पाकिस्तान दिवालिया होने की कगार पर, खुद वित्त मंत्री ने किया खुलासा

Finance Minister claims Pakistan faces big trouble on economic surface : पाकिस्तानी वित्त मंत्री असद अमर ने कहा है कि पाकिस्तान का मूल्य ऋण इतनी खतरनाक ऊंचाई पर पहुंच चुका है कि देश दिवालिया होने के कगार के निकट आ गया है। सोशल मीडिया के साथ देश की अर्थव्यवस्था के संबंध में सवाल जवाब के विशेष सत्र में उमर ने बुधवार को कहा कि आप इतने भारी ऋण के बोझ के साथ अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के पास जा रहे हैं। हमें भारी अंतर को पाटना है।

Money Bhaskar

Apr 04,2019 09:20:00 AM IST

नई दिल्ली। पाकिस्तानी वित्त मंत्री असद अमर ने कहा है कि पाकिस्तान का मूल्य ऋण इतनी खतरनाक ऊंचाई पर पहुंच चुका है कि देश दिवालिया होने के कगार के निकट आ गया है। सोशल मीडिया के साथ देश की अर्थव्यवस्था के संबंध में सवाल जवाब के विशेष सत्र में उमर ने बुधवार को कहा कि आप इतने भारी ऋण के बोझ के साथ अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के पास जा रहे हैं। हमें भारी अंतर को पाटना है। उन्होंने कहा कि अगर पीएमएलएन समय के नंबर को देखें तो महंगाई दहाई अंक में थी, हम शुक्रगुजार हैं कि अभी यह उस स्तर को नहीं छू पाई है।

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गरीबों पर महंगाई का अपेक्षाकृत कम प्रभाव
जियो न्यूज के मुताबिक, वित्त मंत्री ने कहा कि पूर्व की भांति मंहगाई अभी दहाई अंक नहीं छू पाई है। उन्होंने कहा कि पहले देखें तो महंगाई ने समाज के हर तबके को समान रूप से प्रभावित किया। यह सही है कि महंगाई ने गरीबों पर अधिक असर डाला, हमारे शासन में यह स्थिति भिन्न है, उच्च आय वर्ग की तुलना में गरीब पर महंगाई का अपेक्षाकृत कम प्रभाव हुआ है। उमर ने माना अर्थव्यवस्था में मंदी है जिसके परिणामस्वरूप रोजगार की दर धीमी है। उन्होंने कहा कि आप कह रहे हैं मेरी सारी नीतियां इशाक डार की तरह ही हैं, इशाक डार का कहना है कि मैंने अर्थव्यवस्था को चौपट कर डाला। उनके कार्यकाल के दौरान पाकिस्तान के इतिहास में पहली बार निर्यात नहीं बढ़ा। डालर मजबूत हुआ। पहले की आर्थिक नीतियों की वजह से और इस कारण एक देश के नाते हमें इतना अधिक नुकसान हुआ।

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9.41 प्रतिशत पर पहुंची महंगाई
पाकिस्तान में मार्च 2019 के दौरान महंगाई की दर पांच वर्ष के उच्चतम स्तर 9.41 प्रतिशत पर पहुंच गई है। पाकिस्तान सांख्यिकी ब्यूरो की तरफ से बीते सोमवार को जारी किए गए महंगाई के आंकड़ों के अनुसार, महंगाई बढ़ने से गरीबी रेखा में रहने वालों की संख्या में 40 लाख का और इजाफा हो जाएगा, जबकि इस साल दस लाख लोग और बेरोजगार हो जाएंगे। महंगाई का यह स्तर अप्रैल 2014 के बाद का सर्वाधिक है। उस समय महंगाई 9.2 प्रतिशत आंकी गई थी। मार्च महीने में ही महंगाई एक माह पहले की तुलना में 1.42 प्रतिशत बढ़ गई है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि महंगाई दहाई अंक में पहुंचने और आर्थिक विकास की गति तीन प्रतिशत से नीचे रहने से देश मुद्रास्फीति जनित मंदी की जाल में फंस सकता है। मुद्रस्फीति जनित मंदी में वस्तुओं और सेवाओं के दाम में तो बढ़ोतरी होती ही है। इस स्थिति में आर्थिक विकास गति मंद पड़ जाती हैं और बेरोजगारी की दर बढ़ जाती है।

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