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मोदी, कश्‍मीर और सेना अभी बहुत दूर, आते ही 'कैप्‍टन' इमरान को झेलने होंगे 6 बाउंसर

पाकिस्‍तान गहरे आर्थिक संकट में है। इमरान का पहला टेस्‍ट यहीं होगा..

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नई दिल्‍ली. इमरान खान ने पाकिस्तान के 22वें पीएम के रूप में शपथ ले ली है। उन्हें राष्ट्रपति ममनून हुसैन ने पद की शपथ दिलाई। हालांकि उनके लिए पाकिस्‍तान की सत्‍ता कांटों भरे ताज से कम नहीं होगी। यह देखना दिलचस्‍प होगा कि बिना किसी प्रशासनिक अनुभव के सीधा प्रधानमंत्री बनने जा रहे इमरान आतंकवाद, कश्‍मीर, घरेलू हिंसा, बलूचिस्‍तान, और घरेलू राजनैतिक आस्थिरता जैसे मुद्दों से कैसे पार पाते हैं। उनके सामने सेना और अदालत के बीच भी बैलेंस बनाकर चलने की चुनौती होगी। 

जानकारों का मानना है कि इन सबके लिए उनके पास कहीं न कहीं रोडमैप जरूर होगा। भले ही उनके पास प्रशासनिक अनुभव न हो, लेकिन लंबे राजनीतिक तजुर्बे के चलते इन राजनीतिक सवालों का उनके पास जवाब जरूर होगा। हालांकि एक मुसीबत ऐसी जरूर है, जो पाकिस्‍तान के सबसे सफल क्रिकेट कप्‍तान को गुगली की तरह चकमा जरूर दे सकती है। वह है पाकिस्‍तानी इकोनॉमी की खस्‍ताहालत। गौर करने वाली बात यह है कि पाकिस्‍तान जिन आर्थिक चुनौतियों से गुजर रहा है, आते ही इमरान का सबसे पहले उन्‍हीं से सामना होगा। बाकी राजनैतिक मसलों की बारी तो बाद में आएगी।  

 

 

पर कैसे जूझेंगे इकोनॉमी की बाउंसर से 
इमरान ऐसे समय में सत्‍ता संभालने जा रहे हैं, जब पाकिस्‍तान अपने इतिहास की सबसे गंभीर आर्थिक चुनौतियों से घिरा है। पाकिस्‍तान का विदेशी मुद्रा भंडार कभी भी खत्‍म हो सकता है। पाकिस्‍तानी रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड गिरावट पर है। उसकी वैल्‍यू भारतीय रुपए के मुकाबले भी आधी रह गई है। चीन के साथ चल रहे सीपीईसी (चाइना पाकिस्‍तान इकोनॉमिक कॉरिडोर) प्रोजेक्‍ट का खर्च बढ़ रहा है। देश का कर्ज लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में उनके लिए सबकुछ किसी बाउंसर से कम नहीं होगा। अहम बात यह है कि उन्‍हें आते ही इन आर्थिक चुनौतियों से जूझना होगा। 

 

आगे पढ़े- पहले बाउंसर के बारे में... 

 

 

 

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बाउंसर नंबर-1: भुगतान संकट


पाकिस्‍तान की इकोनॉमी इस समय बैलेंस ऑफ पेमेंट के संकट से जूझ रही है। पाकिस्‍तान के विदेशी मुद्रा भंडार में इतना पैसा नहीं बचा है कि वह आने वाले दिनों में अपना इम्‍पोर्ट जारी रख सके। अप्रैल में आई मीडिया रिपोर्ट में कहा गया कि पाकिस्‍तान का विदेशी मुद्रा भंडार मौजूदा समय में 10.8 बिलियन डॉलर के लेवल पर आ गया है। जो इस साल अगस्‍त तक खत्‍म हो जाएगा। ऐसे में इमरान को आते ही इस बारे में बड़ा फैसला लेना होगा। इस बीच पाकिस्‍तान का इम्‍पोर्ट भी तेजी के साथ बढ़ा है। ऐसे में इमरान या फिर चीन से ऊंची दर पर और कर्ज लेंगे, नहीं तो 10वीं बार आईएमएफ से कर्ज की गुजाह लगाएंगें। 

 

आगे पढ़े- दूसरे बाउंसर के बारे में... 

 

 

बाउंसर नंबर-2: गिरता पाकिस्तानी रुपया  

 

देश की गिरती आर्थिक सेहत के चलते पाकिस्‍तानी रुपया भी नहीं बच पाया है। इसके चलते अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एक पाकिस्‍तानी रुपए की कीमत 129 के  लेवल पर पहुंच गई है। बीबीसी हिंदी की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्‍तानी रुपया भारत की अठन्‍नी के बराबर हो गया।  बैलेंस ऑफ पेमेंट क्राइसिस से निपटने के लिए पाकिस्‍तानी सेंट्रल बैंक अपने रुपए का खुद भी अवमूल्‍यन कर चुका है। इससे फायदा यह होता है कि देश को विदेशी एक्‍सपोर्ट पर पहले से ज्‍यादा विदेशी करंसी हासिल होती है। पर लगातार करंसी कमजोर होने से इकोनॉमी दिवालिया होने की कगार पर पहुंच सकती है। साथ ही इन्‍वेस्‍टर्स का सेंटीमेंट भी बिगड़ सकता है।  

 

आगे पढ़े- तीसरे बाउंसर के बारे में... 

