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Home » Economy » InfrastructurePM Modi's ambitious Kashi Vishwanath Corridor is being spent on Rs 600 crore, 450 meter long Ganga coast and a wide road to 45 meters

प्रोजेक्ट / पीएम मोदी के महत्वाकांक्षी काशी विश्वनाथ कॉरिडोर पर खर्च हो रहे हैं 600 करोड़ रुपए, 450 मीटर लम्बा गंगा तट और 45 मीटर चौड़ा रास्ता बनेगा

19 मई को बनारस में है वोटिंग, कॉरिडोर निर्माण है प्रमुख मुद्दा, विपक्षी दल विरोध में

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नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव 2019 के आखिरी चरण में 19 मई को वोटिंग होना है। इसी चरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संसदीय सीट वाराणसी भी है। मोदी समेत विपक्षी दलों के बीच जबरदस्त चुनावी संघर्ष है। लेकिन चर्चा में यहां पीएम मोदी का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट काशी विश्वनाथ कॉरिडोर भी है। करीब 600 करोड़ रुपए इस पर खर्च हो रहे हैं। आदर्श आचार चुनाव संहिता लगने से एन वक्त पहले 8 मार्च को पीएम ने इसका शिलान्यास किया था। कॉरिडोर के बनने से श्रृद्धालु गंगा से स्नान के बाद सीधे बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर सकेंगे। यहां लगने वाले ट्रैफिक जाम से निजात मिल सकेगी। 

 

जानिए कॉरिडोर की खासियतों के बारे में 

 

श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर से ललिता घाट तक करीब 39 हजार वर्ग मीटर में प्रस्तावित मंदिर कॉरिडोर (kashi vishwanath corridor) अब श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के रूप में जाना जाएगा। श्रीकाशी विश्वनाथ धाम गंगा तट पर मणिकर्णिका व ललिताघाट से लेकर मंदिर के बीच में प्रस्तावित कार्यस्थल है। जिसे श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर के नाम से जाना जाता था। लेकिन पीएम के शिलान्यास करने के बाद अब श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के नाम से जाना जाएगा। मंदिर परिसर से करीब 450 मीटर लम्बा गंगा तट और 45 मीटर तक चौड़े धाम का निर्माण कार्य शुरू होगा। करीब 360 करोड़ की लागत से मंदिर धाम के अंदर श्रद्धालुओं के बैठने व ठहरने के बेहतर प्रबंध होगी। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए तीन चरणों में व्यवस्था है। आगंतुकों के लिए एक बड़ा सभागार, संग्रहालय, बहुउद्देश्यीय हॉल, मल्टीस्टोरी शौचालय,  भजन संध्या के लिए हॉल, योगा स्थल, मणिकर्णिका घाट पर ओपेन थिएटर, विकलांग श्रद्धालुओं के रैम्प व गोल्फकार्ट चलाने की भी सुविधा मुहैया करायी जाएगी। गंगा तट से मंदिर तक पहुंचने के लिए धाम के अंदर दो प्रवेश द्वार बनाए जाएंगे। हालांकि मंदिर परिसर में जाने के लिए चार पूर्व निर्धारित प्रवेश द्वार बनेंगे।

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विपक्ष का आरोप, बनारस की संस्कृति के खिलाफ है कॉरिडोर

 

विपक्षी इसे बनारसी संस्कृति के खिलाफ बता रहे हैं। उनका तर्क है कि श्रद्धालु यहां काशी का अतिप्राचीन रूप देखने आते हैं और मोदी सरकार आधुनिकीकरण के नाम पर बनारस की सांस्कृतिक विरासत को नष्ट कर रही है। वहीं, बीजेपी का कहना है कि अपने निजी स्वार्थों के कारण विरोधी हर साल आने वाले लाखों शिवभक्तों को मिलने वाली सुविधा को नजरअंदाज कर रहे हैं। 

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अब संकरी गलियों में दो-तीन किमी लंबी लाइनें न दिखे 

 

सावन में देशभर से आनेवाले भोले भक्तों की संकरी गलियों में दो-तीन किमी लंबी लाइन लगने का जो दृश्य काशीवासियों के जेहन में दशकों से है, वह काशी विश्वनाथधाम बन जाने के बाद शायद ही दिखे। काशी विश्वनाथ मंदिरधाम के लिए अगल-बगल के मकानों को खरीदने के साथ उसको जमींदोज करके जिस तरीके से विस्तार की प्रक्रिया शुरू हुई है, उसे देखकर देश के कोने-कोने से आने वाले तीर्थयात्रियों को सुकून मिल रहा है। 

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अभी तक यह हुआ 

  • -271 भवन आ रहे श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के दायरे में
  • -238 भवनों की हो चुकी है रजिस्ट्री 
  • -180 भवनों को तोड़कर किया समतल
  • -33 मंदिर अब तक निकल चुके हैं ध्वस्तीकरण में
  • -43 हजार वर्ग मीटर में स्थित श्रीकाशी विश्वनाथ विशिष्ट क्षेत्र विकास परिषद

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मंदिर प्रशासन को मिल चुके हैं 290 करोड़ रुपए 

 

290 करोड़ रुपये मंदिर प्रशासन को जारी किये जा चुके हैं। प्रशासन ने कॉरिडोर के लिए चिन्हित 296 मकानों में से 235 खरीदे लिए हैं, जबकि बाकी की प्रक्रिया चल रही है। मंदिर प्रशासन द्वारा खरीदे गए ज्यादातर मकान ध्वस्त कर दिये गये हैं। पुराने मकानों के ढहाने के बाद अनेक प्रचीन मंदिर आसानी से दिखाई देने लगे हैं। कॉरिडोर निमार्ण के बाद श्री काशी विश्वनाथ मंदिर से दशाश्वमेध घाट पर प्रति वर्ष आने वाले करोड़ों देशी-विदेशी श्रद्धालुओं का आवागम एवं दर्शन-पूजन करने पहले की अपेक्षा सुगम हो जाएगा।

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