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क्‍या चीन के चलते पाकिस्‍तान पर आया संकट, ये 3 बातें तो यही इशारा करती हैं

पाकिस्‍तान में आए बैलेंस ऑफ पमेंट संकट के लिए बहुत से लोग चीन को कसूरवार मान रह हैं, इसके पीछे उनके अपने तर्क हैं...

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नई दिल्‍ली. पाकिस्‍तान जबरदस्‍त आर्थिक संकट में है। उनके पास मात्र 10 हफ्तों के लिए विदेशी मुद्रा भंडार बचा है। इकोनॉमी के जानकारों के मुताबिक, पाकिस्‍तान ने अगर समय रहते कदम नहीं उठाया तो वह दिवालिया हो सकता है। दरअसल पाकिस्‍तान को हर महीने  वर्ल्‍ड बैंक और आईएमएफ जैसी ग्‍लोबल फाइनेंशियल एजेंसियों को रीपेमेंट करनी होती है। अगर विदेशी मुद्रा के चलते वह रीपेमेंट करने में नाकाम रहा तो डिफॉल्‍टर कहलाएगा। 

पाकिस्‍तान में इकोनॉमी और पॉलिटिक्‍स से जुड़ा एक तबका यह मान रहा है कि सरकार की गलत आर्थिक नीतियों के चलते देश की यह हालत हुई है। एक तबका ऐसा भी है जो चीन को इन सारी चीजों का कसूरवार बता रहा है। पर क्‍या संभव है कि एक देश किसी दूसरे देश की बर्बादी के लिए जम्‍मेदार हो। खासकर तब जब दोनों के बीच न कोई दुश्‍मनी हो और न ही किसी तरह की कोई होड़ हो। मौजूदा दौर में चीन पाकिस्‍तान का सबसे बड़ा हमदर्द है। ऐसे में कैसे वह पाकिस्‍तान की मुसीबत का कारण हो सकता है। 

 

अंतराष्‍ट्रीय मामलों के जानकार और दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय में असिस्‍टेंट प्रोफेसर प्रशांत त्रिवेदी के मुताबिक, इस दावे में एक हद तक सच्‍चाई है। प्रशांत के मुताबिक, अनजाने में ही सही, लेकिन चीन कहीं न कहीं पाकिस्‍तान की इस हालत के लिए जिम्‍मेदार है। आइए जानते हैं ऐसे 3 कारणों के बारे में, जिनके चलते पाकिस्‍तान के लिए उसका सबसे बड़ा हमदर्द चीन ही मुसीबत बन गया.. 


1- चीन से डिप्‍लोमेटिक रिलेशन   
आतंकवाद पर अमेरिका के सख्‍त रुख के बाद पाकिस्‍तान धीरे-धीरे चीन के नजदीक होता चला गया। प्रशांत के मुताबिक, पाकिस्‍तान ने चीन से नजदीकी को अमेरिका की कीमत पर स्‍वीकार किया। वास्‍तव में यह उसकी महाभूल थी। चीन से नजदीकी दिखाने के लिए वह अमेरिका समर्थित आईएमएफ और वर्ल्‍ड बैंक जैसी ग्‍लोबल फाइनेंशियल संस्‍थाओं के सहयोग से भी दूर होता चला गया। यूरोपीय देशों ने भी उससे दूरी बना ली। अमेरिका ने पाकिस्‍तान को मिलने वाली 16 सौ करोड़ रुपए से ज़्यादा की मदद पर न सिर्फ रोक लगा दी, बल्कि कोई भी ग्‍लोबल इंस्‍टीट्यूट पाकिस्‍तान को फाइनेंशियल सपोर्ट देने को तैयार नहीं है। चीन पाकिस्‍तान को अपने बैंकों और कंपनियों के जरिए कर्ज तो दिला रहा है, लेकिन इसकी दर 14 से 18 फीसदी है। वर्ल्‍ड बैंक और आईएफएफ 1 या 2 फीसदी की दर पर कर्ज देते हैं। 

 

 

2-चीन के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट

पाकिस्‍तान के प्रमुख अखबार डॉन के मुताबिक, पाकिस्‍तान ने चीन के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट किया। यह एक तरीके से पाकिस्‍तान के लिए संकट  साबित हुआ है। प्रशांत भी इस बात से इत्‍तेफाक रखते हैं। उनके मुताबिक, फ्री ड्रेड एग्रीमेंट के बाद पाकिस्‍तान में चीनी आइटम्‍स की बाढ़ आ गई। इस एग्रीमेंट के चलते चीन से होने वाला आयात बढ़ता गया। इसके दो असर हुए, एक तरफ तो पाकिस्‍तान का निर्यात कमजोर हो गया। जो डॉलर वह अपना सामान बेचकर कमा रहा था, उसमें कमी आ गई। दूसरा इम्‍पोर्ट के लिए रहा सहा डॉलर भी जाता रहा। मौजूदा समय में पाकिस्‍तान पर 33 अरब डॉलर का कारोबारी घाटा है। इसमें सबसे बड़ा हिस्‍सा चीन का है। आंकड़ों के मुताबिक, 2013-14 में पाकिस्‍तान चीन को 2.69 बिलियन डॉलर का एक्‍सपोर्ट करता था, 2016-17 में यह घटकर 1.62 अरब डॉलर हो गया। वहींं चीन से होनेे वाला उसका इम्‍पोर्ट 2012-13 के 4.73 अरब डॉलर से बढ़कर 2016-17 में 10.53 बिलियन डॉलर हो गया। 


 

3-चीन- पाकिस्‍तान कॉरिडोर 
प्रशांत के मुताबिक, चीन-पाकिस्‍तान कॉरिडोर यानी सीपीईसी प्रोजेक्‍ट पाकिस्‍तान के लिए नासूर साबित होता जा रहा है। पाकिस्‍तान ने इस परियोजना से जुड़े कामों के लिए 5 अरब डॉलर का कर्ज चीन से लिया है। इससे जुड़ी जो भी मशीनरी पाकिस्‍तान आ रही है, वह भी चीन से ही आ रही है। प्रशांत सवाल उठाते हुए कहते हैं कि चीन से ही कर्ज लेकर चीन का सामान लेना आखिर कहां की बुद्धिमानी है। पाकिस्‍तानी मीडिया सीपीईसी को पाकिस्‍तानी आर्थिक तंगी का सबसे बड़ा कारण मान रहा है। डॉन के मुताबिक, इस परियोजना से जुड़ी मशीनरी खरीदने के पाकिस्‍तान को अपना विदेशी मुद्रा भंडार दांव पर लगाना पड़ा है। अब नई मुसीबत सामने है। 

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