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2000 रुपए की 'मधुमक्‍खी' से डर गए हाथी, रेलवे का यह प्‍लान कर गया काम

हाथियों ने कर रखा था रेलवे की नाक में दम, प्लान bee रहा सफल

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नई दिल्‍ली. रेलवे ट्रैक पर हाथियों के आने से अकसर आपने दुर्घटनाओं की खबरें सुनी होंगी, लेकिन पिछले कुछ दिनों से यह दुर्घटनाएं नहीं हो रही हैं। इसका श्रेय रेलवे के प्‍लान bee को जाता है। इस प्‍लान के तहत रेलवे ने 2000 रुपए की 'मधुमक्‍खी' खरीदी और इस 'मधुमक्‍खी' की आवाज सुनकर हाथी ट्रैक पर नहीं आते, जिस वजह से दुर्घटनाएं नहीं होती।

 

क्‍या है यह 'मधुमक्‍खी'

प्‍लान बी के तहत रेलवे ने डिवाइस खरीदी हैं। ये डिवाइस रेलवे पटरियों के पास ऐसी जगहों पर लगाई गई हैं, जिनसे मधुमक्खियों के जैसी आवाज आती है। यह आवाज इतनी तीखी होती है कि हाथी रेलवे पटरियों की ओर नहीं आते।

 

क्‍या है कीमत

रेलवे मिनिस्‍टर पीयूष गोयल ने शुक्रवार को अपने ट्विटर अकाउंट पर इस प्‍लान बी की जानकारी दी। उन्‍होंने एक वीडियो भी शेयर किया है। इस वीडियो में बताया गया है कि इस डिवाइस की कीमत 2000 रुपए है।

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कहां तक करती है मार

वीडियो के मुताबिक, इस डिवाइस से निकलने वाली आवाज 600 मीटर दूर तक जाती है। इस तरह हाथी जैसे ही पटरियों की ओर रुख करते हैं तो आवाज सुनकर वे उल्‍टे पांव वापस हो जाते हैं।

 

न ट्रेन रुकेगी न हाथी घायल होंगे

गोयल ने अपने ट्विट में कहा है कि अभी ये डिवाइस गुवाहटी के पास लगाए गए हैं और यह प्‍लान पूरी तरह सफल रहा। इससे न केवल हाथियों के घायल होने का सिलसिला थमा है, बल्कि ट्रेनें भी नहीं रुकेंगी।

आगे पढ़ें : कहां से हुई शुरुआत

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यहां से हुई शुरुआत

हाथियों की रेल पटरियों से दूर रखने के लिए रेलवे पहले भी कई प्रयोग कर चुका है। इसके लिए कई जगह अलार्म सिस्‍टम भी लगाए गए थे, जो समय-समय पर बजते थे, खासकर तब जब कोई ट्रेन आने वाली होती थी, लेकिन रेलवे का यह प्रयास कारगर सिद्ध नहीं हुआ। इसके बाद रेलवे ने एक शोध में पाया कि हाथी मधुमक्खियों की आवाज से दूर भागते हैं, इसके लिए असम के ग्वालपाड़ा डिवीजन के दो-तीन प्वाइंटों पर ये डिवाइस लगाई गई, जिससे मधुमक्खियों की आवाज आती है। इन तीन प्‍वाइंट पर यह डिवाइस पूरी तरह सफल रही।


आगे पढ़ें : कितने हाथियों की हुई मौत

62 हाथियों की मौत

रेलवे सूत्रों के मुताबिक डुवार्स क्षेत्र में बड़ी लाइन-3 नंबर रेल मार्ग पर वर्ष 2015 तक ट्रेन से कट कर कुल 62 हाथियों की मृत्यु हो चुकी है. हालांकि गैरसरकारी आंकड़ों के अनुसार, मृत्यु की संख्या 77 है. हालांकि हाल में किये गये उपायों के फलस्वरूप 2016 से लेकर 2017 के बीच डुआर्स के इस रेल मार्ग पर एक भी हाथी की मृत्यु नहीं हुई है.

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