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7,738 MW के पुराने थर्मल पावर प्लांट्स को सुपर क्रिटिकल यूनिट में बदलेगी सरकार, दोगुनी होगी क्षमता

नई दिल्‍ली. केंद्र और राज्‍य सरकारों के अंतर्गत आने वाले करीब 7,738 मेगावाट के पुराने थर्मल प्‍लांट को सुपर क्रिटिकल प्‍लांट में बदला जाएगा। इसके बाद इन प्‍लांट्स की कुल क्षमता 18,560 मेगावाट बिजली उत्‍पादन की हो जाएगी। इस अपग्रेडेशन पर शुरुआती तौर पर 1.5 करोड़ रुपए प्रति मेगावाट का खर्च आएगा। नए पावर प्‍लांट एडवांस्‍ड टेक्‍नोलॉजी पर आधारित होंगे, जिनका पॉल्‍यूशन लेवल कम होगा। देश में 37 हजार मेगावाट से ज्‍यादा क्षमता वाले कोयला आधारित थर्मल पावर प्‍लांट्स 25 साल से पुराने हैं।
 
प्राकृतिक संसाधनों की कम होगी खपत
ऊर्जा मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार नए सुपर क्रिटिकल थर्मल प्‍लांट आधुनिक तकनीक से बनाए जाएंगे। इन प्‍लांट्स प्राकृतिक संसाधन जैसे पानी, कोयला, भूमि आदि की कम खपत होगी। इनकी क्षमता बढ़ाई जाएगी जिससे अनुमान है कि 18560 मेगावाट बिजली उत्‍पादन किया जा सकेगा। उदाहरण के तौर पर अधिकारी ने बताया कि हरियाणा पावर जनरेशन कॉर्पोरेशन का पानीपत स्थित प्‍लांट की क्षमता फिलहाल 440 मेगावाट बिजली उत्‍पादन की है। इस प्‍लांट को अब लगभग दोगुनी क्षमता 800 मेगावट के सुपर क्रिटिकल प्‍लांट से बदला जाएगा। ये सभी प्रदूषण कम करने संबंधी नए दिशानिर्देशों के तहत किया जाएगा।
 
राज्‍य सरकारों की हैं ज्‍यादातर परियोजनाएं
मंत्रालय के अनुसार इस योजना में ज्‍यादातर प्‍लांट राज्‍य सरकारों के अंतर्गत आने वाले हैं। इनकी कुल क्षमता 6,608 मेगावट बिजली उत्‍पादन की है। इनके स्‍थान पर कुल 16580 मेगावाट बिजली उत्‍पादन करने में सक्षम प्‍लांट को लगाया जाएगा। इसके अलावा केंद्र सरकार के अंतर्गत आने वाले 1,130 मेगावाट के थर्मल पावर प्‍लांट हैं जिनको 1980 मेगावाट के प्‍लांट से बदला जाएगा।  
 
कितने पुराने हैं थर्मल पावर प्‍लांट
ऊर्जा मंत्रालय ने हाल ही में देश के सभी थर्मल पावर प्‍लांट्स का जायजा लिया है। मंत्रालय के अनुसार 31 मार्च 2016 तक देश में लगभग 37453 मेगावाट क्षमता के कोयला आधारित पावर प्‍लांट्स 25 साल पुराने हैं। इनमें 35509 मेगावाट के सरकारी और 1947 मेगावाट के प्राइवेट सेक्‍टर के पावर प्‍लांट्स हैं। अधिकारियों के अनुसार इस बदलाव पर शुरुआती तौर पर 1.5 करोड़ रुपए प्रति मेगावाट का खर्च आएगा। 
 

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