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ताज महल आज बनता तो खर्च होते 6800 करोड़, ये हैं 11 रोचक फैक्‍ट्स

मुगल सम्राट शाहजहां ने अपनी तीसरी बेगम मुमताज महल की याद में इसे बनवाया था। 1632 में इसको बनाने में करीब 3.2 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। आज यदि ताज महल बनता तो इसकी लागत करीब 6800 करोड़ रुपए होती।

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नई दिल्‍ली। ताज महल दुनियाभर के टूरिस्‍ट को अपनी ओर आकर्षित करता है। मुगल सम्राट शाहजहां ने अपनी तीसरी बेगम मुमताज महल की याद में इसे बनवाया था। 1632 में इसको बनाने में करीब 3.2 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। आज यदि ताज महल बनता तो इसकी लागत करीब 6800 करोड़ रुपए होती। आइए जानते हैं ताज महल से जुड़े ऐसे ही 11 रोचक फैक्‍ट्स...
 
3.2 करोड़ रुपए की लागत से 22 साल में बना
 
वास्‍तुशिल्‍प की नायाब इमारत ताज महल को बनाने का काम 1632 में शुरू हुआ था, जो 1653 में लगभग 22 साल में बनकर तैयार हुआ। इसको बनाने में उस वक्‍त करीब 3.2 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। वंडरलिस्‍ट डॉट कॉम के मुताबिक आज की तारीख में ताज महल बनाने की लागत करीब 6800 करोड़ रुपए आएगी।  
 
अगली स्‍लाइड में जानिए, ताज महल से जुड़े अन्‍य रोचक फैक्‍ट्स के बारे में…..  
 
 
जब नटवरलाल ने ताज महल को ही बेच डाला
 
बिहार के जानेमाने ठग नटवरलाल ने एक बार तो लोगों को ताज महल को बेच दिया था। इतना ही नटवर लाल ने पैसों के लिए लाल किला, संसद भवन और राष्ट्रपति भवन को बेच दिया था। नटवर लाल ने ताज महल और ऐतिहासिक महत्व की कई बड़ी इमारतों के नाम पर भी जालसाजी की थी, वो भी एक बार नहीं दो बार।
 
 
 
मुमताज के मकबरे की छत पर छोड़ दिया एक छेद  
 
मुगल सम्राट शाहजहां ने ताज महल बनने के बाद इसको बनाने वाले सभी मजदूरों के हाथ को काट देने का एेेलान किया। इस बात से नाराज मजदूरों ने ताज महल की छत में एक छेद कर दिया ताकि ताज महल में कुछ कमी रह सके। 
 
 
 
ताज महल के चारों ओर बना दिया बांस का घेरा 
 
द्वितीय विश्‍व युद्ध, 1971 भारत-पाक युद्ध और अमेरिका के 9/11 जैसी घटनाओं के बाद सुरक्षा के लिहाज से ताज महल के चारों तरफ बांस का सुरक्षा घेरा बना दिया गया था। इतना ही नहीं उस पर हरे रंग की चादर डाल दी गई थी, ताकि यह आसानी से दुश्‍मनों की नजर में ना सके।
 
 
 
यमुना नदी न होती तो ताज महल भी न होता
 
दुनिया की बेहतरीन इमारतों में शामिल ताज महल का आधार एक ऐसी लकड़ी है जो नमी के कारण ही मजबूत बनी रहती है। इसको मजबूती देने का काम करती है इसके बगल से बहने वाली युमना नदी। 
 
 
पहर के हिसाब से बदल जाता है ताज का रंग
 
अधिकांश लोगों ने शायद इस बात पर ध्‍यान ना दिया हो, लेकिन पहर के हिसाब से ताज महल भी अपना रंग बदलता है। ताज महल का सुबह का रंग गुलाबी, शाम को दुधिया सफेद और चांदनी रात में सुनहरा रंग देखने को मिलता है। 
 
 
जॉर्ज हेरिसन ने ली थी सबसे पहली सेल्फी
 
आज सेल्‍फी का क्रेज भले ही बढ़ रहा है। लेकिन ताज महल के सबसे पहली सेल्फी जॉर्ज हेरिसन नाम के श्‍ख्‍स ने फीस आई लेंस के जरिए ली थी।
 
 
ताज महल देखने हर रोज आते हैं 12000 टूरिस्‍ट  
 
ताज महल टूरिस्‍टों को सबसे ज्‍यादा आर्षित करती है। दुनिया में एक दिन में सबसे ज्‍यादा देखी जाने वाली ईमारत है ताज महल। इसको देखने के लिए प्रतिदिन देश और विदेश से 12000 टूरिस्‍ट आते हैं। 
 
 
सभी फव्‍वारे एक साथ पर करते हैं काम
 
ताज महल के पास लगे फव्‍वरों की खासियत ये है कि ये किसी पाइप लाइन से नहीं जुड़े हैं बल्कि, इनके नीचे तांबे का टैंक बना हुआ है। ये टैंक एक साथ भरता है जिसके कारण सभी फव्‍वारे एक साथ ही काम करते हैं। 
 
 
ताज महल में 28 तरह के पत्‍थरों का इस्‍तेमाल
 
ताज महल को बनाने के लिए 28 तरह के बेहतरीन क्‍वालिटी और कीमती पत्‍थरों का इस्‍तेमाल किया गया है। खासकर इसके निर्माण में सफेद संगमरमर का इस्‍तेमाल अधिक हुआ है। इन कीमती पत्‍थरों को राजस्‍थान, अफगानिस्‍तान, चीन और तिब्‍बत से मंगवाया गया था।
 
 
एक दूसरे की झुकी नजर आती हैं इसकी मीनारें
 
वास्‍तुशिल्‍प की इस बेहतरीन ईमारत ताज महल की मीनारें एक-दूसरे की ओर झुकी हुई नजर आती है। दरअसल इन्‍हें इस तरह से बनाया गया है कि यदि भूकंप भी आए तो ये मीनारें मुख्‍य गुंबद पर ना गिरे। 
 
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