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24 घंटे बिजली के लिए मोदी-योगी सरकार के बीच समझौता आज, लेकिन ये हैं चुनौतियां

 
नई दिल्‍ली। उत्‍तर प्रदेश को 24 घंटे बिजली देने के वादे को पूरा करने के लिए शुक्रवार को मोदी और योगी सरकार के बीच समझौता होगा। इससे पहले मोदी सरकार ऐसे समझौते शेष सभी राज्‍यों के साथ कर चुकी है, लेकिन यूपी का इसके पहले अखिलेश यादव सरकार के समय यह समझौता नहीं हो पाया था। मोदी और योगी सरकारें चाहती हैं कि 25 सितंबर 2018 तक उत्‍तर प्रदेश के हर घर को 24 घंटे बिजली मिले, एक्‍सपर्ट्स मानते हैं कि यह काम असंभव नहीं है, लेकिन आसान भी नहीं है। इसके लिए दोनों सरकारों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।
 
चोरी पर अंकुश लगाना आसान नहीं
 
उत्‍तर प्रदेश में लाइन लॉस लगभग 32 फीसदी है। खासकर कई इलाकों में 89 फीसदी तक है। यानी कि कुल सप्‍लाई का केवल 11 फीसदी ही बिजली का बिल मिलता है। इसमें ज्‍यादातर बिजली चोरी हो जाती है। कई साल तक उत्‍तर प्रदेश में चीफ इंजीनियर रहे शैलेंद्र दूबे ने मनीभास्‍कर को बताया कि इटावा के दिव्‍यापुर डिवीजन में लाइन लॉस 89 फीसदी है, जबकि मऊ के एक डिवीजन में 81 फीसदी और कन्‍नौज के एक डिवीजन में 76 फीसदी लाइन लॉस है। यहां के लोग बिजली का बिल नहीं भरते। जबकि पिछली सरकार द्वारा इन इलाकों में 24 घंटे बिजली दी जा रही थी। अब जब योगी सरकार जिला मुख्‍यालयों पर 24 घंटे बिजली देने जा रही थी और बिजली चोरी नहीं रुकी तो दूसरे इलाकों में बिजली कटौती करनी पड़ेगी। यह देखना होगा कि योगी सरकार बिजली चोरी पर कैसे अंकुश लगाएगी।
 
रोजाना 25 करोड़ रुपए की चोरी
 
दूबे के मुताबिक, उत्‍तर प्रदेश में बिजली का कुल 39 हजार मेगावाट है, इसमें से 16 हजार मेगावाट की डिमांड हमेशा रहती है। यानी कि लगभग 400 मिलियन यूनिट रोजाना बिजली चाहिए। राज्‍य में लाइन लॉस यदि 32 फीसदी हैं तो इसमें से कम से 25 फीसदी बिजली चोरी हो जाती है। यानी कि रोजाना लगभग 25 करोड़ रुपए की चोरी होती है। इसे यदि रोक दिया जाए तो सरकार को राजस्‍व मिलेगा और लोगों को सस्‍ती बिजली। 
 
एफिशिएंसी बढ़ानी होगी
 
पावर पॉलिसी एनालिस्‍ट शंकर शर्मा ने मनीभास्‍कर ने कहा कि सरकार के पास बिजली बहुत है। लगभग दोगुना अधिक। अभी देश की पावर डिमांड 1 लाख 50 हजार मेगावाट के आसपास है तो जनरेशन 3 लाख मेगावाट से अधिक। ऐसे में, किसी भी राज्‍य में 24 घंटे बिजली देने का वादा करना आसान है, लेकिन जब तक डिस्ट्रिब्‍यूशन और ट्रांसमिशन की एफिशिएंसी नहीं बढ़ेगी, तब तक 24 घंटे बिजली पहुंचाना बहुत मुश्किल है। शर्मा मानते हैं कि केंद्र और उत्‍तर प्रदेश सरकार ठान लें तो इस चुनौती से निपटा जा सकता है। क्‍योंकि इस तरह के काम करने के लिए राजनीतिक इच्‍छा शक्ति का होना जरूरी है।
 
सस्‍ती बिजली का इंतजाम
 
दूबे के मुताबिक, उत्‍तर प्रदेश में जब तक भाजपा की सरकार नहीं थी तो पावर मिनिस्‍टर बार-बार कहते थे कि एक्‍सचेंज में 3 रुपए से कम कीमत पर बिजली उपलब्‍ध है, लेकिन यूपी सरकार नहीं लेती। इसकी वजह यह थी कि यूपी सरकार ने कई कंपनियों से महंगी कीमत पर बिजली खरीद के समझौते किए हुए थे, जो 25-25 साल तक के हैं। लेकिन अब यूपी सरकार को यह महंगे और लॉन्‍ग टर्म पीपीए (पावर परचेज एग्रीमेंट) कैंसिल करने चाहिए, ताकि लोगों को सस्‍ती बिजली मिल सके।
 
गुजरात मॉडल पर काम करे यूपी
 
वहीं, शंकर शर्मा ने कहा कि यूपी सरकार को गुजरात मॉडल पर काम करना चाहिए। जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्‍यमंत्री थे तो उन्‍होंने गुजरात की बिजली व्‍यवस्‍था पर पहले व्‍यापक स्‍टडी कराई। इसके लिए दूसरे राज्‍यों के लोगों को बुलाया गया और कारणों की पड़ताल की गई, तब उसका समाधान निकाला गया।  
 
अगली स्‍लाइड में पढ़ें – केंद्र उठा रहा है यह कदम 

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