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अल्‍ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्‍ट्स में अड़ंगा, 9 में से 2 ही हो पाए चालू

भरसक प्रयासों के बावजूद मोदी सरकार अल्‍ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्‍ट्स (यूएमपीपी) को चालू करने में सफल नहीं रही

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नई दिल्‍ली। भरसक प्रयासों के बावजूद मोदी सरकार अल्‍ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्‍ट्स (यूएमपीपी) को चालू करने में सफल नहीं रही। यूपीए सरकार ने देश में 4 यूएमपीपी लगाने की योजना बनाई थी, मोदी सरकार ने इनकी संख्‍या बढ़ाकर 9 कर दी, लेकिन लगभग चार साल बीतने के बाद भी केवल दो ही यूएमपीपी चल रहे हैं। जिनकी पावर जनरेशन कैपेसिटी 8000 मेगावाट है। बाकी 7 यूएमपीपी अलग-अलग स्‍टेज पर अटके हुए हैं और सरकार के लिए चुनौती बनते जा रहे हैं। 

 

मिनिस्‍ट्री की रिपोर्ट में खुलासा 
मिनिस्‍ट्री ऑफ पावर द्वारा हाल ही में जारी वार्षिक रिपोर्ट 2017 में कहा गया है कि अलग-अलग वजहों से 7 यूएमपीपी का काम अटका हुआ है, इसलिए पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (पीएफसी) को यह जिम्‍मेवारी सौंपी गई है कि वह इन यूएमपीपी को कमीशन करने में सहयोग करे। 

 

कहां बनने हैं ये यूएमपीपी 
यूएमपीपी यानी बड़े पावर प्रोजेक्‍ट्स के लिए नवंबर 2005 में एक नीति बनाई गई थी। जिसका मकसद 4000 मेगावाट कैपेसिटी के प्‍लांट्स लगाना था। इसके तहत अब तक नौ जगह ये प्‍लांट लगाने का निर्णय लिया गया है। इनमें - 
- सासन अल्‍ट्रा मेगा पावर प्‍लांट, मध्‍यप्रदेश 
- मुंद्रा अल्‍टा मेगा पावर प्‍लांट, गुजरात 
- कृष्‍णापट्टनम अल्‍ट्रा मेगा पावर प्‍लांट, आंध्रप्रदेश 
- अल्‍ट्रा मेगा पावर प्‍लांट, झारखंड 
- अल्‍ट्रा मेगा पावर प्‍लांट, छतीसगढ़ 
- अल्‍ट्रा मेगा पावर प्‍लांट, ओडि़शा 
- अल्‍ट्रा मेगा पावर प्‍लांट, तमिलनाडु 
- अल्‍ट्रा मेगा पावर प्‍लांट, महाराष्‍ट्र
- अल्‍ट्रा मेगा पावर प्‍लांट, कर्नाटक 

 

कौन से हैं चालू 
यूपीए सरकार के समय चार यूएमपीपी पर काम शुरू हुआ था। ये चारों सासन, मुंद्रा, कृष्‍णापट्टनम और झारखंड को पावर डेवलपर्स को तो सौंप दिया गया, लेकिन इनमें से सासन और मुंद्रा ही कमीशन हो पाया। मुंद्रा यूएमपीपी 23 अप्रैल 2007 को टाटा पावर कंपनी को सौंपा गया, जबकि सासन 7 अगस्‍त 2007 को रिलांयस रिलायंस पावर को सौंपा गया और दोनों में पावर जनरेशन हो रहा है। कृष्‍णापट्टनम भी रिलायंस को सौंपा गया था, लेकिन टैरिफ को लेकर शुरू हुए विवाद के कारण कंपनी ने काम बंद कर दिया और मामला अदालत में विचाराधीन है। झारखंड का तिलैया भी रिलायंस को सौंपा गया, लेकिन जमीन का हस्‍तांतरण न होने के कारण कंपनी ने प्रोजेक्‍ट वापस कर दिया। 

 

कहां अटके हैं 5 प्रोजेक्‍ट 
- तमिलनाडु के चैय्यूर यूएमपीपी को पहले इंर्पोटेड कोल से चलाने की योजना बनाई गई थी, लेकिन अब पावर मिनिस्‍ट्री इसे डोमेस्टिक कोल से चलाने की संभावना तलाश रही है। 
- ओडिशा यूएमपीपी की बिड पहले वापस ले ली गई थी, लेकिन अब तक फ्रेश बिड जारी नहीं की गई है। 
- बिहार यूएमपीपी के लिए अब तक एसपीवी का ही गठन हो पाया है, उससे आगे का काम अटका हुआ है। 
- झारखंड के देवघर यूएमपीपी के लिए एसपीवी के गठन से आगे का काम अटका हुआ है। 
स्‍थानीय लोगों के विरोध के कारण महाराष्‍ट्र यूएमपीपी का काम रुका हुआ है। 

 

7 और यूएमपीपी की तैयारी 
हालांकि अब तक यूएमपीपी के मामले में सरकार लगभग विफल रही है। बावजूद इसके, राज्‍य सरकारों ने अपने अपने राज्‍य में यूएमपीपी लगाने के लिए केंद्र से संपर्क किया है। इनमें ओडिशा ने अपने राज्‍य में दो यूएमपीपी लगाने की सिफारिश की है, जबकि गुजरात, झारखंड, तमिलनाडु, बिहार और उत्‍तर प्रदेश ने एक-एक यूएमपीपी लगाने की सिफारिश की है, जिनकी संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। 

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