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    22 फीसदी ही उत्‍पादन कर रहे हैं गैस से चलने वाले पावर प्‍लांट, सरकार के लिए बने चुनौती

     
    नई दिल्‍ली। एक ओर मोदी सरकार साल 2022 तक 24 घंटे बिजली देने का वादा कर रही है, वहीं दूसरी ओर गैस से चलने वाले पावर प्‍लांट्स की हालत नहीं सुधर रही है। गैस से चलने वाले पावर प्‍लांट्स अपनी कैपेसिटी से 78 फीसदी कम पावर प्रोडक्‍शन कर रहे हैं। यही वजह है कि इन्‍वायरमेंट फ्रेंडली न होने के बावजूद सरकार को कोयले से चलने वाले पावर प्‍लांट्स पर निर्भर करना पड़ रहा है।
     
    कितना पावर प्रोड्यूस कर रहे हैं प्‍लांट्स
     
    सेंट्रल इलैक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (सीइए) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक गैस से चलने वाले पावर प्‍लांट्स की कुल कैपेसिटी 25274 मेगावाट है, लेकिन ये पावर प्‍लांट्स केवल 5680 मेगावाट पावर ही प्रोड्यूस कर रहे हैं। सीइए के मुताबिक गैस पावर प्रोजेक्‍ट्स का प्‍लांट लोड फैक्‍टर 22.54 फीसदी है।
     
    गैस न मिलने से बढ़ा पीएलएफ
     
    नेचुरल गैस न होने के कारण गैस से चलने वाले पावर प्रोजेक्‍ट्स ठप पड़े हैं। देश में कुल 405 मिलियन क्‍यूबिक मीटर प्रतिदिन नेचुरल गैस की डिमांड है, लेकिन डिमांड के मुकाबले पांचवा हिस्‍सा ही डोमेस्टिक गैस का प्रोडक्‍शन हो पाता है। इसमें से पहले फर्टिलाइजर प्‍लांट और सिटी गैस डिस्ट्रिब्‍यूशन के लिए गैस दी जाती है, जिसकारण पावर प्‍लांट्स को गैस नहीं मिल पाती।
     
    पिछले प्रयास रहे नाकाफी
     
    मोदी सरकार ने आते ही गैस बेस्‍ड पावर प्‍लांट्स को रिवाइव करने की घोषणा की थी। सरकार ने बंद पड़े पावर प्‍लांट्स के लिए सस्‍ती गैस उपलब्‍ध कराने की योजना तैयार की और पावर प्‍लांट्स को सब्सिडी उपलब्‍ध कराने का निर्णय लिया गया। इसके तहत साउथ इंडिया के पावर प्‍लांट्स के गैस मुहैया कराई गई थी। लेकिन यह स्‍कीम अब खत्‍म होने वाली है।
     
    दोबारा से सब्सिडी दे सरकार
     
    उधर, एसोसिएशन ऑफ पावर प्रोड्यूसर का कहना है कि सरकार को यह स्‍कीम फिर से बढ़ानी चाहिए, क्‍योंकि करोड़ों रुपया इन्‍वेस्‍ट करने के बाद भी गैस न मिलने के कारण प्राइवेट सेक्‍टर के कई प्‍लांट्स ठप पड़े हैं, इससे जहां उनका नुकसान हो रहा है, वहीं आने वाले दिनों में कई राज्‍यों को बिजली संकट का सामना करना पड़ सकता है।
     
    अब नहीं लगेंगे पावर प्‍लांट
     
    देश में नेचुरल गैस की कमी के चलते अब गैस बेस्‍ड पावर प्‍लांट नहीं बनेंगे। सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (सीईए) ने साल 2017-22 के लिए तैयार किए गए नेशनल इलेक्ट्रिसिटी प्‍लान में कहा है कि गैस से चलने वाले वे प्‍लांट जो कमीशन होने हैं या अंडर कंस्‍ट्रक्‍शन हैं, को छोड़कर नए प्‍लांट नहीं लगाए जाएंगे। हालांकि सीइए का कहना है कि गैस से चलने वाले ज्‍यादा इफिशन्‍ट होते हैं, इसलिए गैस उपलब्‍ध होने पर पहले इन प्‍लांट को प्राइऑरटी दी जाएगी। 

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