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24 घंटे में 2 किमी रेलवे ट्रैक बिछा देती है यह मशीन, 1000 लोगों का करती है मुकाबला

अमेरिका से आई इस मशीन की कीमत 52 करोड़ रुपए

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मनी भास्कर, नई दिल्ली 

 

रेलवे ने अपनी बहुप्रतीक्षित योजना डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC), ईस्टर्न का पहला सेक्शन 15 अगस्त को शुरू कर दिया है। अब रेलवे का पूरा ध्यान वेस्टर्न कॉरिडोर पर है। इसके काम में बेहद तेजी लाने के लिए अब विदेशी मशीनों का सहारा लिया जा रहा है। रेलवे ने हाल ही में एक ऐसी मशीन खरीदी है, जो एक दिन में लगभग 2 किमी ट्रैक बिछा देती है। वहीं इस काम को इतने दिन में करने के लिए 1000 लोगों की जरूरत पड़ेगी। 

 

यहां किया गया इस मशीन का इस्तेमाल 
डेडिकेटेड फ्रेड कॉरिडोर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (DFCCIL) ने हाल ही में खुर्जा-भाऊपुरा कॉरिडोर पर इस मशीन का इस्तेमाल किया और एक माह में 61 किलोमीटर ट्रैक का निर्माण पूरा कर लिया है।

 

क्या है इस मशीन का नाम
डीएफसीसीआईएल वेस्टर्न कॉरीडोर के प्रवक्ता राजेश खरे ने बताया कि खुर्जा-भाऊपुर में न्यू ट्रैक लीकिंग मशीन(एनटीसी) का इस्तेमाल किया गया। अमेरिका की बनी यह एनटीसी मशीन रोजाना 2 किलोमीटर ट्रैक का निर्माण कर रही है। 52 करोड़ रुपए की इस मशीन की खासियत यह है कि 100 लोग जिस काम को 5 दिन में करेंगे उस काम को यह मशीन एक दिन में पूरा कर देती है। इस प्रकार इस काम को एक दिन में करने के लिए कम से कम 1000 लोग लगाने पड़ेंगे।

 

आगे पढ़ें : क्या काम करती है मशीन 

क्या काम करती है यह मशीन 
खरे ने बताया कि ट्रैक निर्माण के साथ ही सीलिड्रिकल फाउंडेशन औगरींग मशीन खुद गड्ढा खोदकर उसकी सीमेंट क्रंक्रीट से भराई कर देता है। यह मशीन स्वचालित है और इंसान के मुकाबले 5 गुना तेजी से काम करती है। मशीनाइज्ड वायरिंग मशीन प्रति दिन 2 किलोमीटर की ऑटोमैटिक वायरिंग करती है। 

 

आगे पढ़ें : क्या है डेडिकेटेड फ्रेड कॉरिडोर 

क्या है डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर 
माल गाड़ियों की रफ्तार बढ़ाने के लिए सरकार ने डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर बनाने का निर्णय लिया था। इस कॉरिडोर पर केवल मालागाड़ियां चलेंगी। अटेरा -फुलेरा ईस्टर्न कॉरिडोर पर 190 किलोमीटर की रेल लाइन पर माल गाड़ी चलाने का काम रेलवे ने शुरू कर दिया है, लेकिन डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के चालू होने का पूरा फायदा रेलवे को 2020 में तभी मिलेगा जब ईस्टर्न और वेस्टर्न कॉरिडोर चालू हो जाएंगे। इससे मालगाड़ियों को इन दोनों कॉरिडोर पर शिफ्ट कर दिया जाएगा। ऐसा करके ही मौजूदा रेल नेटवर्क पर फ्रेट ट्रेनों का बाेझ हटाकर ही हाईस्पीड यात्री ट्रेनों की संख्या में  वृद्धि और विस्तार की जा सकेगी।

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