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विंड पावर होगी और सस्‍ती, कंपनियों के बीच बिडिंग कराएगी सरकार

सरकार ने कंपनियों के लिए कॉम्पिटीटिव बिडिंग प्रोसेस शुरू करने का निर्णय लिया है।

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नई दिल्‍ली। लोगों को सस्‍ती विंड पावर उपलब्‍ध कराने के लिए सरकार ने कंपनियों के लिए कॉम्पिटीटिव बिडिंग प्रोसेस शुरू करने का निर्णय लिया है। मिनिस्‍ट्री ऑफ न्‍यू एंड रिन्‍यूएबल एनर्जी (एमएनआरई) ने इसके लिए गाइडलाइंस भी जारी कर दी हैं।

 

क्‍या होगा अब

अब डिस्‍कॉम्‍स को स्‍टेट इलेक्ट्रिसिटी रेग्‍युलेटरी कमीशन (एसईआरसी) द्वारा निर्धारित रेट से विंड पावर नहीं खरीदनी होगी, बल्कि विंड पावर जनरेटर्स द्वारा आयोजित बिडिंग प्रोसेस में हिस्‍सा लेना होगा। मिनिस्‍ट्री का दावा है कि इससे विंड पावर के प्रोक्‍योरमेंट में ट्रांसपेरेंसी आएगी और डिस्‍कॉम्‍स कॉस्‍ट इफेक्टिव तरीके से विंड पावर खरीदेंगे।

 

क्‍या है दिक्‍कत

दरअसल, अभी स्‍टेट रेग्‍युलेटरी कमीशन द्वारा रिन्‍यूएबल परचेज ऑब्लिगेशन (आरपीओ) के तहत डिस्‍कॉम्‍स को बाध्‍य किया जाता है कि वे साल में कम से कम कितनी रिन्‍यूएबल एनर्जी खरीदेंगे। इसमें सोलर, विंड और बायो मास का अलग अलग निर्धारण किया जाता है। विंड पावर जनरेटर्स की शिकायत है कि डिस्‍कॉम्‍स आरपीओ का पालन नहीं कर रही हैं और विंड पावर नहीं खरीदी जा रही है। जबकि डिस्‍कॉम्‍स का कहना है कि एसईआरसी द्वारा निर्धारित टैरिफ अधिक होने के कारण वे विंड पावर नहीं खरीद रहे हैं। यही वजह है कि अब सरकार की मंशा है कि टैरिफ की लड़ाई जनरेटर और डिस्‍कॉम्‍स के बीच छोड़ दी जाए। यही वजह है कि बिड प्रोसेस शुरू की जा रही है।

 

टैरिफ पॉलिसी का है हिस्‍सा

28 जनवरी 2016 को नेशनल टैरिफ पॉलिसी लागू की गई थी। टैरिफ पॉलिसी में यह प्रावधान किया गया था कि टैरिफ को घटाने और रिन्‍यूएबल एनर्जी की खरीद को प्रमोट करने के लिए कॉम्पिटीटिव बिडिंग का सहारा लिया जाएगा।

 

क्‍या है टारगेट

केंद्र सरकार का टारगेट है कि साल 2022 तक 1 लाख 70 हजार मेगावाट रिन्‍यूएबल एनर्जी का जनरेशन किया जाए। इसमें सोलर का हिस्‍सा 1 लाख मेगावाट और विंड पावर का टारगेट 60 लाख मेगावाट है। सरकार ने टारगेट को हासिल कर विंड एनर्जी का प्रमोट करने के लिए कई कदम उठाए हैं।

 

क्‍या है स्‍कोप

नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ विंड एनर्जी का अनुमान है कि देश में ग्राउंड से 100 मीटर के लेवल पर विंड से लगभग 3 लाख 2 हजार मेगावाट बिजली पैदा की जा सकती है। सात विंडी स्‍टेट जिसमें आंध्रप्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, मध्‍यप्रदेश, महाराष्‍ट्र, राजस्‍थान और तमिलनाडु शामिल हैं में यह बिजली पैदा हो सकती है।

 

कितनी जनरेट हो रही है विंड पावर

90 के दशक में ही भारत में विंड पावर का जनरेशन शुरू हो गया था। हालांकि पहले कुछ सालों में इसकी कैपेसिटी काफी कम थी, लेकिन धीरे-धीरे केंद्र और राज्‍य सरकारों द्वारा पर्यावरण के अनुकूल देखते हुए विंड पावर के जनरेशन का फोकस बढ़ाया गया। यही वजह है कि इन दिनों में भारत के अलग-अलग राज्‍यों में लगभग 32 हजार 700 मेगावाट विंड पावर जनरेट की जा रही है और भारत, चीन, अमेरिका और जर्मनी के बाद सबसे अधिक विंड पावर जनरेट कर रहा है।

 

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