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  • Property dealers demand cash even after demonetisation and RERA's strictness

रिपोर्ट /नोटबंदी और रेरा की सख्ती की बाद भी प्राॅपर्टी डीलर्स मांग रहे कैश

  • कैश की डिमांड के चलते कस्टमर्स को प्रॉपर्टी खरीदने की योजना ही ड्रॉप करनी पड़ रही है या फिर अन्य स्रोतों से कैश जुटाने को मजबूर होना पड़ रहा है।

Moneybhaskar.com

Nov 25,2019 07:26:00 PM IST

नई दिल्ली. मोदी सरकार की तरफ से कैश का इस्तेमाल कम करने और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की तमाम कोशिशों और रेरा के निर्देशों के बावजूद बिल्डर्स अब भी लोगों से प्रॉपर्टी का भुगतान कैश में करने को कह रहे हैं। इसके चलते या तो कस्टमर्स को प्रॉपर्टी और जमीन खरीदने की योजना ही ड्रॉप करनी पड़ रही है या फिर अन्य स्रोतों से कैश जुटाने को मजबूर होना पड़ रहा है। प्रतिष्ठित रियल्टी डेवलपर्स वाले बड़े प्रॉपर्टी बाजारों में डेवलपर्स चेक से भुगतान लेने लगे हैं, लेकिन अहमदाबाद, चंडीगढ़, जयपुर, नोएडा, औरंगाबाद, कोच्चि और इंदौर में अब भी बिल्डर्स प्रॉपर्टी बेचने में कैश की मांग कर रहे हैं।

50 हजार लोगों पर हुआ सर्वे

इकोनॉमिक टाम्स की खबर के मुताबिक, कम्युनिटी प्लेटफॉर्म लोकल सर्किल्स द्वारा देश के 220 जिलों में 50 हजार लोगों पर कराए गए सर्वे में पाया गया कि रियल एस्टेट बाजार में अब भी ज्यादातर भुगतान कैश में किया जा रहा है। यह भी तक जब तीन साल पहले नोटबंदी में हाई-वैल्यू नोट बैन हो गए थे। इस सर्वे में तकरीबन 42 फीसदी रिस्पॉन्डेंट्स टियर-1 शहरों से थे, 28 फीसदी टियर-2 शहरों और 30 फीसदी टियर-3 शहरों से थे।

57 फीसदी लोगों ने किया 50 फीसदी तक कैश भुगतान

रिपोर्ट के मुताबिक, 57 फीसदी लोगों ने बताया कि उन्होंने कुल भुगतान का 25-50 फीसदी कैश में दिया और बाकी राशि ई-पेमेंट और चेक के जरिए दी। 33 फीसदी लोगों ने कहा कि उन्होंने पूरा भुगतान चेक या डिजिटल माध्यम से किया। 10 फीसदी लोगों ने बताया कि उन्होंने 25 फीसदी से कम भुगतान कैश में किया, बाकी चेक और ई-पेमेंट के जरिए किया।

टैक्स बचाने के लिए कैश मांगते हैं प्रॉपर्टी डीलर्स और बिल्डर्स

जयपुर में ऑपरेट करने वाले एक ब्रोकर ने बताया कि प्राधिकरण के अंतर्गत आने वाले बड़े प्रॉपर्टी मार्केट्स में प्रॉपर्टी की खरीद में कैष का इस्तेमाल बेहद कम हुआ है, छोटे बाजारों में अब तक इसमें गिरावट नहीं देखी गई है। वडोदरा के एक डेवलपर ने बताया कि खाली जमीन की डील में कैश का इस्तेमाल अधिक प्रचलन में है। अधिकतर जमींदार किसान होते हैं जो असंगठित सेक्टर से जुड़े हैं और उन्हें नकद में भुगतान पाने में कोई परेशानी नहीं होती है। जमीन खरीदने-बेचने की अधिकतर डील्स में दोनों में से कोई भी एक पार्टी टैक्स बचाने के लिए भी कैश में भुगतान को तवज्जो देती है।

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