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इंडिया ने किया स्‍क्रू टाइट, तो चीन बोला- हमें भूलानी होगी पुरानी दुश्‍मनी

दुनिया के पुराने ग्‍लोबल ऑर्डर को बदलने के लिए भारत और चीन को यूनिटी दिखानी होगी....

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नई दिल्‍ली। भारत ने एक बार फिर से चीन के विवादित बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव (BRI) पर समर्थन ने इनकार कर दिया है। मंगलवार को खत्म हुई शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के विदेश मंत्रियों की बैठक में बाकी देशों ने इसका समर्थन किया, लेकिन बिदेश मंत्री सुषमा स्‍वाराज ने साफ कहा दिया कि इस परियोजना को लेकर हमारा रुख नहीं बदला है। भारत की ओर से चूड़ी टाइट करने के बाद चीन ने कहा है कि अगर दुनिया के पुराने ग्‍लोबल ऑर्डर को बदलने के लिए भारत और चीन को यूनिटी दिखानी होगी। 

 

चाहता था भारत का समर्थन 
पीएम मोदी के दौरे से ठीक पहले चीन इस कोशिश में था कि भारत प्रोजेक्ट को अपना समर्थन दे। हालांकि उसके हाथ अब भी खाली हैं। दिल्‍ली विश्‍वविद्याल में असिस्‍टेंट प्रोफेसर प्रशांत त्रिवोदी के मुताबिक, चीन को लग रहा था कि वो भारत को इस प्रोजेक्ट के लिए मना लेगा। रूस को छोड़ दिया जाए तो चीन के इस प्रोजेक्‍ट को अभी तक किसी भी बड़े देश ने अपना समर्थन नहीं दिया है। ऐसे में उसे लगता है कि भारत का समर्थन इस प्रोजेक्‍ट को एक वैधानिक और वैश्विक स्‍वीकृति दोनों दिला सकता है।  

चीन ने कहा हमें मिलकर साथ काम करना चाहिए 
भारत के इनकार के बाद चीन के सरकारी अखबार ग्‍लोबल टाइम्‍स में छपे आर्टिकल में कहा गया कि अगर दुनिया के पुराने ग्‍लोबल ऑर्डर में बदलाव लाना है तो भारत और चीन को मिलकर काम करना होगा। अखबार ने हाल में चीन अमेरिका ट्रेड वॉर और चीन के ZTE कॉर्प पर बैन जिक्र करते हुए कहा कि अगर दुनिया के पुरानी पॉलिटिकल और इकोनॉमिक ऑर्डर को बदलना है तो भारत चीन को यूनीटी दिखानी होगी। जानकारों के मुताबिक, इकोनॉमिक ऑर्डर शब्‍द का इस्‍तेमाल करने से साफ है कि वह भारत को BRI का हिस्‍सा बनना चाहता है। क्‍योंकि बिना भारत के वह अमेरिका का मुकाबला नहीं कर सकता है। 

 

 

इन देशों ने BRI को दिया अपना समर्थन 

संघाई सहयोग संगठन के दौरान भारत ने भले ही इस प्रोजेक्‍ट से जुड़ने से इनकार किया हो, लेकिन कजाखिस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने इस परियोजना के प्रति अपना समर्थन दोहराया है। भारत और पाकिस्तान को इस संगठन में पिछले साल ही शामिल किया गया है।  इस परियोजना के पाक अधिकृत कश्मीर से होकर गुजरने की वजह से भारत इसका विरोध करता रहा है। 

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