रिपोर्ट /आर्थिक मोर्चे पर भारत को एक और झटका, रेटिंग एजेंसी मूडीज का नेगेटिव नजरिया

  • वैश्विक स्तर पर भारतीय अर्थव्यवस्था के नकारात्मक अनुमान से देश में विदेशी निवेश पर सीधा असर पड़ेगा। 
  • अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट के मुताबिक देश में पिछले छह सालों में रोजगार में 90 लाख की गिरावट दर्ज की गई है।

Moneybhaskar.com

Nov 08,2019 01:16:11 PM IST

नई दिल्ली. क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज (Moody's) ने भारत को आर्थिक मोर्चे पर झटका दिया है। रेटिंग एजेंसी मूडीज इनवेस्टर्स सर्विस ने भारत की रेटिंग घटा दी है। एजेंसी ने भारत के बारे अपने आउटलुक यानी नजरिए को 'स्टेबल' (स्थि‍र) से घटाकर 'नेगेटिव' कर दिया है। इसकी वजह कम आर्थिक वृद्धि को वजह बताया गया है। मूडीज के मुताबिक भारत की अर्थव्यवस्था सुस्त है। इस वजह से धीमी अर्थव्यवस्था को लेकर जोखिम बढ़ रहा है। ऐसे में आर्थिक मंदी को लेकर चिंताएं लंबे समय तक रहेंगी, नई नौकरियां नहीं पैदा होगी और कर्ज बढ़ेगा।

क्या होगा असर

वैश्विक स्तर पर भारतीय अर्थव्यवस्था के नकारात्मक अनुमान से देश में विदेशी निवेश पर सीधा असर पड़ेगा। यह भारत सरकार के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है, क्योंकि भारत की ओर से पीएम मोदी लंबे वक्त से देश में विदेशी निवेश को आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए भारत सरकार की तरफ से करीब हर एक सेक्टर में एफडीआई में छूट दी गई है। साथ ही भारत में 500 मिलियन डॉलर (करीब 3500 करोड़ रुपए) का निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों को केंद्र सरकार की तरफ से रिलेशनशिप मैनेजर मुहैया कराने की बात कही गई थी, जो देश में भारी निवेश करने वाले निवेशकों की कानूनी रुकावटों को तत्काल प्रभाव से कम करने का काम करेंगे।

रेटिंग एजेंसियां घटा रही भारत की जीडीपी ग्रोथ

वाजिब है कि केंद्र की मोदी सरकार साल 2025 तक 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्‍य को हासिल करने के लिए जीडीपी ग्रोथ बढ़ाने पर जोर दे रही है। लेकिन दुनिया भर की रेटिंग एजेंसियां भारत के जीडीपी ग्रोथ अनुमान को घटा रही हैं। पिछले माह मूडीज ने वित्त वर्ष 2019-20 के लिए ग्रोथ रेट अनुमान घटाकर 5.8 फीसदी कर दिया है, पहले इसका जीडीपी ग्रोथ अनुमान 6.2 फीसदी था। वहीं मूडीज ने वित्त वर्ष 2020-21 में ग्रोथ रेट बढ़कर 6.6 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। मूडीज को उम्‍मीद है कि यह आंकड़ा आने वाले सालों में बढ़कर 7 फीसदी तक पहुंच जाएगा।

देश में रोजगार के मोर्चे पर चुनौती

अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑफ सस्टेनेबेल इम्प्लॉयमेंट की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले छह साल में देश में रोजगार में 90 लाख की गिरावट आई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आज़ाद भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार है जब रोजगार में इस तरह की गिरावट देखी गई है। आंकडे साल 2011-12 और 2017-18 के बीच के हैं।

मामले में भारत सरकार की प्रतिक्रिया

भारत सरकार ने पाया कि मूडीज इन्‍वेस्‍टर्स सर्विस ने आज बीएएटू पर विदेशी मुद्रा और स्‍थानीय मुद्रा दीर्घकालीन जारीकर्ता रेटिंग को अपरिवर्तित रखते हुए भारत सरकार की नकारात्‍मक से स्थिर रेटिंग पर अपना दृष्टिकोण बदल दिया है। भारत हालांकि दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती हुई प्रमुख अर्थव्‍यवस्‍थाओं में से एक है। भारत की आपेक्षिक स्थिति स्थिर बनी हुई है। अंतर्राष्‍ट्रीय मुद्रा कोष ने अपनी नवीनतम वर्ल्‍ड इक्‍नॉमिक आउटलुक में उल्‍लेख किया है कि भारत की अर्थव्‍यवस्‍था 2019 में 6.1 प्रतिशत की दर से बढ़नी निश्चित है जो 2020 में बढ़कर 7 प्रतिशत हो जाएगी। जैसा कि भारत की संभावित विकास दर स्थिर बनी हुई है अंतर्राष्‍ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और अन्‍य बहुपक्षीय संगठनों का भारत पर लगातार सकारात्‍मक दृष्टिकोण जारी रहा है। भारत ने अर्थव्‍यवस्‍था को मजबूत बनाने के लिए वित्‍तीय क्षेत्र और अन्‍य सुधारों की एक श्रृंखला शुरू की है। भारत सरकार ने वैश्विक मंदी के जवाब में सक्रिय रूप से नीतिगत निर्णय भी लिए हैं। इन उपायों से भारत के बारे में सकारात्‍मक दृष्टिकोण को बढ़ावा मिलेगा और देश में पूंजी प्रवाह आकर्षित होगा तथा निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा। मुद्रास्‍फीति नियंत्रण में रहने और बॉन्‍ड लाभ कम होने से अर्थव्‍यवस्‍था के बुनियादी ढांचे मजबूत बने रहेंगे। भारत निकट और मध्‍यावधि में विकास की मजबूत संभावनाओं को लगातार प्रस्‍तुत कर रहा है।

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