Home »Economy »Infrastructure» Operational Ratio Is Worst Of Railway Of Year 2016-17

रेलवे की सेहत पर चिदंबरम ने उठाए सवाल, 100 रुपए कमाने के लिए खर्च कर रहा है 96.9 रुपए

नई दिल्‍ली. पूर्व फाइनेंस मिनिस्‍टर पी. चिदंबरम ने रेलवे के ऑपरेशनल रेश्‍यो पर सवाल उठाते हुए कहा है कि इंडियन रेलवे की प्रॉब्लम और बढ़ती जा रही है। रेलवे को एक सरकारी विभाग की तरह नहीं चलाया जा सकता। उन्‍होंने कहा कि 2016-17 में रेलवे का ऑपरेशनल रेश्‍यो जिस स्‍तर पर है, उस स्‍तर पर 2000-01 में भी उसी स्‍तर पर था और दोनों सालों में देश में भाजपा की सरकार रही।
 
 
94.9 फीसदी का था अनुमान
 
पिछले दिनों रेल राज्‍य मंत्री राजेन गोहेन ने राज्‍यसभा में जानकारी दी थी कि रेलवे ने साल 2016-17 में 94.9 फीसदी का ऑपरेशनल रेश्‍यो का अनुमान लगाया है, लेकिन रिपोर्ट्स बताती हैं कि यह रेश्‍यो 96.9 फीसदी तक पहुंच गया। यह माना जाता है कि ऑपरेशनल रेश्‍यो जितना कम हो, उतनी ही संस्थान की फाइनेंशियल हेल्‍थ अच्‍छी है। ऑपरेशनल रेश्‍यो जितना अधिक होगा, उससे मतलब है कि कंपनी की फाइनेंशियल हेल्‍थ ठीक नहीं है। 
 
क्‍या है मामला?
 
सूत्रों के अनुसार, साल 2016-17 में इंडियन रेलवे का ऑपरेशनल रेश्‍यो 96.9 फीसदी रहा। ऑपरेशनल रेश्‍यो से आशय है कि रेलवे 96 रुपए 90 पैसे खर्च करके 100 रुपए कमाता है। ऐसी स्थिति को बुरा माना जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इससे पहले 2000-01 में  रेलवे का ऑपरेशनल रेश्‍यो 98 फीसदी था। चिदंबरम ने इस पर निशाना साधा है और कहा है कि दोनों समय में भाजपा की सरकार थी और रेलवे समस्‍या गहराती जा रही है।  
 
 

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