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Home » Economy » InternationalYou will also know the Indian government's decision to give the Chinese army to the ITBP jawans

सरहद पर चीन को घेरने के लिए मोदी सरकार ने उठाया यह बड़ा कदम, आप भी जानिए

चीनी सैन्य जमावड़े से निपटने चंडीगढ़ की बजाय लेह में तैनात हुई  ITBP नई फ्रंटियर

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नई दिल्ली. देश की पूर्वी सीमा पर यानी जम्मू कश्मीर से अरुणाचल प्रदेश तक चीन को करारा जवाब देने की तैयारी भारत ने कर ली है। भारत ने अपनी सीमा को मजबूत करने के लिए एक अप्रैल से ITBP का नया फ्रंटियर चंडीगढ़ से लेह स्थानांतरित कर दिया है। फ्रंटियर की लेह में तैनाती से अब चीनी हमलों को फौरन जवाब देने में आसानी होगी। 

 

साढ़े तीन हजार किमी लंबी सीमा की पहरेदारी करता है आईटीबीटी 


भारत तिब्बत बॉर्डर पुलिस (आईटीबीपी ) का  उत्तरपश्चिम फ्रंटियर चीन से लगी भारत की 3488 किलोमीटर लंबी सीमा की पहरेदारी करने की जिम्मेदारी निभाती है। पीटीआई के मुताबिक आईटीबीपी के आईजी अरविंद कुमार ने लेह से बताया कि उन्होंने वे एक अप्रैल से लद्दाख क्षेत्र से रिपोर्टिंग कर रहे है और दिल्ली में फोर्स के मुख्यालय को सूचित कर दिया गया है। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि भारतीय तिरंगे और बल के झंडे को लेह में फहराया गया है।  गौरतलब है कि चंडीगढ़ और लेह के बीच की दूरी 960 किमी है।

 

एक दर्जन बटालियन संभालेंगी जिम्मा 

 

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि आईटीबीपी फ्रंटियर के पास जम्मू-कश्मीर के साथ लगती चीनी सीमा पर तैनात लगभग एक दर्जन बटालियनों की कमान होगी। बर्फीले हमले में पर्वतीय प्रशिक्षित बल की उपस्थिति बढ़ाने के लिए और बटालियनों को भी शामिल किया जाएगा। ITBP ने हाल ही में वाहनों, संचार उपकरणों, हथियारों, तोपखाने और लड़ाकू पैराफर्नेलिया को आदि को भी लेह में स्थानांतरित किया है, जिसमें सड़क और हवाई संपर्क दोनों शामिल हैं।

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माइनस 40 डिग्री में भी तैनात रहेंगे जवान

 

फ्रंटियर लद्दाख की बर्फीली पहाड़ियों की ऊंचाइयों पर 40 बॉर्डर आउट पोस्ट को बनाने और फिर से चालू कर सकती है। जवानों को शत्रुतापूर्ण मौसम का सामना करना पड़ता है क्योंकि पारा शून्य से 40 डिग्री सेल्सियस तक कम होता है और ऊंचाई 8,000-14,000 तक होती है। हालांकि  मौसम नियंत्रण तंत्र और बेहतर पेयजल के लिए सुविधाएं हैं और इस क्षेत्र में ITBP सैनिकों के लिए आराम और रीकूप्रेशन बनाया जा रहा है। 

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अरुणाचल में भी भारत यही कर चुका है


चीन की सीमा के साथ सैन्य बलों को मजबूत करने की योजना के एक हिस्से के रूप में सरकार ने इसी तरह वर्ष 2016 में अरुणाचल प्रदेश के मेघालय में शिलांग से इटानगर के आईटीबीपी के नॉर्थ ईस्ट (एनई) फ्रंटियर को स्थानांतरित किया था। 

 

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चीन की डोकलाम वाली हरकत से लिया सबक 

 

अरुणाचल प्रदेश और लेह क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों में चीनी सेना के साथ आईटीबीपी और भारतीय सेना के जवानों के बीच धक्कामुक्की, गतिरोध और शारीरिक धक्का-मुक्की की घटनाएं हुई हैं। डोकलाम (सिक्किम) में 2017 में भारत और चीन के बीच 73 दिन का सैन्य गतिरोध इसका उदाहरण है। हालांकि, सूत्रों ने कहा है कि वर्ष 2018 में पूर्वी सीमा के सामने इन घटनाओं में लगभग 60 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। 

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