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पेट्रोल पर उल्‍टा पड़ सकता है ट्रम्‍प का दांव, क्‍या भारत के सामने मजबूर होगा जाएगा अमेरिका?

चीन के साथ ट्रेड वॉर अमेरिकी क्रूड सप्‍लाई को प्रभावित करने का काम सकती है...

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नई दिल्‍ली। चीन के साथ छिड़ी ट्रेड वार और ईरान पर नए सिरे से प्रतिबंध क्‍या अमेरिका को भारत के सामने मजबूर कर सकते हैं। समाचार एजेंसी रायटर्स की एक रिपोर्ट पर नजर दौड़ाएं तो पेट्रोल के मोर्चे पर भारत इस स्थिति में आ सकता है। हालांकि यह तब होगा, जब चीन ट्रेड वार में अमेरिका के खिलाफ कदम उठाए। आइए जानते हैं कि आखिर यह हो सकता है तो कैसे हो सकता है। अमेरिका बढ़ा रहा अपना क्रूड एक्‍सपोर्ट....   

अमेरिका एक तरफ तो ईरान के साथ तेल खरीदने वाले भारत जैसे देशों पर यह दबाव बना रहा है कि वो 4 नवंबर तक ईरान के साथ क्रूड ऑयल का इम्‍पोर्ट जीरो लेवल पर लाएं। वहीं दूसरी ओर वह अपने क्रूड ऑयल एक्‍सपोर्ट को रिकॉर्ड लेवल पर ले जा रहा है। अप्रैल तक वह रोजाना 17.6 लाख बैरल क्रूड दुनिया के अलग अलग देशों को बेच रहा था। अमेरिका की ओर से भारत को होने वाले क्रूड एक्‍सपोर्ट की बात करें तो यह जून में रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच चुका है। माना जा रहा है कि जुलाई तक अमेरिका भारत को करीब 1.5 करोड़ बैरल क्रूड एक्‍सपोर्ट कर लेगा। यह 2017 के उनकी ओर से किए गए कुल 80 लाख बैरल क्रूड एक्‍सपोर्ट से दोगुने से भी अधिक है।

 

भारत चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा खरीददार 

मौजूदा समय में भारत क्रूड इम्‍पोर्ट करने वाला चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा देश है। अमेरिकी क्रूड की बात करें तो यहां भी वह चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा इम्‍पोर्टर है। समाचार एजेंसी रायटर्स से बातचीत में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के फाइनेंस हेड एके शर्मा बताते हैं कि, अपनी कम कीमत के चलते अमेरिकी क्रूड भारतीय रिफाइनरीज के बीच लोकप्रिय हो रहा है। अगर चीन अमेरिका ने एनर्जी इम्‍पोर्ट कट करता है तो भारत में इम्‍पोर्ट बढ़ सकता है। 

 

क्‍या भारत के सामने क्रूड पर मजबूर होगा अमेरिका 
अमेरिका की चीन के साथ इस वक्‍त ट्रेड वार चल रही है। ट्रंप प्रशासन ने हाल में चीन पर नए सिरे से टैरिफ लगाया है। अगर चीन भी इसके जवाब में टैरिफ लगाता है तो अमेरिकी ऑयल की भारत में आवक बढ़ सकती है। क्‍यों ऐसी स्थिति में उसके क्रूड की खपत के लिए भारत से बड़ा और कोई खरीदार नहीं बचेगा। मतलब साफ है अमेरिका के लिए भारत को सस्‍ता क्रूड बेचना मजबूरी हो सकती है। 

 

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टॉप क्रूड ऑयल प्रोड्यूसर बनने की राह में अमेरिका  
रूस और सऊदी अरब के साथ अमेरिका अब दुनिया का टॉप क्रूड प्रोड्यूसर बनने की राह में अग्रसर है। ताजा अंकड़ों के मुताबिक, हाल में अमेरिका ने प्रोडक्‍शन में जैसी तेजी दिखाई है, उसके चलते अगले साल तक उसका रोजना क्रूड आउटपुट 1.18 करोड़ प्रति बैरल के लेवल पर जा सकता है। इस साल जून तक वह रोजाना 1 करोड़ 9 लाख बैरल क्रूड ऑयल का प्रोडक्‍शन कर रहा था। अगर ऐसा होता है तो वह 1970 के दशक के बाद एक बार फिर से दुनिया का टॉप क्रूड प्रोड्यूसर बन सकता है। 1960 के दौर तक अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा क्रूड प्रोड्यूसर हुआ करता था। 1974 में सोवियत संघ और 1976 में सऊदी अरब दुनिया का सबसे बड़ा क्रूड उत्‍पादन बनता चला गया। बाद के दशकों में अमेरिका लगाकर प्रोडक्‍शन में कटौती करता चला गया। 21वीं सदी के शुरुआती दशक में वह दुनिया का सबसे बड़ा क्रूड इम्‍पोर्टर बन चुका था।  

 

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...तो उलटा पड़ सकता है ट्रम्‍प का दांव 
ट्रंप ने चीन के साथ ट्रेड वार छेड़ रखी है। इस वार का मकसद चीन के साथ अमेरिकी कारोबारी घाटे को कम करना है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि ट्रेड वार जैसे कदमों से चीन अमेरिकी कारोबारी घाटे को कम करने उपाय ढूंढने को मजबूर हो जाएगा। इसको देखते हुए अमेरिका ने चीन के खिलाफ नए सिरे से टैरिफ लगाए हैं। माना जा रहा है कि इसके बाद चीन अमेरिकी एनर्जी प्रोडक्‍ट पर टैरिफ लगा सकता है। अगर ऐसा होता है तो क्रूड मार्केट में बढ़त बनाने का ट्रंप का बड़ा दांव उल्‍टा पढ़ सकता है। चीन के कदम से अमेरिकी क्रूड की डिमांड नीचे जाएगी और ट्रंप प्रशासन को भारत जैसे देशों को मजबूरी में सस्‍ता क्रूड बेचना पड़ सकता है।  

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