Metro /केजरीवाल सरकार के 'फ्री यात्रा' के प्रस्ताव के विरोध में आगे आए मेट्रोमैन, PM मोदी को लिखा लेटर

  • श्रीधरन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस प्रस्ताव पर रजामंदी नहीं देने की मांग करते हुए कहा कि इससे ‘गलत परंपरा’ कायम होगी

Moneybhaskar.com

Jun 14,2019 06:55:00 PM IST

नई दिल्ली. दिल्ली मेट्रो (DMRC) के पूर्व चीफ ई श्रीधरन (E Sreedharan) ने दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार के महिलाओं के लिए मेट्रो का सफर फ्री करने के प्रस्ताव पर सवाल खड़े किए हैं। श्रीधरन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस प्रस्ताव पर रजामंदी नहीं देने की मांग करते हुए कहा कि इससे ‘गलत परंपरा’ कायम होगी।

पीएम मोदी से दखल देने की मांग

‘मेट्रो मैन’ के नाम से चर्चित श्रीधरन ने प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में लिखा कि यदि सरकार महिलाओं को मदद करने के लिए इतनी ही उत्सुक है तो वह मेट्रो में सफर मुफ्त करने के बजाय उनको यात्रा खर्च का सीधा भुगतान कर सकती है। डीएमआरसी के पूर्व चीफ ने पीएम मोदी से इस मसले में दखल देने की भी मांग की।

तत्कालीन पीएम वाजपेयी ने भी खरीदा था टिकट

श्रीधरन ने कहा कि जब 2002 में दिल्ली मेट्रो का पहला सेक्शन शुरू किया गया था तो उन्होंने सख्त रुख अपनाते हुए यात्रा में किसी भी रियायत नहीं देने का फैसला किया था। उन्होंने कहा कि उस दौर में मेट्रो के शुभारंभ के समय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी यात्रा के लिए टिकट खरीदा था। उन्होंने कहा, ‘मैं आपसे दिल्ली सरकार के मेट्रो में महिलाओं को मुफ्त सफर के प्रस्ताव पर रजामंदी नहीं देने का अनुरोध करता हूं।’

महिलाओं को यात्रा खर्च का सीधा भुगतान करे दिल्ली सरकार

श्रीधरन ने अपने लेटर में कहा, ‘यदि दिल्ली महिला यात्रियों को मदद करने के लिए इतनी उत्सुक है तो मैं दिल्ली सरकार को सुझाव दूंगा कि मेट्रो में यात्रा मुफ्त करने के बजाय खर्च का भुगतान सीधे भी किया जा सकता है।’
इस महीने की शुरुआत में अरविंद केजरीवाल की अगुआई वाली सरकार ने ऐलान किया था कि सरकारी बसों और मेट्रो ट्रेन में सफर महिलाओं के लिए मुफ्त कर दिया जाएगा।

दूसरे मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए बनेगी गलत नजीर

डीएमआरसी के पूर्व प्रबंध निदेशक ने कहा, ‘अब, यदि महिलाओं को दिल्ली मेट्रो में मुफ्त यात्रा की छूट दी जाती है तो देश के अन्य मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए गलत परंपरा कायम हो जाएगी। दिल्ली सरकार की डीएमआरसी को होने वाले रेवेन्यू लॉस का आश्वासन संतोषजनक नहीं है।’

अकेले दिल्ली सरकार नहीं ले सकती फैसला

डीएमआरसी केंद्र और दिल्ली सरकार का एक संयुक्त उपक्रम है और कोई एक स्टेकहोल्डर अकेले किसी तबके को रियायत देने का फैसला नहीं ले सकता है। ऐसे में दिल्ली मेट्रो एक अक्षम उपक्रम और दिवालियापन की स्थिति में पहुंच सकता है।
यहां तक कि दिल्ली मेट्रो के प्रबंध निदेशक के साथ ही अधिकारियों और स्टाफ को भी मेट्रो में अपनी आधिकारिक ड्यूटी पर जाने के लिए टिकट खरीदनी पड़ती है।

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