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शी जिनपिंग पूरी जिंदगी बने रह सकते हैं राष्‍ट्रपति, चीन ने संविधान में किया बदलाव

जिनपिंग माओत्से तुंग के बाद चीन के दूसरे सबसे ताकतवर नेता हैं।

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बीजिंग. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के तीसरी बार राष्ट्रपति बनने का रास्ता साफ हो चुका है। रविवार को चीन की संसद ने संविधान से उस नियम को हटा दिया जिसके तहत कोई भी शख्स सिर्फ दो बार ही राष्ट्रपति रह सकता है। इसके साथ ही जिनपिंग जब तक चाहें तब तक देश के राष्ट्रपति रह सकते हैं। चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी ने पिछले हफ्ते संसद में इस सिलसिले में प्रस्ताव पेश किया था। वोटिंग में कांग्रेस के 2964 सदस्यों में से सिर्फ दो ने राष्ट्रपति बनने की सीमा बढ़ाए जाने के खिलाफ वोट किया, जबकि तीन सदस्यों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया।

 

 

 

चीन में 70  साल है रिटायरमेंट की उम्र

पिछले साल अक्टूबर में जिनपिंग के खास 69 साल के वांग किशान ने पार्टी की स्टेंडिंग कमेटी से इस्तीफा दे दिया था। चीन में 70 साल की उम्र के बाद अधिकारी अपने पद पर नहीं रह सकते। हालांकि, इस्तीफा देने के बाद इसी साल उन्हें संसद प्रतिनिधि बनाया गया।

 

सूत्रों के मुताबिक, चीन की लीडरशिप उन्हें उपराष्ट्रपति बनाना चाहती है। अगर 70 साल की उम्र के बाद भी वांग ने अपने प्रतिनिधि पद से इस्तीफा नहीं दिया तो शी जिनपिंग को दो बार से ज्यादा राष्ट्रपति बनना तय हो जाएगा।

 

चीन में पार्टी अध्यक्ष का रोल राष्ट्रपति से भी ज्यादा बड़ा माना जाता है और जिनपिंग को पार्टी में जल्द ही वो स्थान दिया जा सकता है। जिससे राष्ट्रपति पद से हटने के बाद भी वो चीन के सबसे ताकतवर शख्स बने रह सकते हैं।

 

माओ के बाद दूसरे सबसे ताकतवर नेता बने जिनपिंग

64 साल के शी जिनपिंग पिछले साल ही लगातार दूसरी बार राष्ट्रपति चुने गए हैं। संसद में राष्ट्रपति पद के लिए खड़े होने की सीमा खत्म किए जाने के बाद अब जिनपिंग माओत्से तुंग के बाद चीन के दूसरे सबसे ताकतवर नेता हैं।

 

पिछले हफ्ते इस प्रस्ताव को पेश करने से पहले कम्युनिस्ट पार्टी की 7 सदस्यीय स्टेंडिंग कमेटी ने एकमत से पुराने नियम को बदलने पर मुहर लगाई थी। इसके बाद से ही कहा जा रहा था कि जिनपिंग अब अपने पूरे जीवनकाल तक चीन के राष्ट्रपति रहना चाहते हैं।

 

हाल में रक्षा बजट बढ़ाकर चर्चा में आया था चीन

चीन ने 2018 के लिए अपना रक्षा बजट 8.1 फीसदी बढ़ाकर 175 अरब डॉलर (11.38 लाख करोड़ रुपए) कर दिया है। इसको लेकर दुनियाभर में चर्चा हो रही है कि चीन ऐसा क्‍यों कर रहा है। राजनीतिक तौर पर इसे शी जिनपिंग के राजनीतिक असर को व्‍यापक करने और तीसरी पारी की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा था। जिसकी पुष्टि चीन की संसद में संविधान के हुए बदलाव से साफ दिख रहा है।

 

चीन में ऐसा पहली बार हो रहा है, जब माओ के बाद उन जैसा कद किसी नेता को देने की तैयारी है। शी जिनपिंग को अपनी पोजिशन को मजबूत बनाए रखने के लिए यह साबित करना आवश्‍यक है उनकी सेना दुनिया में किसी से कम नहीं है। बल्कि अमेरिका जैसी ताकतों के बराबर है। ऐसे में रक्षा खर्च बढ़ाकर एक मजबूत संकेत दिया गया।

 

ट्रम्‍प ने किया था समर्थन

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी शी जिनपिंग के आजीवन राष्ट्रपति रहने के प्रस्ताव का समर्थन किया था। चीन के संविधान में हुए इस बदलाव के बाद चीन कई तरह की अटकलों का दौर शुरू हो गया था। चीनी क्रांति के बाद पार्टी के संस्थापक माओ जेदोंग ने भी निरंकुश सत्ता का उपभोग किया था।

 

नेशनल पीपुल्स कांग्रेस के प्रवक्ता झांग येसूई ने पहली बार पार्टी के इस फैसले पर कहा था कि सीपीसी के संविधान के मुताबिक राष्ट्रपति के लिए तो कार्यकाल की सीमा है, लेकिन पार्टी प्रमुख और सैन्य प्रमुख के कार्यकाल के बारे में कोई सीमा निर्धारित नहीं है। संविधान अब तक राष्ट्रपति के कार्यकाल के बारे में भी इसी परंपरा का पालन करता रहा है।

 

शी ने 2012 में सत्ता संभाली थी। इसके अलावा वह पार्टी और सेना के अध्यक्ष रहे। चीन में पार्टी और सेना के प्रमुख का पद महत्वपूर्ण होता है, जबकि राष्ट्रपति का पद कुल मिलाकर रस्मी होता है।

 

 

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