कारोबारी साम्राज्य ढहता देख चीन के बदले सुर, कहा-भारत समेत दुनिया के लिए खुला है चीन का दरवाजा

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कारोबारी लड़ाई में अमेरिकी सख्ती के बाद चीन को आर्थिक नुकसान का अंदेशा होने लगा है। यही वजह है कि कभी दूसरे देशों के लिए अपने कारोबारी दरवाजों को बंद रखने वाले चीन के सुर बदलने लगे हैं। चीन विदेशी कंपनियों के अपने दरवाजे को खोलने के साथ खुलेआम यह कहने लगा है कि उन्हें आयात से कोई परहेज नहीं है। यही वजह है कि चीन ने अपने इंपोर्ट टैरिफ में कटौती करने का निर्णय लिया है।

Money Bhaskar

Nov 06,2018 04:12:00 PM IST

नई दिल्ली. कारोबारी लड़ाई में अमेरिकी सख्ती के बाद चीन को आर्थिक नुकसान का अंदेशा होने लगा है। यही वजह है कि कभी दूसरे देशों के लिए अपने कारोबारी दरवाजों को बंद रखने वाले चीन के सुर बदलने लगे हैं। चीन विदेशी कंपनियों के लिए अपने दरवाजे खोलने के साथ खुलेआम यह कहने लगा है कि उन्हें आयात से कोई परहेज नहीं है। यही वजह है कि चीन ने अपने इंपोर्ट टैरिफ में कटौती करने का निर्णय लिया है। चीनी राष्ट्रपति शी झिनपिंग ने शंघाई के चाइना इंटरनेशनल इंपोर्ट एक्सपो में 5 नवंबर को कहा कि चीन अब अपने दरवाजे विश्व के लिए बंद नहीं करेगा। इस काम के लिए उन्होंने चीनी अर्थव्यवस्था को ज्यादा उदार बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि चीन ओपन इकोनॉमी को बढ़ावा देगा। इससे कंज्यूमर में खर्च की क्षमता बढ़ेगी। साथ ही अर्थव्यवस्था को मजबूती भी मिल सकेगी।


15 सालों में 30 ट्रिलियन डॉलर का करेगा कारोबार

चीन का विश्व के सभी देशों के साथ व्यापार घाटा है। दरअसल चीन अन्य देशों को ज्यादा वस्तुएं निर्यात करता है, जबकि खुद हाई टैफिर बैरियर लगाकर बाहर के देशों से आयात कम करता है। इससे उसके साथ व्यापार करने वाले देशों को घाटा होता है। वैश्विक स्तर पर तमाम देशों ने चीन से टैरिफ कम करने की अपील की। लेकिन जब अमेरिका ने चीनी प्रोडक्ट पर टैरिफ बढ़ाया, तब चीन को व्यापार में घाटे की आशंका महसूस हुई। इसलिए चीन अब अपने देश में कम टैरिफ लगाने की बात कह रहा है। राष्ट्रपति शी ने दावा किया कि अगले 15 सालों में विश्व के अन्य देशों से चीन 30 ट्रिलियन डॉलर की वस्तुएं खरीदेगा। साथ ही 10 ट्रिलियन डॉलर की सर्विस अन्य देशों से हासिल करेगा। उन्होंने कहा कि उनका देश वैश्विकरण के प्रति ईमानदार है और पूरी क्षमता के साथ इसे आगे बढ़ाने का काम करेगा।


भारत को होगा फायदा

अमेरिका और चीन के बीच खराब कारोबारी रिश्तों का फायदा भारत को मिल सकता है। इसकी एक झलक चीन के चाइना इंटरनेशनल इंपोर्ट एक्सपो (CIIE) में दिखी, जहां भारत ने फार्मास्यूटिकल, आईटी, टूरिज्म और सर्विस सेक्टर की क्षमता का प्रदर्शन किया। बता दें कि भारत का चीन के साथ बड़ा व्यापार घाटा है। इसे दुरुस्त करने के लिए भारत प्रयास कर रहा है। ऐसे में वाणिज्य मंत्रालय के सचिव अनूप वधावन का चीन जाकर वहां भारत के पैवेलियन का उद्धाटन करना इस ओर साफ इशारा करता है।

आगे पढ़ें-चीन का अमेरिका का हमला

चीन का अमेरिका का हमला

चीनी राष्ट्रपति शी झिनपिंग ने अमेरिका का नाम लिए बगैर कहा कि ग्लोबल फ्री ट्रेड पर हमला किया जा रहा है। ऐसे में सभी देशों को साथ आकर इसका विरोध दर्ज कराना चाहिए। चीन ने अमेरिका को आइना दिखाते हुए कहा कि उनका देश 12 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी वाला देश है, जिसकी अर्थव्यवस्था का साइज एक समुद्र की तरह है, वो कोई तालाब नहीं है, जिसमें कोई भी हल्की हवा गंदा कर जाएं। 

 

आगे पढ़ें-क्षवि सुधारने की कोशिश

 

क्षवि सुधारने की कोशिश

शिनपिंग के मुताबिक वो विदेशों से चीन को आयात होने वाली वस्तुओं की राह को आसान बनाने पर काम करेंगे। शी ने इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट को खतरा पहुंचाने के आरोप में कहा कि चीन विदेशी कंपनियों के IRP अधिकारों की चुनौती देने वाले गैरकानूनी प्रयासों को रोकने और उन्हें दंडित करने का वादा किया। चीन इस एक्सपो की मदद से छवि को उदारवादी देश के तौर पर चमकाना चाहता है। इसके जरिए चीन दुनिया को संदेश देना चाहता है कि उनका 400 मिलियन मिड इनकम इकोनॉमी वाला देश केवल निर्यात में नहीं, बल्कि वस्तुओं के आयात में साझीदार रहेगा।

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