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गर्मियों के साथ बढ़ी पावर की डिमांड, यूपी, महाराष्‍ट्र सहित कई राज्‍यों में कटौती के आसार


नई दिल्‍ली। गर्मी बढ़ने के साथ साथ पावर की डिमांड भी बढ़ती जा रही है। मार्च के पहले सप्‍ताह में जहां देश में पावर की डिमांड 1 लाख 30 हजार मेगावाट थी, अब बढ़कर 1 लाख 40 हजार मेगावाट तक पहुंच गई है। केंद्र सरकार का अनुमान है कि इस साल बिजली की डिमांड 1 लाख 65 हजार मेगावाट के रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच जाएगी, इसके चलते कई राज्‍यों में पावर का संकट गहराने के आसार हैं। दिलचस्‍प बात यह है कि केंद्र सरकार देश में लगातार सरप्‍लस पावर का दावा कर रही है, लेकिन दर्जनों पावर प्‍लांटों के बंद होने और ट्रांसमिशन नेटवर्क में दिक्‍कतों की वजह से कई राज्‍यों में बिजली संकट से इंकार नहीं किया जा सकता।
 
 
यूपी में संकट के आसार
 
हाल ही में उत्‍तर प्रदेश में नई सरकार बनी राज्‍य सरकार के समक्ष पावर एक बड़ा चैलेंज बनने वाला है। चुनाव प्रचार के दौरान पावर मिनिस्‍टर पीयूष गोयल ने कहा था कि समाजवादी पार्टी की सरकार ने केंद्र की योजनाओं का लाभ नहीं उठाया, जिस कारण उत्‍तर प्रदेश के लोगों को पावर क्राइसिस का सामना करना पड़ा। अब प्रदेश में भाजपा की सरकार है, ऐसे समय में गर्मी के सीजन में पावर की कमी लोगों को अखर सकती है। गर्मी के साथ ही प्रदेश में बिजली की डिमांड बढ़ती जा रही है। आजकल प्रदेश की बिजली की डिमांड 14 हजार मेगावाट से अधिक है, जबकि राज्‍य में लगभग 2200 मेगावाट क्षमता के पावर प्‍लांट मेंटिनेंस और कोयले की कमी की वजह से बंद पड़े हैं। इतना ही नहीं, ट्रांसमिशन लाइनों की हालत ठीक न होने के कारण सेंट्रल से भी उत्‍तर प्रदेश को बिजली नहीं मिल पा रही है। ऐसे में, जानकारों का मानना है कि इस साल गर्मियों में राज्‍य के लोगों को पावर क्राइसिस से मुक्ति नहीं मिलने वाली।
 
इन राज्‍यों में भी बिजली कटौती के आसार 
 
इसी तरह महाराष्‍ट्र, पंजाब, हरियाणा, दिल्‍ली में भी बिजली कटौती के आसार हैं। एनएलडीसी के आंकड़ों के मुताबिक, छह अप्रैल को महाराष्‍ट्र में 347 मेगावाट बिजली की कटौती रिकॉर्ड की गई। जबकि लगभग सभी राज्‍यों ने सेंट्रल पूल से ओवरड्रॉ किया। उल्‍लेखनीय है कि ज्‍यादा ओवरड्रॉ भी ग्रिड के लिए खतरा बन सकता है।
 
 
डिमांड के साथ बढ़ी कटौती
 
नेशनल लोड डिस्‍पेच सेंटर की रिपोर्ट के मुताबिक देश भर में पावर की डिमांड बढ़ती जा रही है। तीन अप्रैल को पावर डिमांड 1 लाख 38 हजार 151 मेगावाट थी, जो 6 अप्रैल को बढ़कर 1 लाख 43 हजार 749 मेगावाट तक पहुंच गई। इसके लिए बिजली की कटौती भी बढ़ती जा रही है। 3 अप्रैल 1188 मेगावाट बिजली की कटौती हुई, जो 6 अप्रैल को बढ़कर 1673 मेगावाट तक पहुंच गई। जानकारों का मानना है कि गर्मी के पीक सीजन में बिजली की कटौती 3 से 4 गुणा बढ़ सकती है।
 
सब्सिडी खत्‍म होने से पड़ेगा असर
 
मोदी सरकार ने गैस से चल रहे पावर प्‍लांट्स के लिए दो साल पहले एक योजना शुरू की थी। इसका मकसद लगभग 24 हजार मेगावाट पावर का प्रोडक्‍शन बढ़ाना था, क्‍योंकि गैस महंगी होने के कारण ये प्‍लांट्स बंद पड़े थे और सब्सिडी देकर इन प्‍लांट्स को चालू कराया गया। 31 मार्च को यह स्‍कीम खत्‍म हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, इनमें से कई पावर प्‍लांट्स यह कहकर प्रोडक्‍शन रोक सकते हैं कि उन्‍हें गैस खरीदने में दिक्‍कत आ रही है, जबकि दो साल के मुकाबले अब गैस कुछ सस्‍ती हुई है। यदि पावर प्रोडक्‍शन बंद होता है तो इसका असर अगले कुछ दिनों में दिखने लगेगा। इस फैसले से जिन कंपनियों की बिजली इकाइयों पर असर पड़ेगा उनमें एनटीपीसी, गुजरात राज्य बिजली आपूर्ति कंपनी लिमिटेड, सीएलपी इंडिया, टॉरंट पावर, जीवीके इंडस्ट्रीज, लैंको पावर, जीएआर एनर्जी आदि शामिल हैं। 

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