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दिल्ली-एनसीआर में भूकंप के तेज झटके, अफगानि‍स्‍तान है केंद्र

दिल्ली और एनसीआर के इलाके में बुधवार दोपहर को भूकंप के तेज़ झटके महसूस किए गए हैं।

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नई दि‍ल्‍ली. दिल्ली और एनसीआर के इलाके में बुधवार दोपहर को भूकंप के तेज़ झटके महसूस किए गए हैं। इसके अलावा पाकिस्तान के कई हिस्सों में भी झटके महसूस किए गए। जानकारी के अनुसार, भूकंप का केंद्र अफगानि‍स्‍तान के काबूल से 27 कि‍लोमीटर दूर बताया जा रहा है। वहीं, रि‍क्‍टर स्‍केल पर भूकंप की तीव्रता 6.1 बताई जा रही है। 
फि‍लहाल नुकसान की कोई खबर नहीं आई है। हालांकि भूकंप के झटके तेज होने के चलते दि‍ल्‍ली एनसीआर में भी लोग अपने घरों और ऑफि‍स से बाहर निकल आए। 

 

इसका असर जम्मू-कश्मीर, दिल्ली-एनसीआर और पंजाब में दिखा। श्रीनगर में ये झटके 15 से 20 सेकंड तक रहे। दिल्ली-एनसीआर में इसका असर कम रहा। हालांकि, अभी तक इस बात का पता नहीं चल पाया है कि भारत में ये झटके कितनी तीव्रता के थे। भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान था। पाकिस्तान में एक शख्स की मौत हो गई। 

 

कब आया भूकंप 
-भूकंप करीब दोपहर 12:40 बजे आया। भारत में अभी तक किसी भी तरह के नुकसान की खबर नहीं है। 

 

कहां था केंद्र ? 
- इसका केंद्र अफगानिस्तान का हिंदुकुश इलाका था। यहां भूकंप की तीव्रता 6.2 थी। यूरोपियन मेडिटेरेनियन सिसमोलॉजिकल सेंटर ने बताया कि भूकंप हिंदुकुश में 182 किमी जमीन के अंदर आया। 
- एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यही वजह रही कि इस भूकंप का असर दिल्ली तक महसूस किया गया। 


कहां- कहां हुआ इसका असर? 
- अफगानिस्तान, पाकिस्तान और भारत। 
- पाकिस्तान के इस्लामाबाद, पेशावर और लाहौर में भी इसका असर दिखा। पाकिस्तान मीडिया के मुताबिक, बलूचिस्तान के लासबेला में एक शख्स की मौत गई और कई लोग जख्मी हो गए। 


क्यों आता है भूकंप?
- पृथ्वी के अंदर 7 प्लेट्स हैं जो लगातार घूम रही हैं। जहां ये प्लेट्स ज्यादा टकराती हैं, वह जोन फॉल्ट लाइन कहलाता है। बार-बार टकराने से प्लेट्स के कोने मुड़ते हैं। जब ज्यादा दबाव बनता है तो प्लेट्स टूटने लगती हैं। नीचे की एनर्जी बाहर आने का रास्ता खोजती है। डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है।

 

भारत और आसपास के देशों में भूकंप आने की क्या है वजह?
- हिमालयन बेल्ट की फॉल्ट लाइन के कारण एशियाई इलाके में ज्यादा भूकंप आते हैं। इसी बेल्ट में हिंदूकुश रीजन भी आता है। 2015 के अप्रैल-मई में नेपाल में आए भूकंप के कारण करीब 8 हजार लोगों की मौत हुई थी। 

 

हिमालय कुछ सेंटीमीटर की दर से उत्तर में खिसक रहा है
- हिमालयन फॉल्ट लाइन पर भारत सरकार की मदद से अमेरिकी वैज्ञानिकों ने एक स्टडी की थी। यह स्टडी यूएस जर्नल लिथोस्फीयर और जेजीआर में छपी थी। इस स्टडी को लीड कर चुके जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च के सी.पी. राजेंद्रन के मुताबिक, हिमालय 700 साल पुरानी फॉल्ट लाइन पर मौजूद है। यह फॉल्ट लाइन ऐसे मुहाने पर पहुंच चुकी है, जिसकी वजह से कभी भी वहां ऐसा भूकंप आ सकता है जो पिछले 500 साल में नहीं देखा गया हो।

 

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