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दुनिया के पांच देश भारत में बना रहे हैं बिग इन इंडिया, इस सूची में चीन नहीं है शामिल

मेक इन इंडिया में सबसे अहम भागीदारी अमेरिका की, जापान और जर्मनी भी कम नहीं

Five Indians in the world are making big in India, China is not included in this list
  • मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी प्रोडक्ट हमारी जिंदगी के अहम हिस्सा बन चुके हैं।
  • भारत में बिग इन इंडिया करने में यूएई भी पीछे नहीं है।
  • सॉफ्ट बैंक भारत की कई बड़ी स्टार्ट अप्स कंपनियों को लोन दे चुका है।

नई दिल्ली. (सौरभ कुमार वर्मा)

मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत दुनिया के पांच देश भारत में अहम भूमिका निभा रहे हैं। तभी तो वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की तरफ से इन पांच देशों के लिए कहा गया है कि कंट्रीज डैट आर मेकिंग बिग इन इंडिया। इन पांच देशों में हमारा कोई भी पड़ोसी मुल्क नहीं है। भारत में भारी मात्रा में सामान आयात करने वाला चीन तो इस सूची में दूर-दूर तक नहीं है। मनी भास्कर को प्राप्त मंत्रालय की तरफ से जारी रिपोर्ट के मुताबिक इन पांच देशों में सबसे पहला नाम अमेरिका का है।

 

कैसे छा रहा है अमेरिका भारतीयों की जिंदगी में

मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी प्रोडक्ट हमारी जिंदगी के अहम हिस्सा बन चुके हैं। चाहे वह मैकडोनल्ड का बर्गर हो या कोका कोला हो या फिर फोर्ड कार। अमेरिका कंपनियां मैन्यूफैक्चरिंग से लेकर सर्विस सेक्टर तक में अहम भूमिका निभा रहे हैं। आईटी क्षेत्र में भी अमेरिका भारत के महत्वपूर्ण बन चुका है जो भारत के टैलेंट को चांस देता है। इन कंपनियं में सिस्को, माइक्रोसॉफ्ट, अमेरिकन एक्सप्रेस जैसी कंपनियां शामिल हैं। भारत में 20 आईटी कंपनियां काम कर रही हैं, इनमें से 9 कंपनियां अमेरिका की है। अमरेिका ईयू के भारत का दूसरा सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर बन चुका है।


जापान का जादू भी चल रहा है भारत में

भारत को अपना खास दोस्त मानने वाला जापान इलेक्ट्रॉनिक्स एवं ऑटोमोबाइल्स के कारोबार के लिए भारत में प्रवेश किया था, लेकिन देखते-देखते जापान भारत के कई कारोबार में छा गया। अब तो स्टार्टअप्स को सबसे अधिक लोन देने का काम जापानी बैंक सॉफ्ट बैंक कर रहा है। सॉफ्ट बैंक भारत की कई बड़ी स्टार्ट अप्स कंपनियों को लोन दे चुका है। मनी भास्कर को प्राप्त वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले एक साल में जापान ने भारत के विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों में 4.7 अरब डॉलर का निवेश किया है। भारत में पंजीकृत जापानी कंपनियों की संख्या सुनकर आप हैरत में पड़ जाएंगे। मनी भास्कर को प्राप्त मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक भारत में 1305 जापानी कंपनियां रजिस्टर्ड हैं। होंडा, टोयटा एवं मित्सुबिशी जैसी प्रमुख कंपनियों के कारोबार के साथ जापान अब भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में अहम योगदान दे रहा है। जापान दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के साथ मेट्रो रेल एवं मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन के विकास में अहम भूमिका निभा रहा है।  


यूनाइटेड अरब अमीरात (यूएई) भी पीछे नहीं

भारत में बिग इन इंडिया करने में यूएई भी पीछे नहीं है। मनी भास्कर को वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की तरफ से प्राप्त जानकारी के मुताबिक तेल के कारोबार के साथ पिछले दो वित्त वर्ष 2016-17 एवं 2017-18 में यूएई ने भारत में 114.4 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश किया है। हाल ही में अबू धाबी इंवेस्टमेंट ऑथरिटी ने भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में एक अरब डॉलर निवेश करने का फैसला किया है।

 

जर्मनी का भी जलवा

भारत में बिग इन इंडिया करने में जर्मनी भी पीछे नहीं है। भारत एवं जर्मनी का कारोबारी रिश्ता 16वीं शताब्दी है। क्रूप्प एजी एंड डेमग एवं बॉश जैसी कंपनियों का भारत के मैन्यूफैक्चरिंग से काफी पुराना रिश्ता है। वर्तमान में भारत में 1600 से अधिक जर्मन कंपनियां और 600 से अधिक इंडो-जर्मन ज्वाइंट वेंचर संचालन में हैं। बड़े नामों में बीएमडब्ल्यू, फॉक्सवैगन, सैप, सिमंस एजी एवं मर्क शामिल हैं।


स्वीडन

भारत की आजादी से पहले ही स्वीडन की कंपनियां देश में आ चुकी थीं। एरिक्सन, एबीबी जैसी कंपनियां बीसवीं सदी के आरंभ में ही भारत में प्रवेश कर गई थी। धीरे-धीरे स्वीडन की कंपनियों की संख्या बढ़ती गई और एटल्स कोपको, सैंडविक, अल्फा लवल, वोल्वो, सैब, स्कानिया जैसी कंपनियों में भारत में अपनी अलग पहचान बनाई जो भारत के मेकिंग इन इंडिया में निवेश कर रही है। भारत की स्मार्ट सिटी के विकास में स्वीडन अहम भूमिका निभा रहा है।

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