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अमेरिका-चीन की जंग में मोदी के लिए दिखा कमाई का मौका, ज्‍यादा माल बेचने के लिए चलना होगा दांव

अमेरिका-चीन ने एक-दूसरे के माल पर ड्यूटी बढ़ा दी है। भारत दोनों देशों में निर्यात बढ़ा सकता है....

know how india can take leverage of US-China trade war

नई दिल्‍ली। अमेरिका और चीन के बीच छिड़ी ट्रेड वार ने भारत के लिए कमाई के नए दरवाजे खोल दिए हैं। बाजार में कंपनियों के बीच गलाकाट प्रतिस्‍पर्धा रोकने के लिए गठित संस्‍था कॉम्पिटीशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) का मानना है कि भारत को इस ट्रेड वार को मौके के तौर पर भुनाना चाहिए। संस्‍था का मानना है कि एक-दूसरे के खिलाफ ऊंची इम्‍पोर्ट ड्यूटी लगाने के चलते दोनों देशों के प्रोडक्‍ट एक-दूसरे के यहां महंगे हो गए हैं। भारत कॉम्पिटेटिव प्राइज (कम कीमत) के चलते दोनों देशों के बाजार में अपना एक्‍सपोर्ट बढ़ा सकता है। इससे मोदी सरकार के लिए कमाई के नए मौके पैदा हो सकते हैं।  

भारत ऐसे उठा सकता है फायदा 

बिजनेस इनसाइडर की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने चीन से आने वाले सामान पर 25 फीसदी की एक्‍स्‍ट्रा इम्‍पोर्ट ड्यूटी लगा दी है। इसके चलते चीन के प्रोडक्‍ट अमेरिकी मार्केट में महंगे हो गए हैं। ऐसे स्थिति में भारत इसका फायदा उठा सकता है। भारत इस समय चीन को पम्‍प, पैसेंजर व्‍हीकल (1500 से 3000 सीसी), सेनेटरी नल के पार्ट, मिलिट्री एयरक्राफ्ट के पार्ट, वाल्‍व बॉडी और इलेक्‍ट्रोडाइग्‍नोस्टिक एपैरट्स के पार्ट प्रमुखता के साथ एक्‍स्‍पोर्ट करता है। अगर इन्‍हें जोड़ दिया जाए तो भारत ने 2017 में अमेरिका को करीब 5 करोड़ डॉलर (340 करोड़) का एक्‍सपोर्ट किया था। ट्रेड वार के बाद भारत को इन प्रोडक्‍ट के एक्‍स्‍पोर्ट पर और कोशिश करनी चाहिए। बता दें कि चीन भी इस इन प्रोडक्‍ट के एक्‍सपोर्ट में आगे रहा है। 

 

इन नए सेक्‍टर में एक्‍स्‍पोर्ट बढ़ाने पर हो फोकस 
सीसीआई की एनॉलिसिस के मुताबिक, भारत  को मशीनरी, इलेक्ट्रिक इक्विपमेंट, व्‍हीकल और ट्रांसपोर्ट पार्ट के एक्‍सपोर्ट को अमेरिका में बढ़ाने पर फोकस करना चाहिए। वियतनाम, इंडोनेशिया, थाईलैंड और मलेशिया जैसे देशों में पहले ही अमेरिका को अपना एक्‍सपोर्ट बढ़ा चुके हैं। यही नहीं अमेरिका के साथ स्‍ट्रैटेजिक डायलॉग  के दौरान भारत को टेक्‍सटाइल, फूटवियर, मोबाइल फोन, खिलौने और जेम्‍स के क्षेत्र में कॉम्पिटेटिव एडवांटेज लेने की कोशिश करनी चाहिए। ट्रेडवार के चलते भारत के लिए यहां मौके बन सकते हैं। भारत की ये कोशिशें संबंधित इंडस्‍ट्रीज के भारत में ग्रो करने में मदद करेंगी।  

 

चीन में भी एक्‍सपोर्ट बढ़ाने पर फोकस करे भारत 
सीसीई का मानना है कि भारत अमेरिका ही नहीं बल्कि चीन को किया जाने वाला अपना एक्‍सपोर्ट भी बढ़ा सकता है। संगठन के मुताबिक, चीन ने बहुत से अमेरिकी प्रोडक्‍ट्स पर भी ड्यूटी बढ़ाई है। भारत के लिए यहां भी संभावनाएं हैं। बता दें कि भारत चीन के साथ करोबार में घाटा झेल रहा है। अगर वह इस मौके को भुनाता है तो वह अपने कारोबारी घाटे को भी कम कर सकता है। 

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