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सुविधा / वंदे भारत का नया संस्करण स्लीपर कोच वाला, राजधानी के मुकाबले तीन घंटे की बचत होगी

ट्रेन 19 में यात्री खुद ही अपने आसपास का तापमान नियंत्रित कर सकेंगे

The new version of Vande Bharat will be a sleeper coach, saving three hours against the capital

नई दिल्ली. शताब्दी और राजधानी के बाद भारत की सबसे सफल ट्रेन साबित हो रही वंदे भारत का नया संस्करण टी-19 इसी साल लांच होगा।  इंजन रहित टी-19 देश की पहली ऐसी ट्रेन होगी जिसमें कोच के यात्री अपने आस-पास के एयर कंडीशन का तापमान खुद नियंत्रित (कम अथवा ज्यादा) कर सकेंगे। कोच में लगे सेंसर की मदद यह संभव होगा। यही नहीं, राजधानी की तुलना में इसकी गति भी ज्यादा होगी। इसी वजह से 1200 किमी के सफर में यह तीन घंटे की बचत करेगी। 

 

अभी तकनीशियन पूरे कोच का तापमान कंट्रोल करता है

 

वर्तमान में रेलवे की किसी भी प्रीयिम ट्रेन में एयर कंडीशन का तापमान कोच के बाहर से तकनीशियन कंट्रोल करता है। इसमें पूरे कोच का तापमान कम अथवा ज्यादा होता है। वंदे भारत की तर्ज पर विश्व स्तरीय संरक्षा-सुरक्षा वाली टी-19 में स्लीपर कोच (शयन-यान) होंगे। भविष्य में टी-19 राजधानी ट्रेनों का स्थान लेगी। ट्रेन की अधिकतम रफ्तार 160 किलोमीटर प्रतिघंटा होगी। स्लीपर कोच वाली इस ट्रेन को पहले 2020 में चलाने के कारण ट्रेन का नाम टी-20 रखा गया था। लेकिन रेलवे बोर्ड ने इसका नाम बदलकर टी-19 कर दिया है। 

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इंजन की बजाय हर कोच में जनरेटर लगेंगे

 

ट्रेन-19 में अभी 22 से 24 कोच होंगे। दिल्ली-वाराणसी के बीच चल रही वंदे भारत एक्सप्रेस (सिटिंग) की तरह टी-19 इंजन राहित रहेगा। ट्रेन में आगे इंजन लगाने के बजाए इसके सभी कोच में जनरेटर लगे होंगे। इसमें इलेक्ट्रोमैकैनिकल तकनीक कहा जाता है। इस तकनीक की विशेषता से ट्रेन त्वरित रफ्तर पकड़ती (पिकअप) है और तेजी से ब्रेक लगते हैं। 1200 किलोमीटर की दूरी तय करने में राजधानी एक्सप्रेस की अपेक्षा टी-19 से चलने में तीन घंटे से अधिक की बचत होगी।

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यूरोपियन तकनीक का इस्तेमाल 

 

रेलवे सूत्रों ने बताया कि इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ), चैन्नई में ट्रेन-19 (टी-19) के निर्माण के लिए कल-पुर्जो की खरीद फरोख्त अप्रैल माह से शुरू हो गई है। पहले टी-19 को एल्मुनियम बॉडी में बनाने की योजना थी। लेकिन टेंडर प्रक्रिया में देरी के कारण अब इसे स्टेनलेस स्टील बॉडी में ही बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। रेलवे इंजीनियरों की ओर से यूरोपियन तकनीक के अनुरूप बनाई जा रही टी-19 दूसरी ट्रेन है।
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स्वदेशी है पर विश्वस्तरीय है सुविधाओं से लैस 

 

मेक इन इंडिया यानी स्वदेश में बनाई जा रही ट्रेन-19 यात्री संरक्षा और सुविधा के मामले में विश्व स्तरीय होगी। ट्रेन के दरवाजे प्लेटफार्म पर रुकने के बाद ही ऑटोमैटिक खुलेंगे। कोच की सीढ़ियां ऑटोमैटिक (स्लाइडिंग स्टेप) आगे आकर प्लेटफार्म से सट जाएंगी। जिससे प्लेटफार्म और कोच के बीच का गैप पूरी तरह से समाप्त हो जाएगा।  यात्रियों के पटरी पर गिरने का खतरा नहीं होगा। कोच के भीतर प्लेन की तर्ज पर लंबी एलईडी लाइट ट्यूब लगी होंगी। मेट्रो की तर्ज पर टी-19 में दो कोच के बीच गैप नहीं होगा। वाईफाई से मोबाइल, लैपटॉप, आईपॉड में रेलवे एप डाउनलोड करने की सुविधा होगी। रेलवे जानकारी, टिकट बुकिंग, टैक्सी बुकिंग, होटल बुकिंग आदि की सुविधा होगी।

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