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8 महीने में मिले 5000 खतरे, नाराज रेलवे बोर्ड चेयरमैन ने लिखा सख्त लेटर

रेल मिनिस्‍टर और रेलवे बोर्ड के चेयरमैन को बदलने के बाद भी हालात नहीं सुधरे हैं।

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नई दिल्‍ली। ट्रेन एक्‍सीडेंट्स पर अंकुश लगाने के लिए रेल मिनिस्‍टर और रेलवे बोर्ड के चेयरमैन को बदलने के बाद भी हालात नहीं सुधरे हैं। रेलवे कर्मचारियों और अधिकारियों का रवैया नहीं बदल रहा है। यही वजह है कि ट्रेन एक्‍सीडेंट का सिलसिला जारी है। पिछले 8 महीने में 5000 से अधिक प्‍वाइंट्स अनसेफ पाए गए, लेकिन कर्मचारियों और अधिकारियों की लापरवाही का आलम देखिए कि इनमें से 70 फीसदी प्‍वाइंट्स पर करेक्टिव एक्‍शन लिया गया। इससे नाराज रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्विनी लोहानी ने सभी जीएम और डीआरएम को सख्‍त पत्र लेकर कहा है कि वे खुद मॉनिटरिंग करें और रेलवे में अनसेफ प्रेक्टिस को रोकें। 

 

चेयरमैन ने क्‍या कहा 

रेलवे बोर्ड के चेयरमैन (सीआरबी) अश्विनी लोहानी ने सभी जीएम और डीआरएम को लिखे पत्र ( पत्र की कॉपी moneybhaskar के पास है) में कहा गया है कि मार्च 2017 को रेलवे में वेब बेस्‍ड सेफ्टी इंस्‍पेक्‍शन मैनेजमेंट मॉड्यूल (एसआईएमएम) शुरू किया गया था। जिसमें रेलवे के सभी सेफ्टी ऑफिसर द्वारा अपनी इंस्‍पेक्‍शन रिपोर्ट अपलोड करते हैं। इस सिस्‍टम के मुताबिक मार्च से लेकर अक्‍टूबर 2017 तक 5070 प्‍वाइंट्स पर डिफिशिएंसी पाई गई, लेकिन इनमें  से केवल 70 फीसदी डिफिशिएंसी को दूर करने का प्रयास किया गया। लोहानी ने इसे सीरियस मानते हुए कहा है कि कंप्‍लायंस परसनटेज संतोष जनक नहीं है। 
 

 

3 माह से अधिक है पेंडिंग 

पत्र में कहा गया है कि कई जोन में अनसेफ प्‍वाइंट्स को सही करने का रेश्‍यो बहुत ही ढीला है। लगभग 5 फीसदी प्‍वाइंट्स ऐसे हैं, जो अनसेफ पाए गए, लेकिन तीन माह का समय बीतने के बाद भी उन्‍हें ठीक नहीं किया गया है। लोहानी ने जीएम और डीआरएम से कहा है कि वे रेलवे में अनसेफ प्रेक्टिस को रोकने के लिए अपना व्‍यक्ति इन्‍वॉलवमेंट बढ़ाएं, ताकि सेफ्टी कल्‍चर बढ़े और यात्रियों को सेफ एवं विश्‍वसनीय सर्विसेज प्रदान की जा सके। 
 

इन जोन में है बुरा हाल 

सीआरबी ने अपने लेटर में जोन वाइज सेफ्टी डाटा भी शेयर किया है। इसके मुताबिक - 
जोन  अनसेफ प्‍वांट्स  कम्‍प्‍लायंस % में 
ईस्‍ट कोस्‍ट रेलवे 
678  62.1 
साऊथ सेंट्रल 
424  70.3 
वेस्‍टर्न 
399  95.5
साऊथ ईस्‍टर्न 382  58.4 
नॉर्थ ईस्‍ट फ्रंटियर  347  64.5 
साउर्दन 
284  65.5 

क्‍या हैं डिफिशिएंसी 
रेलवे के एक वरिष्‍ठ अधिकारी ने बताया कि सेफ्टी ऑफिसर रेलवे नेटवर्क में हर तरह के उन प्‍वाइंट्स के बारे में रिपोर्ट करते हैं, जिससे सेफ्टी प्रभावित होती है। इसमें पटरी के टूटने, कमजोर पड़ने, सिग्‍नल में दिक्‍कत, रेल कर्मचारियों द्वारा मैन्‍युअल सिग्‍नल, लेवल क्रॉसिंग जैसे प्‍वाइंट्स शामिल हैं। कई ऐसे प्‍वाइंट्स भी होते हैं, जो लगते तो बहुत छोटे हैं, लेकिन वे बड़ी दुर्घटना का कारण बन जाते हैं। यही वजह है कि सीआरबी चाहते हैं कि सेफ्टी डिफिशिएंसी का कम्‍प्‍लायंस एक्‍शन 100 फीसदी हो। इसलिए उन्‍होंने यह लैटर लिखा है। 

 
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