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    बजट 2017 में रेलवे को घाटे से उबारने को कोई रोड मैप नहीं: आचार्य

    बजट 2017 में रेलवे को घाटे से उबारने को कोई रोड मैप नहीं: आचार्य
    नई दिल्ली। बजट 2017-18 में रेलवे के लिए कैपिटल एंड डेवलपमेंट, सेफ्टी और स्वच्छ रेलवे को लेकर बड़े एलान किए गए हैं, लेकिन इसमें रेलवे को घाटे से उबारने का कोई मॉडल नहीं बताया गया है। रेलवे बोर्ड के पूर्व मेंबर राम चंद्र आचार्य का कहना है कि रेलवे लगातार घाटे में चल रही है। वहीं, रेल किराया और माल भाड़ा किराया न बढ़ने से यह घटा और बढ़ता जाएगा।
     
    रेल किराए और माल-भाड़ा बढ़ाने की जरूरत
    आचार्य ने बताया कि रेलवे को 100 रुपए की आय के लिए उससे भी ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है, लेकिन रेलवे ने अपने फाइनेंशियल मॉडल में बदलाव नहीं किया। इस बार उम्मीद थी कि घाटे में चल रही रेलवे को उबारने के लिए रेलवे किराया बढ़ाया जा सकता है। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वहीं मालभाड़ा किराया भी बढ़ाने से यह डर था कि यह बिजनेस और कमजोर होगा। उन्होंने कहा कि अगर रेलवे को घाटे से उबारना है तो यह मॉडल चेंज करना होगा।
     
    पर्याप्त है कैपिटल एक्सपेंडिचर
     
    कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिए इस बजट में अब तक के हर बजट से ज्यादा 1.3 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है। आचार्य ने बताया कि अगर यह पैसा रेलवे को उबारने पर खर्च किया गया तो पर्याप्त होगा। उन्होंने बताया कि एलआईसी जैसी सरकारी कंपनियों से रेलवे पहले ही पैसे उधार लेने की बात कह चुकी है। ऐसे में यह फंड जुटाना भी आसान होगा। इन पैसों को अगर ट्रैक कैपेसिटी बढ़ाने और मेंटिनेंस पर सही से खर्च किया जाए तो गुड्स ट्रेनों की कैपेसिटी बढ़ेगी, जिससे रेवेन्यू भी बढ़ेगा। हालांकि, यह ध्‍यान भी रखना होगा कि रेलवे को यह पैसा लौटाना भी पड़ेगा।
     
    ट्रेनें न बढ़ाना अच्छा फैसला
    आचार्य का कहना है कि इस बजट में जो बात सबसे अच्छी है, वह है नई ट्रेनों की घोषणा नहीं की गई है। वहीं, 3500 किलोमीटर ट्रैक कैपेसिटी बढ़ाया जाएगा। उन्होंने बताया कि पिछले 15 सालों में 5 से 6 हजार नई ट्रेनों चलाने की घोषणा कर दी गई। इसकी वजह से पूरा सिस्टम चरमरा गया। यही वजह है कि र्टेक के डबलिंग, ट्रिपलिंग पर बड़े फंड की जरूरत पड़ रही है।
     
    पीपीपी मॉडल पर फंस सकता है पेंच
    आचार्य ने रेलवे में पीपीपी मॉडल के विस्तार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जो कंपनियां रेलवे स्टेशनों का रीडेवलपमेंट करेंगी या नई बिल्डिंग बनाएंगी, वे कंपनियां रेवेन्यू पर भी कंट्रोल करना चाहेंगी। वहीं, रेलवे भी रेवेन्यू बए़ाने के लिए इस पर कंट्रोल करना चाहेगा। ऐसे में इस मामले पर पेंच फंस सकता है और नॉन-फेयर रेवेन्यू बए़ाने का प्लान फेल हो सकता है। 

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