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Budget 2018: सोलर सेक्टर में चाइनीज कंपनियों का रोल होगा कम, महंगी हो सकती है बिजली

फाइनेंस मिनिस्‍टर अरुण जेटली ने डोमेस्टिक इंडस्‍ट्री को खुश करने के लिए कई चीजों पर कस्‍टम ड्यूटी बढ़ा दी है।

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नई दिल्‍ली। फाइनेंस मिनिस्‍टर अरुण जेटली ने डोमेस्टिक इंडस्‍ट्री को खुश करने के लिए कई चीजों पर कस्‍टम ड्यूटी बढ़ा दी है। खासकर पावर सेक्‍टर के इक्‍वीपमेंट्स का इंपोर्ट रोकने के लिए कस्‍टम ड्यूटी पर 10 फीसदी का सरचार्ज लगा दिया गया है। इससे डोमेस्टिक इंडस्‍ट्री तो खुश है, लेकिन सोलर पावर जनरेशन से जुड़ी इंडस्ट्री  पर फिलहाल यह सरचार्ज भारी पड़ सकता है। इंडस्‍ट्री का मानना है कि इससे सोलर पावर के सस्‍ते होने का दौर खत्‍म हो जाएगा और सोलर पावर की कीमतें बढ़ सकती हैं। 

कस्‍टम ड्यूटी पर सरचार्ज

सोलर पावर इंडस्‍ट्री में इस्‍तेमाल हो रहा सोलर पावर पैनल इम्‍पोर्टेड है। लगभग 80 फीसदी सोलर पावर इंडस्‍ट्री में इंपोर्टेड कंटेंट इस्‍तेमाल हो रहा है। इनके इम्‍पोर्ट पर 7.5 फीसदी कस्‍टम ड्यूटी लग रहा है, अब 10 फीसदी सरचार्ज लगने से इसका असर सोलर पावर के रेट पर दिखाई देगा।

1 से 2 रुपए यूनिट बढ़ सकता है रेट
इंडियन इलेक्ट्रि‍कल एंड इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स मैन्‍युफैक्‍चरर्स एसोसिएशन के डायरेक्‍टर जनरल सुनील मिश्रा ने कहा कि कई आयटम्‍स पर कस्‍टम ड्यटी बढ़ा कर डोमेस्टिक इलेक्‍ट्रिक इंडस्‍ट्री को बूस्‍ट मिलेगा। वहीं सोलर पावर प्रोड्यूसर एसोसिएशन (एसपीडीए) का कहना है कि सोलर पावर सेक्‍टर में डोमेस्टिक मैन्‍युफैक्‍चरिंग कैपेसिटी काफी कम है, इसलिए फिलहाल इंपोर्ट ड्यूटी पर सरचार्ज का असर दिखेगा और सोलर पावर 1 से 2 रुपए प्रति यूनिट तक पहुंच सकता है। हालांकि अब सरकार को डोमेस्टिक इंडस्‍ट्री की कैपेसिटी बढ़ाने के लिए जरूरी कदम उठाने चाहिए।

2.44 रुपए तक पहुंच चुका है रेट

मोदी सरकार द्वारा सोलर पावर का टारगेट पांच गुणा बढ़ाने के बाद से ही देश ही नहीं, बल्कि दूसरे देशों की नजर भारत पर है। दुनिया की लगभग सभी बड़ी कंपनियां भारत में सोलर प्‍लांट लगाने के लिए आगे आए हैं। साथ ही, कॉम्पिटीशन बढ़ने के कारण सोलर पावर लगातार सस्‍ती हो रही है। पिछले दिनों हुई एक बिडिंग में सोलर पावर का टैरिफ 2.44 रुपए प्रति यूनिट तक पहुंच गया था, जो थर्मल पावर से बहुत कम है। लेकिन भारत में मैन्‍युफैक्‍चरिंग कैपेसिटी डेवलप नहीं हो पाई, जिसका फायदा चीन की कंपनियों ने

उठाया और देखते ही देखते देश में सोलर पैनल मार्केट पर चीनी कंपनियों का 80 फीसदी तक हिस्‍सा हो गया। जिस वजह से अब सरकार को कस्‍टम और सरचार्ज लगाना पड़ रहा है।  

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