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प्‍लास्‍टिक कचरे से बना रहे डीजल-पेट्रोल, घर में कि‍या आसान जुगाड़

ये लोग इससे ईंधन तक बनाकर बेच रहे हैं।

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नई दि‍ल्‍ली। प्‍लास्‍टि‍क के डि‍ब्‍बे, बोतल, टूटे खि‍लौने और ऐसी चीजें आपके लि‍ए कबाड़ हो सकती हैं मगर कुछ लोगों के लि‍ए यह मोटी आमदनी का जरि‍या बन गया है। ये लोग इससे ईंधन तक बनाकर बेच रहे हैं। इस ईंधन से गाड़ी चल रही है, जनरेटर चल रहा है और गैस का चूल्‍हा भी जल रहा है। जि‍स तरह से यह लोग बेहद कम मशीनरी का इस्‍तेमाल करते हुए प्‍लास्‍टि‍क को डीजल, पेट्रोल, केरोसि‍न और गैस में बदल रहे हैं उसने सबको हैरानी में डाल दि‍या है।

 

इनका तरीका काफी आसान है और कोई भी इस तरह से डीजल-पेट्रोल बना सकता है। रॉयटर्स ने सीरि‍या के एक परि‍वार पर रि‍पोर्ट तैयार की है कि‍ कि‍सा तरह से यह परि‍वार प्‍लास्‍टि‍क के कचरे से गैस और तेल बनाकर बेच रहा है, जि‍नसे गाड़ि‍यां चल रही हैं और घरों के चूल्‍हे जल रहे हैं। ये है तरीका - 
 

1 प्‍लास्‍टि‍क पकाते हैं
सबसे पहले प्‍लास्‍टि‍क इकट्ठा कि‍या जाता है और अगर वह गीला है तो उसे सुखा लि‍या जाता है। इस प्‍लास्‍टि‍क को एक बड़े ड्रम या बॉयलर में पकाया जाता है। यह सीलबंद होता है मगर ऊपर से भाप नि‍कलने के लि‍ए एक पाइप लगा होता है। प्‍लास्‍टि‍क को अगर ऑक्‍सीजन की गैर मौजूदगी में पकाया जाता है तो वह पि‍घलने और खौलने लगता है मगर जलता नहीं है। इससे भाप पैदा होती है। यह भाप ऊपर लगे पाइप के जरि‍ए एक वाटर टैंक में जाती है। वाटर टैंक में सामान्‍य ताप का पानी भरा होता है। 

2 भाप से बनता है लि‍क्‍वि‍ड
बॉयलर से आ रहे पाइप का आखि‍री छोर पानी में डूबा रहता है। यह भाप पानी में आती है और लि‍क्‍वि‍ड में तब्‍दील हो जाती है। यह लि‍क्‍वि‍ड पानी से हल्‍का होता है इसलि‍ए वो पानी के ऊपर तैरता रहता है और इकट्ठा होता जाता है। यहां से तेल को नि‍कालने के लि‍ए एक पाइप लगा होता है, जि‍सका मुंह पानी के लेवल से जरा सा ऊपर होता है। जब तेल इकट्ठा होता है वो पानी के लेवल से ऊपर भरने लगता है और इस पाइप के जरि‍ए दूसरे टैंक में जमा होता जाता है।
 

 

3 लि‍क्‍वि‍ड से बनता है डीजल पेट्रोल
दूसरे टैंक में जमा हुआ यह लि‍क्‍वि‍ड ही ईंधन है। यह ईंधन साफ नहीं होता है। इसे आग लगाने के काम में आसानी से यूज कि‍या जा सकता है,  मगर रि‍फाइन करने के बाद यही लि‍क्‍वि‍ड डीजल, पेट्रोल और केरोसि‍न में तब्‍दील हो जाता है। रॉयटर्स ने सीरि‍या के एक परि‍वार की बताई है जो इसी तरीके ईंधन बनाकर बेच रहा है।

4 तब भी बच जाती है गैस
बॉयलर से नि‍कली सारी गैस तेल में नहीं बदलती कुछ गैस उसी तरह रह जाती है। यह गैस भी जलने वाली होती है। इसे इकट्ठा करने के लि‍ए वाटर टैंक के ऊपरी हि‍स्‍से में एक पाइप लगा होता है। इस पाइप के जरि‍ए गैस को दूसरी जगह जमा कर लि‍या जाता है। यह गैस वैसे ही जलती है जैसे एलपीजी या नेचुरल गैस। 

 

 

300 रुपए में एक लीटर
रि‍पोर्ट के मुताबि‍क, सीरि‍या का यह परि‍वार करीब 300 रुपए में एक लीटर ईंधन बेच रहा है। युद्ध से बुरी तरह प्रभावि‍त इनके इलाके के लोग ईंधन की जरूरत के लि‍ए इस परि‍वार पर ही निर्भर हैं।

कि‍तना प्‍लास्‍टि‍क यूज होता है
इस प्रोसेस में वेस्‍टेज बहुत कम है। इस प्रोसेस के जरि‍ए 85 कि‍लो ईंधन हासि‍ल करने में 100 कि‍लो प्‍लास्‍टि‍क लगता है। सीरि‍या का यह परि‍वार हर दि‍न 800 से 1000 कि‍लो प्‍लास्‍टि‍क को रि‍साइकि‍ल करता है। 

 

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