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  • Gov plans to digitally map India using Drones will spend Rs 1000 Crore

प्रोजेक्ट्स /ड्रोन के जरिए पहली बार बनेगा भारत का डिजिटल मैप, सरकार करेगी 1000 करोड़ रुपए खर्च 

  • ये प्रोजेक्ट महाराष्ट्र, कर्नाटक और हरियाणा में शुरू हो चुका है
  • इसके लिए तीन डिजिटल केंद्र बनाए गए हैं

Moneybhaskar.com

Sep 17,2019 01:51:00 PM IST

नई दिल्ली. भारत ड्रोन, कृत्रिम मेधा जैसी तकनीकों और वृहद डाटा का इस्तेमाल कर देश का 10 सेंटीमीटर रिजोल्यूशन का डिजिटल मानचित्र तैयार करने की परियोजना शुरू की है। विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी विभाग के अंग भारतीय सर्वेक्षण विभाग ने तीन महीने पहले यह अत्यंत कठिन काम अपने हाथ में लिया और इसे दो साल में पूरा करने की योजना है। विभाग के सचिव प्रोफेसर आशुतोष शर्मा ने यह जानकारी दी। इसके साथ ही उन्होंने यह बताया कि इसके लिए सरकार 1,000 करोड़ रुपए खर्च करने की योजना बनाई है।

नक्शे में भूमि विवरण, सामाजिक-आर्थिक डेटा, सड़क नेटवर्क आदि सहित सभी प्रकार के रिकॉर्ड होंगे

प्रो आशुतोष शर्मा ने बताया 'भारत के डिजिटल मानचित्र की आवश्यकता महसूस की गई। यह बेहतर निर्णय लेने में सक्षम होगा। नक्शे में भूमि विवरण, सामाजिक-आर्थिक डेटा, सड़क नेटवर्क आदि सहित सभी प्रकार के रिकॉर्ड होंगे।' उन्होंने कहा, 'डिजिटल मैप तैयार करने की जिम्मेदारी देश के सबसे पुराने वैज्ञानिक विभाग, सर्वे ऑफ इंडिया को सौंपी गई है। भारत सरकार का साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग, डिजिटल मैपिंग के प्रोजेक्ट में दो साल तक सर्वे ऑफ इंडिया की मदद करेगा।'

बनाए गए हैं तीन डिजिटल केंद्र

ये प्रोजेक्ट महाराष्ट्र, कर्नाटक और हरियाणा में शुरू हो चुका है। इसके लिए तीन डिजिटल केंद्र बनाए गए हैं। यहां से पूरे देश का भौगोलिक डिजिटल डेटा बनाया जाएगा। हालांकि, राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते संवेदनशील स्थानों की की मैपिंग नहीं की जाएगी।

मौजूदा नक्शा ब्रिटिश सर्वेयर कर्नल सर जॉर्ज एवरेस्ट ने 1 मई 1830 को बनाया था

सर्वे ऑफ इंडिया का कहना है कि यह नक्शा 10 सेंटीमीटर तक की सटीक पहचान प्रदान करेगा। बताया गया कि फिलहाल हमारे पास 2500 से ज्यादा ग्राउंड कंट्रोल पॉइंट्स हैं और इसी आधार पर मैपिंग होती आ रही है। यह ग्राउंड कंट्रोल पॉइंट्स देश के हर 30 से 40 किमी के दायरे में समान रूप से बांटे गए हैं। नई मैंपिंग के लिए हम वर्चुअल CORS सिस्टम का इस्तेमाल कर रहे हैं। ये चंद सेंटीमीटर की निश्चितता से तत्काल ऑनलाइन 3D पोजिशनिंग दे पाएंगे। यानी एक क्लिक में किसी भी क्षेत्र की 3D पोजीशन का पता लगाया जा सकेगा। सैटेलाइट से नियंत्रित होने वाले GPS सिस्टम, गूगल मैप्स के मुकाबले यह डिजिटल नक्शा ज्यादा सटीक और स्पष्ट होगा। बता दें कि मौजूदा नक्शा ब्रिटिश सर्वेयर कर्नल सर जॉर्ज एवरेस्ट ने 1 मई 1830 को बनाया था।

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