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चीन बुन रहा जाल, बर्बाद हो सकते हैं 8 देश, पाकिस्‍तान भी शामिल

रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्‍तान और मालदीव समेत दुनिया के 8 देश चीनी कर्ज के जाल में फंसकर बर्बाद हो सकते हैं...

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नई दिल्‍ली। सेंटर फॉर ग्‍लोबल डेवलपमेंट रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्‍तान और मालदीव समेत दुनिया के 8 देश चीनी कर्ज के जाल में फंसकर बर्बाद हो सकते हैं। करीब 8 लाख करोड़ डॉलर की लागत वाला चीन का महत्‍वाकांक्षी वन बेल्‍ट वन रोड इनिशिएटिव (BRI) इन देशों की बर्बादी का कारण बन सकता है। स्‍टडी के मुताबिक, यूरोप, अफ्रीका और एशिया में चलने वाले इस इंफ्रास्‍टक्‍चर प्रोजेक्‍ट के चलते इन देशों के सामने कर्ज का संकट खड़ा हो सकता है।

 

 

 

 

 

चीन बुन रहा जाल 

सेंटर फॉर डेवलमेंट में विजिटिंग फेलो और इस रिपोर्ट के को-ऑथर जॉन हार्ले के मुताबिक, कर्ज में फंसने वाले ज्‍यादातर देश ऐसे हैं, जिन्‍हें अपने इंफ्रा को दुरूस्‍त करने के लिए फाइनेंसिंग की सख्‍त जरूरत है। BRI से उनकी यह जरूरत पूरी हो रही है। खासकर चीज जिस तरह आसानी से लोन दे रहा है, उसे कौन नहीं लेना चाहेगा। इसमें किसी तरह का संकट भी नहीं है। अपने कर्ज के संकट में फंसे किसी देश को चीन जिस तरीके से मैनेज करता है, वह सबसे बड़ी समस्‍या है। 

 

 

 

ऐसे फंसते हैं देख 

आपको बता दें कि कर्ज नहीं चुकाने पाने वाले देशों के खिलाफ चीन की कई तरह के दबाव बनाने के लिए पूरी दुनिया में बदनाम है। श्रीलंका, कम्‍बोडिया और नाइजीरिया को न चाहते हुए भी चीन की शर्तें पर समझौता करने को बाध्‍य होना पड़ा है। कर्ज नहीं चुका पाने पर श्रीलंका को अपना पोर्ट तक चीन को देने के लिए बाध्‍य होना पड़ा है। चीन ने बिना ग्रोथ पोटेंशिल के ऐसे कई देशों को बेतहाशा कर्ज दिया और कर्ज नहीं चुका पाने के एवज में उनकी जमीनें हडप ली या फिर कई तरह के नियम थोप दिए।

 

 

भारत अमेरिका क्‍या करते हैं? 

दरअसल भारत, जापान औ अमेरिका जैसे देश तथा वर्ल्‍ड बैंक तथा आईएमएफ जैसी संस्‍थाएं भी इस तरह के प्रोजेक्‍ट के लिए लोन देते रहे हैं। लेकिन इनके रेट बेहद कम होते हैं। साथ ही ये लोग किसी देश के ग्रोथ पोटेंशियल को भी देखते हैं। मतलब जिस देश को कर्ज दिया जा रहा है वह उसे चुका भी पाएगा या नहीं। अगर वह चुकाने लायक नहीं है, तो उसे लंबी अवधि का लोन दिया जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसके ठीक उलट चीन ये पैरामीटर नहीं देख रहा है। यही कारण है कि ये देश कर्ज के संकट में फंस सकते हैं। 

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