Home » Economy » InternationalA place where people work in garbage and dream of gold, a story of hopes and humiliation.

जहां कूड़े से निकलता है सोना, तकदीर चमकाने के लिए लाखों में मारामारी

बिना नियम कानून वाला एक ऐसा कस्बा जहां सोने की उम्मीद में गुलामी करने तक को तैयार

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नई दिल्ली। दुनिया का सबसे ऊंचाई पर बना एक कस्बा। यहां पहुंचने का एक ही रास्ता है और उसके दोनों तरफ गंदगी का ढेर लगा हुआ है। सड़क भी खस्ताहाल है, गड्‌ढों से पटी हुई। यहां कुछ 60 हजार लोग रहते हैं। ऐसी जगह रहने की बस एक ही वजह है और वह है सोना। इस कस्बे में सोने का अवैध खनन होता है। यहां लोग इस गंदगी के बीच जी रहे हैं, तो सिर्फ इस उम्मीद में कि आज नहीं तो कल उनके भी दिन फिरेंगे और यही सोना उनकी किस्मत चमका देगा। ये है लातिन अमेरिकी के पेरू देश का ला रिंकोनाडा कस्बा। समुद्र तल से 16,453 फीट की ऊंचाई पर बसा कस्बा।

 

पेरू में खोजते हैं सोना

लातिन अमेरिका में पेरू सोने का सबसे बड़ा उत्पादक है। सालाना 150 टन उत्पादन के साथ यह दुनिया का छठा सबसे बड़ा सोना उत्पादक देश है। इसके कई हिस्सों में छोटे स्तर पर अवैध खनन चलता है। हालांकि यह देश के सोना उत्पादन में बहुत थोड़ा योगदान देता है, लेकिन लाखों लोगों की आजीविका इसी पर टिकी है। लोग यहां नदियों में इस कीमती धातु को ढूंढते हैं, बड़े-बड़े पहाड़ों की तलहटी में सुरंगें बना देते हैं।

 

आगे पढ़ें- गंदगी और गुलामी में क्यों जीना चाहते हैं लोग?

 

 

गंदगी से बाहर आने को तैयार नहीं लोग

ला रिंकोनाडा जैसी जगहों पर काम करना आसान नहीं है। यहां लोग गंदगी और बदबू के बीच रहकर अपनी जिंदगी को बेहतर बनाने का ख्वाब देखते हैं। पेरू सरकार लंबे समय से कोशिश कर रही है कि ये लोग वैध रूप से काम करने लगें, लेकिन लोग इसके लिए तैयार नहीं हैं। लोगों को लगता है कि अगर वे सरकार के अधीन होकर सोना ढूंढेंगे तो वे ज्यादा नहीं कमा पाएंगे।

 

गुलामी से कम नहीं है यहां काम करना

यह सिर्फ एक खयाली पुलाव है कि ला रिंकोनाडा में कोई अमीर हो सकता है। यहां पर भी खदानों में काम करने वाले मजदूर कैकोरियो (Cachorreo) सिस्टम के तहत काम करते हैं। लगातार तीस दिनों तक वे कई सबकॉन्ट्रक्टरों में से किसी ने किसी के लिए काम करते रहते हैं और उन्हें इसके बदले कोई पगार नहीं मिलती है। 31वें दिन उन्हें अनुमति होती है कि खदान में जो कुछ भी मिले उसे वे रख सकते हैं। यह एक ऐसा लालच है जो हजारों लोगों को इस गंदगी में खींच लाता है। दुखद बात यह है कि जिस एक दिन की आस में ये मजदूर पूरे महीने खुद को घिसते हैं, उस दिन उन्हें ऐसी जगहों पर भेज दिया जाता है जहां ढूंढने को कुछ होता ही नहीं है। देखा जाए तो यह अाधुनिक जमाने की गुलामी जैसा है।

 

आगे पढ़ें- न कोई नियम न कानून, बस प्रकृति का दोहन 

 

 

लंबे समय से हो रहा है प्रकृति का हनन

धरती के गर्भ से सोना निकालने के लालच के चलते इस क्षेत्र में प्राकृतिक संपदाओं का हनन किया गया है। हर साल खदानों की उत्पादकता कम होती जा रही है। बाजार में भी सोने का मूल्य गिर रहा है। ऐसे में यहां खनन बढ़ता जा रहा है और खदानों की क्षमता से अधिक उनका दोहन किया जा रहा है। इन खदानाें से निकलने वाली गंदगी और mercury पास की झील Titicaca में इकट्‌ठा होती जा रही है। यहां रहने वाले लोगों के मुताबिक इन खदानों के नीचे बहने वाली नदियां इस कदर प्रदूषित हो गई हैं कि मछुआरों को अपना रोजगार छोड़ना पड़ रहा है।

 

यहां नहीं है काेई नियम कानून

न सिर्फ गंदगी और प्रदूषण बल्कि ला रिंकोनाडा कस्बे की सबसे बड़ी समस्या है यहां पर नियम कानून की कमी। यह सबसे खतरनाक जगहों में से एक है। खदानों में काम करने वाले एक दूसरे का सामान छीन लेते हैं और बंदूकें यहां सरेआम बिकती हैं। लोग यहां बस इस उम्मीद में रह रहे हैँ कि किसी दिन उन्हें कुछ ग्राम सोना मिल जाएगा। हालांकि अधिकतर लोग जिस हाल में यहां आए थे, वे वैसे ही यहां से लौट गए।

 
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