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Home » Economy » InternationalMysore born Gita Gopinath becomes first women to be appointed Chief Economist at IMF

नोटबंदी को गलत बताने वाली यह भारतवंशी महिला बनी IMF की प्रमुख आर्थिक सलाहकार, यहां जानिए इनके बारे में सबकुछ

इस पद को संभालने वाली वे पहली महिला हैं

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नई दिल्ली.

भारत में जन्मीं अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (IMF) के चीफ इकॉनमिस्ट का पद-भार संभाल लिया है। यह दायित्व संभालने वाली वह पहली महिला हैं। उन्हें IMF के अनुसंधान विभाग के निदेशक का पद भी सौंपा गया है। 47 वर्षीय गीता फिलहाल हार्वर्ड विश्वविद्यालय में इंटरनेशनल स्टडीज एंड इकोनॉमिक्स की प्रोफेसर हैं। उनका शोध अंतर्राष्ट्रीय फाइनेंस और मैक्रोइकॉनॉमिक्स पर केंद्रित है। हैं। उनकी नियुक्ति पर आईएमएफ की प्रबंध निदेशक क्रिस्टीन लेगार्ड ने कहा, 'गोपीनाथ दुनिया की बेहतरीन अर्थशास्त्रियों में से एक है। उनके पास उम्दा शैक्षणिक योग्यता के साथ व्यापक अंतरराष्ट्रीय अनुभव भी है.'

 

कर्नाटक के मैसूर में जन्मीं गीता के दादा गोविंद नाम्बिआर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के बेहद करीबी माने जाते थे। उनकी दादी भी कम्युनिस्ट पार्टी के लीडर ऐके गोपालन की रिश्तेदार थीं। गीता ने दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज से बीए की पढ़ाई की और फिर दिल्ली स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स में मास्टर्स किया। इसके बाद उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन से एमए की डिग्री हासिल की। 2001 में प्रिंसटन विश्विद्यालय से अर्थशास्त्र में पीएचडी की डिग्री प्राप्त की। उसी साल उन्होंने शिकागो विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर काम शुरू कर दिया। वर्ष 2005 से वह हार्वर्ड विश्वविद्यालय में पढ़ा रही हैं।

 

 

संभाल रही हैं कई पदों को

वह नेशनल ब्यूरो ऑफ इकोनॉमिक रिसर्च में इंटरनेशनल फाइनेंस एंड मैक्रोइकॉनॉमिक्स प्रोग्राम की सह-निदेशक हैंफेडरल रिज़र्व बैंक ऑफ बोस्टन में एक विजिटिंग फैकल्टी हैंफेडरल रिजर्व बैंक ऑफ न्यूयॉर्क के आर्थिक सलाहकार पैनल की सदस्य और केरल राज्य के मुख्यमंत्री की आर्थिक सलाहकार भी हैं। वे अमेरिकी आर्थिक समीक्षा की सह-संपादकअंतरराष्ट्रीय अर्थशास्त्र की वर्तमान हैंडबुक की सह-संपादक और आर्थिक अध्ययन की समीक्षा की संपादक भी रह चुकी हैं। वे विनिमय दरोंव्यापार और निवेशअंतरराष्ट्रीय वित्तीय संकटमौद्रिक नीति और उभरते बाजारों के संकट पर 40 अनुसंधान लेख प्रकाशित कर चुकी हैं.

 

 

नोटबंदी को बताया था गलत

2017 में गीता ने नोटबंदी को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए गलत बताया था। उन्होंने कहा, ‘मैं ऐसे एक भी मैक्रोइकोनॉमिस्ट को नहीं जानती जिसे नोटबंदी का आइडिया सही लगता है। यह ऐसी चीज नहीं है जिसे भारत जैसे देश के लिए किया जाना चाहिए जहां विकास का स्तर पहले ही कम है।उन्होंने यह भी कहा था कि जीएसटी को लागू करना आसान रहा होता अगर नोटबंदी के चलते कैश की किल्लत न हुई होती।

 

 

 

 

 

 

 

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