बिज़नेस न्यूज़ » Economy » Internationalलौट आया चीन का पुराना मर्ज, कहीं ये बर्बादी की शुरुआत तो नहीं

लौट आया चीन का पुराना मर्ज, कहीं ये बर्बादी की शुरुआत तो नहीं

इकोनॉमी से जुड़े जानकारों की मानें तो कर्ज का यह मर्ज चीन के लिए नासूर बन सकता है...

1 of

नई दिल्‍ली। चीन का पुराना मर्ज फिर से उभर आया है। हाल में आए डाटा के मुताबिक, चीन की स्‍थानीय सरकारों का कर्ज और बढ़ गया है। यह तब हो रहा है जब चीन की सरकार कर्ज और घाटे को कम करने में कोई कसर बाकी नहीं रख रही है। हालांकि पिछले सालों में उसकी ओर से की गई हर कोशिश बेकार और बेनतीजा ही साबित हो रही है। दुनिया भर में इकोनॉमी से जुड़े जानकारों की मानें तो कर्ज का यह मर्ज चीन के लिए नासूर बन सकता है। अगर ऐसा हुआ तो दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी का दम भरने वाला ड्रैगन बर्बादी के मुहाने पर पहुंच जाएगा। 

 

ये बर्बादी की शुरुआत तो नहीं 
डाटा के मुताबिक, 2017 में चीन की स्‍थानीय सरकारों के कर्ज में करीब 7.5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। यह पिछले साल के मुकाबले दो गुना है। कुल कर्ज की बात करें तो यह करीब 16.47 लाख करोड़ युआन या 2.56 लाख करोड़ डॉलर पर है। जबकि बीजिंग का टार्गेट इसे 18.82 लाख करोड़ युवान के भीतर रखने का  है। इस हिसाब से स्‍थानीय सरकारों का कर्ज चीन सरकार की ओर से तय की गई सीमा के भीतर ही है। हालांकि जानकार मान रहे हैं कि कर्ज इसी तरह बढ़ता रहा तो चीन की इकोनॉमी को क्रैश होने से कोई नहीं बचा पाएगा। 

 

 

कर्ज की दर 10 फीसदी सालाना 
दरअसल जानकारों की इस चिंता के पीछे चीन का इकोनॉमी की इकोनॉमिक हिस्‍ट्री है। 2008 में आई ग्‍लोबल मंदी के बाद से ही चीन का कर्ज का औसन कभी कम नहीं हो पाया। IMF  का अनुमान है कि बीते करीब 10 सालों की बात करें तो यह करीब 10 फीसदी की दर से ही बढ़ा है। इसके चलते 2016 तक आते आते चीन का उसकी कुल जीडीपी का 234 फीसदी हो चुका है। 

 

 

तो क्‍या चीन के मॉडल में ही खामी है 

दरअसल चीन की सबसे बड़ी ताकत ही उसकी कमजोरी बनता जा रहा है। चीन की सरकारों ने एक्‍सपोर्ट बढ़ाया और भारी इन्‍वेस्‍टमेंट किया। इस मॉडल के चलते 2 दशकों तक चीन ने भारी आंकड़ों के हिसाब से भारी तरक्‍की तो की, लेकिन उसका कर्ज बढ़ता रहा और आज यह चीन के गले की फांस बनता जा रहा है। इ ससे पहले बैंकों के सामूहिक बैंक ने 2016 में ही कहा था कि अगर चीन की इकोनॉमी कर्ज ऐसे ही बढ़ा तो ग्‍लोबल इकोनॉमी ट्रैक से उतर सकती है। 

prev
next
मनी भास्कर पर पढ़िए बिज़नेस से जुड़ी ताज़ा खबरें Business News in Hindi और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट