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इंफ्रा में PPP मॉडल को और मजबूत बनाने की तैयारी, केलकर समिति ने सौंपी रिपोर्ट

Economy Team

Dec 28,2015 04:27:00 PM IST
नई दिल्‍ली। इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर सेक्‍टर को बूस्‍ट देने के लिए सरकार पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल में नए सिरे से जान फूंक सकती है। इंफ्रा से जुड़े मामलों के हल के लिए पूर्व फाइनेंस सेक्रेटरी और इकोनॉमिस्‍ट विजय केलकर के नेतृत्‍व में गठित इस समिति ने वित्‍त मंत्री को सोमवार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी। समिति ने इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर सेक्‍टर में ‘पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल’ से जुड़ी समस्‍याओं को दूर करने के साथ इसे बेहतर बनाने से जुड़े सुझाव दिए हैं।
रेग्‍युलेटर बनाने की सिफारिश
केलकर समिति ने सड़क सेक्‍टर से जुड़े विवादों के हल के लिए एक स्‍वतंत्र इकाई की स्‍थापना की सिफारिश की है। समिति ने कहा है कि इन्‍फ्रा प्रोजेक्‍ट की कॉस्‍ट बढ़ जाने और पेमेंट में देरी जैसी समस्‍याओं के उचित सोल्‍यूशन के लिए इस तरह की इकाई जरूरी है।
इकाई का स्‍वतंत्र चेयरमैन होगा
रिपोर्ट में कहा गया है कि सभी लंबित विवादों का निपटारा इस स्‍वतंत्र इकाई के जरिए समयबद्ध तरीके से किया जा सकता है। इसमें नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया, डेवलपर्स और लेंडर्स के प्रतिनिधि और एक स्‍वतंत्र चेयरमैन होंगे।
बिल्‍ड-ऑपरेट-ट्रांसफर टोल प्रोजेक्‍ट्स पर सलाह
रिपोर्ट में कहा गया है कि बिल्‍ड-ऑपरेट-ट्रांसफर टोल प्रोजेक्‍ट्स के मामले में एनएचएआई को ऐसे प्रोजेक्‍ट पर फोकस करना चाहिए, जिन्‍हें दीर्घकालीन छूट मिली हुई होती है। ऐसे प्रोजेक्‍ट में एनएचएआई और कॉन्‍ट्रैक्‍टर रेवेन्‍यू शेयरिंग के ऑप्‍शन पर विचार कर सकते हैं।
वायबिलिटी गैप फंडिंग का सुझाव
समिति ने उन प्रोजेक्‍ट के लिए ‘वायबिलिटी गैप फंडिंग’ का सुझाव दिया है, जो ट्रैफिक या काफी अधिक कैपिटल कॉस्‍ट हो जाने से जुड़े मामलों के कारण बीओटी बेसिस पर चलाने योग्‍य नहीं रह जाते हैं। समिति ने प्रोजेक्‍ट डेवलपर्स को इलेक्‍ट्रॉनिक टोलिंग लगाने का भी सुझाव दिया है।
दूसरी स्‍लाइड में जानें रेलवे में पीपीपी प्रोजेक्‍ट्स से जुड़े समिति के क्‍या हैं सुझाव...
रेलवे को टिकाऊ और प्रभावी पीपीपी प्रोजेक्ट्स की जरूरत समिति ने रेलवे में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) को बढ़ावा देने के लिए एक स्वतंत्र रेग्युलेटर के गठन की सिफारिश की है। समिति ने कहा है कि मार्केट क्रेडिबिलिटी बनाए रखने के लिए इंडियन रेलवे को टिकाऊ और प्रभावी पीपीपी प्रोजेक्ट्स की जरूरत है। 10 सदस्यों वाली समिति ने अपनी रिपोर्ट में रेलवे, पॉवर, रोड्स, पोर्ट्स और एयरपोर्ट्स सेक्टर से जुड़े सुझाव दिए हैं। दुनिया का सर्वश्रेष्ठ पीपीपी मॉडल विकसित करना चाहिए समिति ने स्टेशनों का ग्रीनफील्ड डेवलपमेंट और चुनिंदा ट्रैक्स के बेहतर रखरखाव और क्रियाकलापों के तरीके ढूंढने के सुझाव दिए हैं। पैनल ने कहा है कि दुनिया के विभिन्न देशों द्वारा रेलवे में पीपीपी के कई तरह के मॉडल अपनाए गए हैं। उन मॉडल की स्टडी करके भारत के लिए उपयुक्त मॉडल अपनाया जाना चाहिए। हालांकि, पैनल ने किसी देश के मॉडल की चर्चा नहीं की है। रेलवे सेक्टर में प्राइवेट इन्वेस्टमेंट पर बल गौरतलब है कि सरकार रेलवे सेक्टर में प्राइवेट इन्वेस्टमेंट बढ़ाने की कोशिश करती आ रही है। रेलवे मिनिस्ट्री ने इसके लिए अपने पीपीपी मॉडल्स में तब्दीली की है। मिनिस्ट्री पीपीपी प्रोजेक्ट को सफल बनाने के लिए प्रेरक माहौल बनाने की भी कोशिश कर रही है। इसके लिए सभी स्टेकहोल्डर्स और इन्वेस्टर्स से सलाह-मशविरा किया जा रहा है। पीपीपी प्रोजेक्ट में प्राइवेट सेक्टर का इन्वेस्टमेंट बढ़ाने पर जोर रिपोर्ट के अनुसार, सरकार का मकसद पीपीपी प्रोजेक्ट में प्राइवेट सेक्टर की दिलचस्पी और इन्वेस्टमेंट दोनों बढ़ाना है। रिपोर्ट में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ तौर-तरीके अपनाने और सभी पक्षों के हितों को ध्यान में रखते हुए वर्तमान पीपीपी मॉडल को बेहतर बनाने का सुझाव दिया गया है।
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