 

 

बाउंसर नंबर-3: कर्ज 


हाल के दिनों में पाकिस्‍तान का कर्ज तेजी के साथ बढ़ रहा है।  आर्थिक संकट के चलते पाकिस्‍तान चीन से एक साल के भीतर 5 अरब डॉलर का कर्ज ले चुका है। देश में चल रही पेमेंट क्राइसिस के चलते वह करीब 2 अरब डॉलर का कर्ज चीन से तथा आईएमएफ  के साथ फिर से कर्ज लेने पर विचार कर रहा है। 2017 में पाकिस्‍तान का कुल कर्ज उसकी जीडीपी का करीब 67 गुना हो चुका था। इकोनॉमी में रिकवरी की उम्‍मीद नहीं होने के चलते माना जा रहा है कि इसके सामने संकट खड़ा हो सकता है। एक समय पर रीपेंमेंट नहीं कर पाया तो डिफाल्‍टर भी हो सकता है। 

 

आगे पढ़े- चौथे बाउंसर के बारे में... 

 

 

बाउंसर नंबर-4: बढ़ता करोबारी घाटा 


जुलाई से अक्‍टूबर के 4 महीनों की बात करें तो ट्रेड डेफिसिट 23 फीसदी बढ़ा है। पिछले साल यह जहां 15.65 अरब डॉलर था, वहीं अब बढ़कर 19.18 अरब डॉलर हो गया है। पाकिस्‍तानी अखबार डॉन में छपी खबर के मुताबिक, चीन पाकिस्‍तान इकोनॉमिक कॉरिडोर के चलते पाकिस्‍तान को बड़े पैमाने पर मशीनरी का इम्‍पोर्ट करना पड़ा है। इस साल के अप्रैल के आंकड़ों के मुताबिक, देश का इम्‍पोर्ट बढ़ने में 38 फीसदी हिस्‍सा सिर्फ इसी परियोजना की मशीनरी के लिए मंगाया गया। 2017 में पाकिस्‍तान का ट्रेड घाटा करीब 36 अरब डॉलर रहा, वहीं 2016 में यह 26 अरब डॉलर था। अगर हालात नहीं संभले तो पाकिस्‍तानी रुपया और टूट सकता है। 
 
आगे पढ़े- पांचवे बाउंसर के बारे में... 

 

बाउंसर नंबर-5: रूकी अमेरिकी मदद

अमेरिका में ट्रम्‍प के सत्‍ता में आने के बाद पाकिस्‍तान को मिलने वाली आर्थिक मदद लगातार कमजोर हुई है। आतंकवाद के खिलाफ पर्याप्‍त कदम नहीं उठाने का आरोप लगाते हुए अमेरिका ने बड़े पैमाने पर पाकिस्‍तान की मदद रोक दी है। इससे पहले पाकिस्‍तान को आतंकवाद के खिलाफ जंग के लिए अमेरिका को ओर से 33 अरब डॉलर की मदद महैया कराई चा चुकी है। अमेरिका के इस कदम से पाकिस्‍तान को सीधे 1.6 अरब डॉलर सालाना का नुकसान हो रहा है। इमरान अगर इकोनॉमी को बचाना चाहते हैं तो इन्‍हें इनकम के नए रास्‍ते तलाशने होंगे। 

 

आगे पढ़े- छठें बाउंसर के बारे में... 

 

 

बाउंसर नंबर-6: सीपीईसी 


पाकिस्‍तानी अधिकारी मान रहे हैं कि चीन पाक कॉरिडोर परियोजना यानी सीपीईसी उनके लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है। हालांकि जिस तरह से हाल में पाकिस्‍तानी सरकार की ओर से चीनी कंपनियों को की गई पेमेंट का चेक बाउंस हुआ है। उसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इस परियोजना का इमरान खुद विरोध करते रहे हैं। हालांकि पीएम बनने के बाद हालात दूसरे होंगे। चीन यहां अब तक लंबा निवेश कर चुका है। जबकि बलूचिस्‍तान में अस्थिरता इस परियोजना के परवान चढ़ने पर सवाल पैदा कर रही है। इसके चलते पाकिस्‍तान का कर्ज औ कारोबार दोनों काबू से बाहर जा रहे हैं। ऐसे में या तो वह अपनी संप्रभुता गिरवी रखकर चीन के करम पर जिंदा रहे या फिर इस परियोजना से अपना पल्‍ला झाड़े। यह सवाल इमरान को जरूर परेशान करेगा। 

 

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