बिज़नेस न्यूज़ » Economy » Internationalईरान पर बैन लगाकर दुनिया को अपना पेट्रोल बेचने की फिराक में अमेरिका, भारत भी आएंगे ट्रम्‍प के 'दूत'

ईरान पर बैन लगाकर दुनिया को अपना पेट्रोल बेचने की फिराक में अमेरिका, भारत भी आएंगे ट्रम्‍प के 'दूत'

कभी दुनिया में सबसे ज्‍यादा क्रूड खरीदने वाला अमेरिका अब दुनिया का बड़ा क्रूड एक्‍सपोर्टर बन चुका है....

India oil import from US on record high, Iran sinks ahead of sanctions

नई दिल्‍ली। अमेरिका की ओर से ईरान पर फिर से लगाए गए प्रतिबंधों का असर भारत में भी दिखना शुरू हो गया है। ईरान की ओर से भारत को किया जाने  वाला क्रूड एक्‍सपोर्ट अब अपनी गिरावट पर है। समाचार एजेंसी रायटर्स की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अकेले जून में ही मई के मुकाबले भारत ने ईरान से 16 फीसदी कम क्रूड इम्‍पोर्ट किया। 

 

बता दें कि मई में ही ट्रम्‍प प्रशासन ने अपने वादे का पालन नहीं करने का आरोप लगाते हुए ईरान के साथ 2015 में हुई परमाणु डील तोड़ दी थी। इसके बाद माना जा रहा था कि ईरान का क्रूड इम्‍पोर्ट तेजी के साथ गिरेगा। इस मामले जो सबसे बड़ा डेवलपमेंट देखने को मिला है, वो यह है कि ईरान पर प्रतिबंध लगाने का सबसे ज्‍यादा फायदा भी अमेरिका को हो रहा है। सीधी भाषा में कहें तो इस प्रतिबंध से अमेरिका खुद अपनी झेाली भर रहा है। कभी दुनिया में सबसे ज्‍यादा क्रूड खरीदने वाला अमेरिका अब दुनिया का बड़ा क्रूड एक्‍सपोर्ट हो चुका है। अप्रैल तक वह रोजाना 17.6 लाख बैरल क्रूड दुनिया के अलग अलग देशों को बेच रहा था। 

 

 

रिकॉर्ड लेवल पर पहुंचा भारत को होने वाले क्रूड एक्‍सपोर्ट

ताजा आंकड़ों की मानें तो अमेरिका बड़े पैमाने पर अब भारत को अपना क्रूड बेच रहा था। इसके चलते भारत को किया जाने वाला उसका क्रूड एक्‍सपोर्ट जून में अपनी ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच गया। माना जा रहा है कि जुलाई तक अमेरिका भारत को करीब 1.5 करोड़ बैरल क्रूड एक्‍सपोर्ट कर लेगा। यह 2017 के उनकी ओर से किए गए कुल 80 लाख बैरल क्रूड एक्‍सपोर्ट से दोगुने से भी अधिक है।  

 

भारत आएंगे ट्रम्‍प के अधिकारी 

ट्रम्‍प प्रशासन भारत में अपने अधिकारी भेजने की योजना बना रहा है। ये अधिकारी भारत में ईरानी प्रतिबंध के साथ ऑयल से जुड़े मसले पर बातचीत करेंगे। अमेरिका विदेश विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वो ईरान से तेल खरीदने वाले सभी देशों के साथ मिलकर इस साल 4 नवंबर तक ईरानी क्रूड एक्‍सपोर्ट को जीरो करना चाहते हैं। हालांकि जिस तरह से अमेरिका ने अपना फोकस क्रूड एक्‍सपोर्ट पर बढ़ाया है, उससे साफ है कि वह ईरानी पर प्रतिबंध लगाकार अपने एक्‍सपोर्ट को और बढ़ाना चाहता है। 

 

 

टॉप क्रूड ऑयल प्रोड्यूसर बनने की राह में अमेरिका  

रूस और सऊदी अरब के साथ अमेरिका अब दुनिया का टॉप क्रूड प्रोड्यूसर बनने की राह में अग्रसर है। जाता अंकड़ों के मुताबिक, हाल में अमेरिका ने जिस तेजी के साथ प्रोडक्‍शन में तेजी दिखाई है, उसके चलते अगले साल तक उसका रोजना क्रूड आउटपुट 1.18 करोड़ प्रति बैरल के लेवल पर जा सकता है। इस साल जून तक वह रोजना 1 करोड़ 9 लाख बैरल क्रूड  ऑयल का प्रोडक्‍शन कर रहा था। अगर ऐसा होता है तो वह 1970 के दशक के बाद एक बार फिर से दुनिया का टॉप क्रूड प्रोड्यूसर बन सकता है। 1960 के दौर तक अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा क्रूड एक्‍सपोर्टर हुआ करता था। 1974 में सोवियत संघ और 1976 में सऊदी अरब दुनिया का सबसे बड़ा क्रूड उत्‍पादन बनता चला गया। बाद के दशकों में अमेरिका लगाकर प्रोडक्‍शन में कटौती करता चला गया।  21वीं सदी के शुरुआती दशक में वह दुनिया का सबसे बड़ा क्रूड इम्‍पोर्टर बन चुका था।  

 

अमेरिका के लिए मौका बन रहा है   
मौजूदा समय में भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा क्रूड इम्‍पोर्टर है। क्रूड की रिफाइनिंग कैपेसिटी की बात करें तो दुनिया में उसका नंबर चौथा है। प्रतिबंधों के चलते उसने अपनी रिफाइनरी से कहा है कि वो ईरान से इम्‍पोर्ट में कमी लाएं। कार्गो पर नजर रखने वाली फर्म कैप्‍लर के रीन एलएन्‍सन के मुताबिक, ईरान पर प्रतिबंध लगाने के बाद अमेरिकी क्रूड उत्‍पादकों के पास भारतीय मार्केट में अपनी रीच बढ़ाने का मौका है। भारत में डिमांड अभी काफी मजबूत है। हाल में रिलायंस समेत कई प्राइवेट रिफाइनरीज ने अमेरिका से सीधा क्रूड इम्‍पोर्ट किया है।  

 

 

 

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