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ईस्‍टर्न की तरह वेस्‍टर्न पेरिफेरल एक्‍सप्रेस-वे को अच्‍छे दिन का इंतजार, डेडलाइन से 9 साल पीछे

वेस्‍टर्न पेरिफेरल एक्‍सप्रेस-वे को अब भी उद्घाटन का इंतजार है

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नई दिल्‍ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ईस्‍टर्न पेरिफेरल एक्‍सप्रेस-वे का उद्धाटन कर दिया, लेकिन वेस्‍टर्न पेरिफेरल एक्‍सप्रेस-वे को अब भी उद्घाटन का इंतजार है। वेस्‍टर्न एक्‍सप्रेस-वे को साल 2009 में तैयार हो जाना चाहिए था, लेकिन नौ साल बाद भी यह एक्‍सप्रेस-वे तैयार         नहीं हो पाया। दिलचस्‍प बात यह है कि मोदी सरकार ने भी नए सिरे से इस प्रोजेक्‍ट की डेडलाइन तय की थी, लेकिन यह डेडलाइन भी मिस हो गई। अब सरकार ने वेस्‍टर्न पेरिफेरल एक्‍सप्रेस-वे की नई डेडलाइन 30 जून 2018 तय की है। देखना यह है कि इस डेडलाइन तक वेस्‍टर्न पेरिफेरल एक्‍सप्रेस-वे के अच्‍छे दिन आते हैं या नहीं। तब ही, सुप्रीम कोर्ट द्वारा राजधानी दिल्‍ली के चारों ओर एक्‍सप्रेस-वे बनाने का आदेश पूरी तरह लागू हो पाएगा। 

 

क्‍या है वेस्‍टर्न पेरिफेरल एक्‍सप्रेस-वे? 
सुप्रीम कोर्ट ने साल 2005 में राजधानी दिल्‍ली में ट्रैफिक का बोझ कम करने के लिए चारों ओर एक एक्‍सप्रेस-वे बनाने के निर्देश दिए थे। उस समय सरकार ने इसे दो हिस्‍सों में बांट दिया। एक, कुंडली (सोनीपत)-मानेसर (गुड़गांव)-पलवल और दूसरा पलवल-गाजियाबाद-कोंडली। कोंडली-मानेसर-पलवल को वेस्‍टर्न पेरिफेरल एक्‍सप्रेस-वे और पलवल-गाजियाबाद-कोंडली को ईस्‍टर्न पेरिफेरल एक्‍सप्रेस-वे। पहले वेस्‍टर्न पेरिफेरल एक्‍सप्रेस-वे का काम शुरू किया गया। यह काम हरियाणा सरकार ने हरियाणा स्‍टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड को सौंपा और 2006 में केएमपी एक्‍सप्रेस-वे लिमिटेड को कॉन्‍ट्रेक्‍ट दिया गया और 2009 में प्रोजेक्‍ट कंपलीशन का डेडलाइन तय की गई। 

 

मोदी सरकार ने क्‍या किया?  
सत्‍ता में आने के बाद मोदी सरकार ने दोनों पेरिफेरल एक्‍सप्रेस-वे को तय समय पर पूरा करने की ठानी और मार्च 2015 में पुराना कॉन्‍ट्रेक्‍ट कैंसिल कर दिया गया और नए सिरे से प्रोजेक्‍ट की तैयारी शुरू की गई। जुलाई 2015 में मानेसर से पलवल का काम एक प्राइवेट ज्‍वाइंट वेंचर कंपनी को सौंपा गया और बाकी काम एस्‍सेल ग्रुप को सौंपा गया। जिसकी प्रोजेक्‍ट कॉस्‍ट 1863 करोड़ रुपए है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवंबर 2015 में कुंडली मानेसर पार्ट का शिलान्‍यास किया।

 

400 दिन में पूरा करने का वादा 

अप्रैल 2016 में पलवल से मानेसर का काम पूरा कर दिया गया,जिस पर लगभग 457.81 करोड़ रुपए का खर्च आया।  रोड एंड ट्रांसपोर्ट मिनिस्‍टर नितिन गडकरी ने उसका उद्घाटन किया। उस दिन गडकरी ने घोषणा की कि मानेसर से कोंडली का काम 400 दिन में पूरा कर दिया जाएगा और पूरा वेस्‍टर्न पेरिफेरल एक्‍सप्रेस-वे पर चालू हो जाएगा। 

 

फिर बदली डेडलाइन पर डेडलाइन 
गडकरी की घोषणा के मुताबिक, पेरफिरेल एक्‍सप्रेस-वे का काम अक्‍टूबर 2017 तक पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन उसके बाद जून 2017 में हरियाणा सरकार की ओर से कहा गया कि काम दिसंबर 2017 तक पूरा हो जाएगा। एक और डेडलाइन दिसंबर में आई, जिसमें कहा गया कि 31 मार्च 2018 तक काम पूरा हो जाएगा, लेकिन अब कहा जा रहा है कि जून 2018 तक काम पूरा होगा। 

 

क्‍या है दिक्‍कत? 
इंडियन फाउंडेशन ऑफ ट्रांसपोर्ट रिसर्च के सीनियर फेलो एसपी सिंह ने मनीभास्‍कर से कहा कि लैंड एक्विजिशन की वजह से यह प्रोजेक्‍ट डिले होता चला गया। अब भी जगह-जगह काम रुका हुआ है। इसी से सबक लेते हुए मोदी सरकार ने जब ईस्‍टर्न पेरिफेरल एक्‍सप्रेस-वे का काम शुरू किया तो लैंड एक्विजिशन की दिक्‍कत नहीं आने दी। यही वजह है कि यह प्रोजेक्‍ट मात्र 500 दिन में पूरा हो गया। उनके मुताबिक, वेस्‍टर्न पेरिफेरल एक्‍सप्रेस-वे में हरियाणा की हिस्‍सेदारी होने की वजह से भी काम में दिक्‍कतें हो रही हैं। 

 

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कहां अटका है प्रोजेक्‍ट?  
हरियाणा स्‍टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के एक अधिकारी ने बताया कि अभी फरूखनगर के पास रेलवे द्वारा बनाए जाने वाला ओवरब्रिज का काम रुका हुआ है। इसके अलावा कई फ्लाईआवेर का काम भी पूरा नहीं हुआ है, जिसमें पटौदी के पास बनने वाला फ्लाईओवर भी शामिल है। गुरुग्राम रेवाड़ी रेल लाइन पर भी एक आरओबी बनना है। इसी तरह मानेसर, पटौदी, झज्‍जर के पास काम चल रहा है। 

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