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रेलवे बोर्ड और जोन के बीच अटके हैं 70% मामले, बनाई फास्‍ट ट्रैक कमेटी

रेलवे बोर्ड और जोन के बीच कॉम्‍युनिकेशन गैप के कारण लगभग 70 फीसदी मामले अटके हुए हैं

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नई दिल्‍ली। रेलवे बोर्ड और जोन के बीच कॉम्‍युनिकेशन गैप के कारण लगभग 70 फीसदी मामले अटके हुए हैं, जिसमें सेफ्टी सहित कई अहम मामले शामिल हैं। इसी के चलते रेलवे बोर्ड ने एक फास्‍ट ट्रैक डिसीजन मैकिंग कमेटी का गठन किया है, ताकि रेलवे में तेजी से फैसले लिए जा सकें। 

 

क्‍या है मामला 
रेलवे बोर्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक एक फरवरी 2018 तक जोनल रेलवे और बोर्ड के बीच लगभग 70 फीसदी पैंडिंग चल रहे थे। इसमें सबसे अधिक मामले मैंबर टरेक्‍शन रेलवे (एमटीआर) के पास पैंडिंग हैं। यहां लगभग 92 फीसदी मामले पैंडिंग हैं और कम्‍प्‍लायंस 8 फीसदी है। हालांकि मेंबर (आरएस) का कम्‍प्‍लायंस रेट 100 फीसदी है। जबकि मेंबर (इंजीनियरिंग) का कम्‍प्‍लायंस 17 फीसदी, एफसी का 43 फीसदी, एमटी का 25 फीसदी है। रिपोर्ट के मुताबिक कुल 618 मामले पेंडिंग हैं, जबकि 331 मामलों के रिमार्क रिसीव है, केवल 188 मामले ही कम्‍पाइल हो सके और 430 मामले पेंडिंग चल रहे हैं। 

 

क्‍या उठाया कदम 
बुधवार को रेलवे बोर्ड की ओर से सभी जनरल मैनेजर्स को एक आदेश जारी किया गया है (जिसकी कॉपी मनीभास्‍कर के पास उपलब्‍ध है)। इस आदेश में कहा गया है कि हेडक्‍वार्टर लेवल पर इम्‍पावर्ड कमेटी बनाई जाए, जो फास्‍ट ट्रैक डिसीजन ले। 

 

क्‍या है मकसद 
रेलवे में सर्विस डिलीवरी को बेहतर बनाने, सेफ्टी बढ़ाने, प्रोजेक्‍ट्स को समय पर पूरा करने और कर्मचारियों की प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के लिए बोर्ड ने पिछले कुछ समय के दौरान कई कदम उठाए हैं। उनमें से एक कदम यह भी है। जिससे जहां डिसीजन मैकिंग का नया कल्‍चर डेवलप होगा और हैड क्‍वार्टर और जोन के बीच मामले पेंडिंग नहीं रहेंगे। 

 

कमेटी में कौन होगा 
इम्‍पावर्ड कमेटी का हेड एजीएम होंगे और एफए एंड सीएओ के अलावा संबंधित डोमने का एचओडी और क्रॉस फंक्‍शनल डोमेन का एचओडी इस कमेटी में होंगे। सभी जनरल मैनेजर्स द्वारा यह कमेटी बनाई जाएगी। जो एक फिक्‍स दिन में मीटिंग करेगी और हैडक्‍वार्टर में फिक्‍स वेन्‍यू पर मिलेंगे और हैडक्‍वार्टर में पेंडिंग इश्‍यू को उसी दिन निपटाएंगे। 

 

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