में 1990 के दशक में इस पर फिर से चर्चा शुरू हुई, हालांकि बजट के चलते थाई सरकार इसमें हाथ डालने से कतराती रही।   


 

चीन पैसा लगाने को हो गया है तैयार 
हालांकि कई राजनीति और स्‍थानीय कारणों के चलते थाई सरकार की यह योजना परवान नहीं चढ़ने पाई थी। इस साल फरवरी में थाई सरकार ने आधिकारिक तौर पर कहा कि यह प्रोजेक्‍ट उसकी प्राथमिकता में नहीं है। लेकिन हाल में आई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस प्रोजेक्‍ट पर चीन पैसा लगाने को तैयार हो गया है। चीनी अधिकारियों ने थाई सरकार से इस बारे में संपर्क करके इस तरह के निर्माण में फाइनेंशियल औरे टेक्निकल सपोर्ट देने का प्रस्‍ताव दिया है। चीन इस अपने महत्‍वाकांक्षी वन रोड वन बेल्‍ट प्रोजेक्‍ट के तहत डेवलप करना चाहता है। इसी खबर के बाद भारतीय रक्षा जानकार हरकत में आए हैं। साउथ चाइना सी में चीन सरकार के लिए विवादति कृत्रिम द्वीप बनाने वाले चीनी कंपनी लोंगहाओ इस पूरे प्रोजेक्‍ट के लिए लॉबिंग कर रही है।


 

भारत की चिंता 
अगर यह नहर बनकर तैयार होती है तो भारत के लिए खतरा पैदा हो सकता है। रक्षा जानकारों के मुताबिक, सैंद्धांति तौर पर देखें तो यह नहर भारत के लिए भी लाभदायक होगी। क्‍योंकि इसके बन जाने के बाद उसे दक्षिण पूर्व एशिया के कई देशों तक आसान पहुंच मिलेगी। लेकिन पूरे प्रोजेक्‍ट में चीन का जुड़ाव भारत की सुरक्षा के लिए खतरा है। इस तरह के प्रोजेक्‍ट में चीन का पिछला रिकॉर्ड भारत की चिंता बढ़ा रहा है। दअरसल श्रीलंका और पाकिस्‍तान में पोर्ट डेवलप करने के बाद चीन ने वहां अपनी नौसैनिक गतिविधियां बढ़ाई हैं। 


 

.. तो चीन को मिलेगा 1200 किमी का शॉर्टकट 
अगर यह तरह तैयार हो जाती है और फाइनेंशियल और टेक्निकल सापोर्ट के चलते इसमें चीन को भी ऑपरेशनल अधिकार मिला तो यह भारत के लिए खतरा पैदा हो कसता है। इसके चलते दिक्षणी चीन सागर से भारत के प्रभाव वाले हिंद महासागर के बीच कम से कम 1200 किलोमीटर की दूरी कम हो जाएगी। मतबल खतरे के समय चीन के लड़ाकू पोत पहले के मुकाबले कुछ दिन के मुकाबले अब मात्र कुछ घंटो में हिंद महासागर में आ धकेंगे।  

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