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मेक इन इंडिया /अमेरिकन कंपनियों का चीन से मोहभंग, भारत से मोहब्बत

  • चीन को पटखनी देने के लिए अमेरिका ने बनाई नई रणनीति
  • भारत में मोदी सरकार की मेक इन इंडिया को मिलेगा फायदा 

money bhaskar

Apr 27,2019 03:48:00 PM IST

नई दिल्ली. अमेरिकन कंपनियों का चीन से मोहभंग होने लगा है। दिलचस्प बात यह है कि अब उनकी पसंद भारत है। लोकसभा चुनाव के बाद 200 अमेरिकन कंपनियां चीन से बोरिया बिस्तर समेटकर भारत शिफ्ट हो सकती हैं। अमेरिकी बेस्ड एक एडवोकेसी ग्रुप ने यहां तक कहा है कि कम्युनिस्ट दिग्गज से निपटने के लिए यह एक अच्छा मौका है कि हम भारत में अपनी मैन्युफैक्चिरिंग यूनिट स्थापित करें।

कंपनियां खुद ही शिफ्टिंग की इच्छुक

यूएस-इंडिया स्ट्रेटेजिक एंड पार्टनरशिप फोरम (यूएसआईएसपीएफ) के अध्यक्ष मुकेश अघी ने पीटीआई को कहा कि कई अमेरिकन कंपनियां भारत में निवेश करके चीन का विकल्प स्थापित करने के उपाय पूछ रही हैं। वजह है भारत में जारी आर्थिक सुधार, बढ़ती पारदर्शिता और कानूनी जटिलताओं को कम हो जाना। इससे अमेरिकन कंपनियां की रुचि भारत में बढ़ गई है। यही नहीं, नई सरकार के गठन के बाद कंपनियां तेजी से भारत में शिफ्ट होंगी। हालांकि यूएसआईएसपीएफ सुधारों में तेजी लाने और निर्णय लेने की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने की सिफारिश अहम होगी। अघी के मुताबिक पिछले 12 से 18 महीनों में वे हम देख रहे हैं कि अमेरिकी कंपनियां ई-कॉमर्स या डेटा के स्टोरेज आदि पर अहम फैसले रही हैं। यह उनका भारत की तरफ बढ़ता कदम है।

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अमेरिका- भारत मिलकर चीन को दे सकते हैं मात


भारत भी चीन से आने वाले सस्ते सामान से परेशान है। यदि भारत में ही बड़ें पैमाने पर यूनिट खुलेंगी और यहीं पर सामान सस्ता बनने लगेगा तो चीन से आयात अपने आप कम हो जाएगा। इसके लिए भारत और अमेरिका के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के बारे में सोचना चाहिए। एफटीए से भारत और अमेरिका की एक दूसरे के बाजारों पर सीधी पहुंच बन जाएगी। अमेरिका के जनरलाइज सिस्टम ऑफ प्रीफ्रेंस (GSP) का मुद्दा भी सुलझ जाएगा।

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मैन्यूफैक्चरिंग हब की कोशिश

अघी ने बताया कि सिस्को में वरिष्ठ उपाध्यक्ष जॉन केर्न के नेतृत्व में सदस्य कंपनियों के भीतर एक उच्च-स्तरीय विनिर्माण परिषद का गठन किया है। परिषद ऐसा दस्तावेज बना रही है जिससे भारत को विनिर्माण हब में बदलने में मदद मिलें। इसके लिए चुनाव तक की डेडलाइन रखी गई है।

चार साल में 50 बिलियन डालर का निवेश

इतनी सारी कंपनियों के भारत शिफ्ट होने के दावे पर कई सवाल भी हैं। इतना निवेश कैसे आएगी और चीन का नुकसान भारत कैसे पूरा कर पाएगा। इस पर यूएसआईएसपीएफ का कहना है कि पिछले चार साल में उनकी सदस्य कंपनियों ने 50 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का निवेश किया है। यही नहीं भारत एक बड़ा बाजार है। यहां निवेश करके माल भी खपाया जा सकता है। भारत में सामान बनने से उसकी लागत कम होगी और भारतीय लोगों के लिए अफोर्डेबल होगी।

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