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तंगहाल पाकिस्तान बर्बादी के कगार पर, रहमत दिखाने से पहले आईएमएफ ने रखी कड़ी शर्तें

शर्त नहीं मानने पर पाकिस्तान हो जाएगा पाई-पाई को मोहताज

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नई दिल्ली. पाकिस्तान की मुश्किलें खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। जितनी कोशिशें पाकिस्तान कर रहा है कि उसका आर्थिक संकट दूर हो जाए, उतना ही ज्यादा वह उलझता जा रहा है।  पाकिस्तान अपनी कंगाली दूर करने के लिए अब इंटरनेशनल मॉनीटरी फंड (IMF) की शरण में गया है। सोमवार को आर्थिक मदद के लिए पाकिस्तान एवं आईएमएफ के  बीच बातचीत हुई, लेकिन कर्ज देने से पहले आईएमएफ की कड़ी शर्तों की वजह से पाकिस्तान पसोपेश में पड़ गया है। अगर पाकिस्तान आईएमएफ की शर्तों को मान लेता है तो वहां बिजली के दाम बढ़ने के साथ ब्याज दरों में बढ़ोतरी हो जाएगी जिससे पाकिस्तान में महंगाई बढ़ेगी। पाकिस्तान शर्त नहीं मानता है तो तंगहाल पाकिस्तान बर्बादी के कगार पर पहुंच जाएगा।

 

पाकिस्तान को है आईएमएफ की जरूरत

मौजूदा वित्त वर्ष में पाकिस्तान की आय और खर्चों में 12 अरब डॉलर का फर्क आ गया है। इस फर्क को दूर करने के लिए पाकिस्तान IMF की शरण में आया है। इसके साथ ही उसने मित्र देशों से भी मदद मांगी है। अरब न्यूज में छपी खबर के मुताबिक पाकिस्तानी वित्त मंत्री असद उमर ने सोमवार बताया कि सऊदी अरब ने पाकिस्तान को 1 अरब डॉलर की मदद दी। 

 

चीनी ऋण से जुड़ी शर्तों का खुलासा करने की मांग

आईएमएफ ने पाकिस्तान से मांग की है कि वह चीन से जुड़े ऋण नियमों का खुलासा करे। चीन से लिए गए ऋण का मुद्दा दोनों के बीच बातचीत का अहम मुद्दा रहा। पाकिस्तानी वित्त मंत्री के मुताबिक वे किसी भी बाहरी ऋण से जुड़ी जानकारी साझा करने को तैयार हैं। 

 

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आईएमएफ ने रखीं ये शर्तें

-पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने पाकिस्तान को कहा है कि वह इस वित्त वर्ष के अपने फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू के टैक्स कलेक्शन टार्गेट को 300 अरब रुपए बढ़ाकर 4.7 लाख करोड़ रुपए करे। मौजूदा वक्त में जहां पाकिस्तान इस वित्त वर्ष के टार्गेट 4.398 लाख करोड़ रुपए से पहले ही 68 अरब रुपए पीछे चल रहा हैवहां पाकिस्तान के लिए इस शर्त को पूरा करना आसान नहीं होगा।

 

-IMF ने पाकिस्तान को बिजली के दामों में 22 फीसदी वृद्धि करने को कहा ताकि उधार का सिलसिला टूटे। फंड का कहना था कि कई देशों ने अपने शुल्क बढ़ाकर इस ऋण से मुक्ति पाई है।

 

-फंड ने महंगाई रोकने के लिए ब्याज दरों में अत्यधिक वृद्धि करने की शर्त रखी है। लाेकल करेंसी की कीमत घटने और बिजली के दाम और टैक्स दरें बढ़ने से महंगाई और बढ़ रही है। फंड ने मांग रखी है कि करेंसी की कीमत बहुत कम कर दी जाए और पूरी तरह फ्री-फ्लोट एक्सचेंज रेट लागू किए जाएं। क्योंकि अगर अब ब्याज दरें बढ़ती हैं तो पाकिस्तानी केंद्र सरकार को ब्याज अदायगी के लिए लगने वाली रकम और बढ़ जाएगी। फिलहाल सह 1.82 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई है।

 

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अन्य शर्तें 

 

IMF ने पाकिस्तान के सामने यह शर्त भी रखी है कि वह अपनी ऑडिट पॉलिसी में बदलाव लाए। पाकिस्तान में एक ऑडिट होने के बाद किसी कंपनी का तीन साल तक ऑडिट नहीं किया जाता है। IMF चाहता है कि परिस्थिति बदली जाए। हालांकि पाकिस्तानी वित्त मंत्री के मुताबिक अगर ऐसा किया गया तो कंपनियां और व्यापारी नाराज होंगे।

 

-पाकिस्तान और आईएमएफ के बीच इस बात को लेकर भी बहस चल रही है कि वहां के नेशनल फाईनेंस कमीशन अवॉर्ड के तहत प्रांतों को संसाधनों का बंटवारा कैसे होगा। आईएमएफ चाहता है कि बेनजीर इनकम सपोर्ट प्रोग्राम के तहत दिए जाने वाली आय का चयन प्रांत खुद करें। हालांकि यह तब होगा जब प्रांत खुद इसके लिए तैयार होंगे।

 

 

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