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अमेरिका के खिलाफ WTO पहुंचा चीन, स्‍टील-एल्‍युमीनियम टैरिफ पर दर्ज कराई शिकायत

अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वार अब वर्ल्‍ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन यानी WTO तक पहुंच गया है।

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नई दिल्‍ली. अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वार अब वर्ल्‍ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन यानी WTO तक पहुंच गया है। चीन ने मंगलवार को अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनॉल्‍ड ट्रम्‍प की ओर से इम्‍पोर्ट होने वाले स्‍टील और एल्‍युमीनियम पर बढ़ाई गई ड्यूटी के खिलाफ WTO में ट्रेड शिकायत दर्ज कराई है। जिनपिंग सरकार और ट्रम्‍प के बीच ट्रेड वार में टैरिफ एक अहम मसला है। ट्रम्‍प ने टेक्‍नोलॉजी पॉलिसी के तहत चीनी सामानों पर 50 अरब डॉलर की ड्यूटी बढ़ाने की चेतावनी भी दी है। इससे एक नया विवाद शुरू हो सकता है। 

 

 

WTO के अनुसार, चीन ने स्‍टील और एल्‍युमीनियम विवाद पर अमेरिका के साथ परामर्श के लिए 60 दिन की गुजारिश की है। यदि इस दौरान रास्‍ता नहीं निकलता है तो चीन के अगला कदम यही हो सकता है कि वह इस विवाद का समाधान ट्रेड एक्‍सपर्ट्स के पैनल से मांग सकता है। चीन का कहना है कि स्‍टील पर 25 फीसदी और एल्‍युमीनियम पर 10 फीसदी अतिरिक्‍त ड्यूटी लगाना अंतरराष्‍ट्रीय व्‍यापार नियमों का उल्‍लंघन है। बता दें,  बीते महीने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्‍प ने अमेरिका में स्टील पर 25 फीसदी और एल्यूमीनियम पर 10 फीसदी टैरिफ बढ़ाके वाले कानून पर हस्ताक्षर कर ग्लोबल ट्रेड वार की औपचारिक शुरुआत कर दी थी।

 

डिमांड से ज्‍यादा है सप्‍लाई 
चीनी इंडस्‍ट्री में स्‍टील और एल्‍युमीनियम ऐसे मेटल हैं जिनकी सप्‍लाई डिमांड से ज्‍यादा है। चीन के व्‍यापार सहयोगियों की यह शिकायत है कि उसकी मिलें कम कीमतों पर सरप्‍लस स्‍टील और एल्‍युमीनियम एक्‍सपोर्ट कर रहे हैं। जोकि अमेरिका और यूरोप में नौकरियों के लिए गंभीर खतरा है। 

 

क्‍या है अमेरिका-चीन का ट्रेड वॉर?  
गत 5 अप्रैल को अमेरिका ने चीनी प्रोडक्‍ट्स पर अतिरिक्त 100 अरब डॉलर का इम्‍पोर्ट ड्यूटी लगाने का प्रस्ताव रखा था। इससे पहले अमेरिका ने इसी सप्ताह 4 अप्रैल को चीन के करीब 1,300 उत्पादों पर 25 फीसदी इम्‍पोर्ट ड्यूटी बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था। अगर बुधवार का प्रस्ताव पारित हो जाता है, तो चीन को करीब 50 अरब डॉलर की झटका लगने वाला है। दूसरी ओर, अमेरिका के इम्‍पोर्ट ड्यूटी पर जवाबी कार्रवाई करते हुए चीन ने अमेरिका के 5000 करोड़ रुपए के उत्पादों पर इम्‍पोर्ट ड्यूटी बढ़ाने का फैसला किया था। वहीं, चीन अमेरिका से आयातित 106 उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाएगा। चीन अमेरिका से आयात होने वाले सामानों में जिनमें प्लास्टिक, एग्री प्रोडक्ट, ऑटो प्रोडक्ट, सोयाबीन,कार और केमिकल्स पर अतिरिक्त आयात शुल्क लगाएगा।

 

बढ़ सकता है ट्रेड वार का दायरा
आर्थिक मामलों के जानकार पनिंदकर पई का कहना है कि मौजूदा समय में अमेरिका नेशन फर्स्ट की पॉलिसी पर काम कर रहा है। अगर यूएस इसी तरह से एग्रेसिव ट्रेड पॉलिसी पर काम करता रहा तो दूसरे बड़ी इकोनॉमी वाले देश भी यूएस के साथ नेशन फर्स्ट की पॉलिसी पर काम करना शुरू कर देंगे। इसमें चीन, जापान और यूरोपीय देशों की प्रमुख भूमिका हो सकती है। ऐसे में इस बात का डर बन गया है कि 2 देशों के बीच शुरू हुए ट्रेड वार की आंच कई देशों तक फैल जाएगी। ऐसा हुआ तो ट्रेड वार में फंसे देशों के साथ दूसरे देशों की व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित होंगी, जिससे नेशनल इनकम कमजोर होगी। पई ने इस संभावना से भी इंकार नहीं किया कि अगर ट्रेड वार लंबा खिंचता है तो दुनिया एक और मंदी की ओर जा सकती है। 

 

भारत के मुकाबले चीन के साथ कई गुना ट्रेड डेफिसिट   
अमेरिका जहां चीन को 13040 करोड़ डॉलर का एक्सपोर्ट करता है, वहीं, चीन से वह 50560 करोड़ डॉलर का इंपोर्ट करता है। यानी चीन के साथ व्यापार घाटा 37500 करोड़ रुपए है। चीन यूएस के साथ लीडिंग ट्रेड पार्टनर है, वहीं भारत टॉप ट्रेडिंग पार्टनर्स में शामिल नहीं है। हालांकि भारत बड़ी मात्रा में यूएस में आईटी सर्विस, टेक्सटाइल, कीमती पत्थरों का निर्यात करता है। वहीं, जापान के साथ यूएस का व्यापार घाटा 6880 करोड़ डॉलर, जर्मनी के साथ 5420 करोड़ डॉलर और मैक्सिको के साथ 7100 करोड़ डॉलर है। वहीं, इस तुलना में भारत के साथ यूएस का व्यापार घाटा करीब 2290 करोड़ डॉलर है जो बहुत कम है। 

 

 

आगे पढ़ें... ट्रेड वॉर में भारत कितना सेफ है? 

 

 

ट्रेड वार से भारत कितना सेफ​? 

ट्रेड वार की आंच भारत तक पहुंचेगी, इसकी संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। यूएस ने जिस तरह से चीन से आयात पर टैरिफ लगाया है, उसी तरह से वह भारत से आयात होने वाले इंपोर्ट पर भी ड्यूटी बढ़ा सकता है। असल में भारत के साथ भी यूएस का कारोबार देखें तो घाटे में अमेरिका ही है। भारत का यूएस के साथ व्यापार WTO के नियमों और 2005 के ट्रेड पॉलिसी फोरम के आधार पर होता है। पिछले साल भारत-अमेरिका में 6700 करोड़ डॉलर का करोबार हुआ था।
वहीं, चीन के साथ 7148 करोड़ डॉलर का कारोबार भारत ने किया था। यानी ट्रेड पार्टनर की बात करें तो भारत-अमेरिका, भारत-चीन आपस में बड़े ट्रेड पार्टनर हैं। भारत के लिहाज से अमेरिका और चीन टॉप ट्रेड पार्टनर हैं। ऐसे में अगर यूएस-चीन के बीच वार से व्यापारिक माहौल बिगड़ता है तो इसका असर भारत पर पड़ना तय है। 

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