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खास खबर: डिफेंस पर इतना क्‍यों खर्च कर रहा है चीन, भारत को संदेश या अमेरिका को वार्निंग

नई दिल्‍ली. सस्‍ती मैन्‍युफैक्‍चरिंग से भारत समेत दुनिया के कई देशों की घरेलू इंडस्‍ट्री को बर्बाद करने वाला चीन अपने सैन्‍य खर्च और विस्‍तारवादी नजरिए से भी दूसरों के लिए मुश्किलें पैदा करता रहा है। बीजिंग के ग्रेट हॉल ऑफ पीपुल में सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी के 3000 प्रतिनिधियों के सामने चीन के प्रधानमंत्री ली केकियांग ने एक रिपोर्ट पेश की। इसमें यह बताया गया कि चीन ने 2018 के लिए अपना रक्षा बजट 8.1 फीसदी बढ़ाकर 175 अरब डॉलर (11.38 लाख करोड़ रुपए) कर दिया है।

अब यहां अहम सवाल यह है कि चीन डिफेंस पर इतने पैसे क्‍यों खर्च कर रहा है, यह भारत, जापान, वियतनाम जैसे देशों के लिए संदेश है या हवा से लेकर सागर में अमेरिकी क्षमता को चुनौती। इसे हम दो तरह से समझते हैं- राजनीतिक-आर्थिक और सामरिक। 

 

1. राजनीतिक-आर्थिक पक्ष 

चीन में ऐसा पहली बार हो रहा है, जब माओ के बाद उन जैसा कद किसी नेता को देने की तैयारी है। चीन की कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के इतिहास में उनके विचारों को जगह दी गई। इससे भी इतर, अनिश्चितकाल के लिए सत्ता राष्ट्रपति शी जिनपिंग को सौंपने की कोशिशें की जा रही है। चूंकि, चीन की सत्‍ता का ट्रेडिशनल नजरिया विस्‍तारवादी रहा है। ऐसे में शी जिनपिंग को अपनी पोजिशन को मजबूत बनाए रखने के लिए यह साबित करना आवश्‍यक है उनकी सेना दुनिया में किसी से कम नहीं है। बल्कि अमेरिका जैसी ताकतों के बराबर है। 

 

घरेलू राजनीति में मजबूत होंगे जिनपिंग 

साउथ-ईस्‍ट एशिया व चीन मामलों के जानकार और दिल्‍ली यूनिवर्सिटी के असिस्‍टेंड प्रोफेसर प्रशांत कुमार ने moneybhaskar.com को बताया कि चीन के डिफेंस बजट में बढ़ोत्‍तरी के तीन बड़े राजनीतिक मायने हैं। पहला, घरेलू राजनीति, दूसरा ग्‍लोबल महत्‍वाकांक्षा और तीसरा आर्थिक पहलू। 


घरेलू राजनीति: प्रशांत कुमार बताते हैं कि शी जिनपिंग ने अपनी शुरुआती दो पारी में घरेलू स्‍तर पर अपनी इमेज भ्रष्‍टाचार को समाप्‍त करने वाले लीडर के रूप में बनाई। अब उनकी तीसरी पारी की तैयारी है। भ्रष्‍टाचार का मसला अब ज्‍यादा प्रासंगिक नहीं है। ऐसे में घरेलू राजनीति में अपने को बनाए रखने के लिए अब शी जिनपिंग को यह दिखाना है कि चीन सुपर पावर है। इसके लिए चीनी सेना को अमेरिका के मुकाबले ताकतवर दिखाना जरूरी है। जाहिर है कि इसमें खर्च भी ज्‍यादा होगा। 


ग्‍लोबल महत्‍वाकांक्षा: प्रशांत कुमार का कहना है कि भारत, जापान, साउथ-चाइना सागर में विवाद को देखते हुए चीन अपनी ताकतवर छवि सामने रखना चाहता है। ऐसे में यह दिखाना जरूरी है कि चीन की सेना आधुनिक है और वह स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। 


आर्थिक पक्ष: प्रशांत कुमार का कहना है कि चीन सीपीईसी जैसे प्रोजेक्‍ट पर अरबों डॉलर का निवेश कर चुका है। अब इस प्रोजेक्‍ट की सुरक्षा की गारंटी भी उसी पर है। ऐसे में उसके पास डिफेंस बजट बढ़ाने के अलावा दूसरा कोई रास्‍ता नहीं है। ऐसे में चीन का डिफेंस बजट बढ़ाना कोई आश्‍चर्य नहीं है। आगे भी बजट बढ़ सकता है। बता दें, सीपीईसी पर चीन करीब 56 अरब डॉलर लगा चुका है। 

 

 

आगे पढ़ें... चीन के डिफेंस बजट का सामरिक पक्ष 

 

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