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खरीददार न होने के कारण नहीं लग रहे हैं नए पावर प्‍लांट्स, टारगेट से 72% कम हुआ जनरेशन

नई दिल्‍ली। मोदी सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद पावर सेक्‍टर की हालत नहीं सुधर रही है। बिजली के खरीददार न होने के कारण जहां पहले से लगे पावर प्‍लांट्स कैपेसिटी से लगभग 40 फीसदी कम पावर जनरेट कर रहे हैं, वहीं नए पावर प्‍लांट्स भी नहीं लग रहे हैं। सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (सीईए)  की ताजा रिपोर्ट बताती है कि अप्रैल से दिसंबर 2017 के बीच 16211 मेगावाट के पावर प्‍लांट लगाने का टारगेट रखा गया था, लेकिन इन नौ महीनों में केवल 4765 मेगावाट कैपेसिटी के ही प्‍लांट लग पाए हैं। इतना ही नहीं, अक्‍टूबर से दिसंबर के तीन माह में एक भी मेगावाट कैपेसिटी एडिशन नहीं हुआ। 

 

थर्मल पावर की हालत खस्‍ता 
सीईए की रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल से दिसंबर 2017 के बीच थर्मल पावर में कैपेसिटी एडिशन का टारगेट 14956 मेगावाट का रखा गया था, लेकिन दिसंबर 2017 तक केवल 4300 मेगावाट ही कैपेसिटी एडिशन हुआ है। अक्‍टूबर से दिसंबर के बीच कैपेसिटी एडिशन जीरो रहा। 

 

हाइड्रो प्‍लांट भी पिछड़े 
इसी रिपोर्ट में कहा गया है कि फाइनेंशियल ईयर 17-18 के पहले नौ महीने में 1255 मेगावाट के हाइड्रो प्‍लांट्स लगाने का टारगेट रखा गया था, लेकिन केवल 465 मेगावाट के प्‍लांट ही लग पाए। जबकि इन नौ महीने में न्‍यूक्लियर प्‍लांट की कैपेसिटी में जीरो एडिशन हुआ, जबकि 500 मेगावाट का टारगेट रखा गया था। 

 

क्‍या है मुख्‍य वजह 
रिसर्च एजेंसी क्रिसिल की रिपोर्ट के मुताबिक ज्‍यादातर पावर जनरेशन कंपनियों (जेनको) को लॉन्‍ग टर्म पावर परचेज एग्रीमेंट का इंतजार है। दरअसल, पिछले कुछ सालों से पावर डिस्‍ट्रीब्‍यूशन कंपनियां (डिस्‍कॉम्‍स) पीपीए ही नहीं कर रही हैं, बल्कि पीपीए के बावजूद पावर परचेज नहीं कर रही हैं, इसका कारण पावर प्लांट्स का प्‍लांट लोड फैक्‍टर (पीएलएफ) 60 फीसदी के आसपास तक पहुंच गया है। यही वजह है कि जेनको प्‍लांट लगाने से पहले पीपीए साइन करना चाहती हैं। 

 

यह भी है वजह 
क्रिसिल के मुताबिक, फ्यूल की शॉर्टेज भी एक बड़ी वजह है। गैस की कमी के कारण कई प्‍लांट नहीं लग रहे हैं, बल्कि कई प्‍लांट कमीशन होने के बावजूद पावर जनरेट नहीं कर पा रहे हैं। कोयले के बढ़ते दाम और कमी के कारण भी जेनको अपनी कैपे‍सिटी के मुताबिक पावर जनरेशन नहीं कर पा रहे हैं।

 

बढ़़ सकता है एनपीए

सरकार ने दो साल पहले उज्‍जवल डिस्‍कॉम्‍स एश्‍योरेंस योजना (उदय) शुरू की थी, ताकि डिस्‍कॉम्स की हालत में सुधार किया जाए और वे डिमांड के मुताबिक पावर प्‍लांट्स से बिजली खरीदें, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। डिस्‍कॉम्‍स बिजली नहीं खरीद रहे हैं और जेनको पर एनपीए बढ़़ने का खतरा बढ रहा है। पिछले दिनों जेनको की ओर से सरकार को भी इस बारे में बताया गया था और पावर मिनिस्‍ट्री में हुई एक बैठक में राज्‍यों से कहा गया है कि वे जेनको के साथ पावर परचेज एग्रीमेंट करें, लेकिन इसका भी असर देखने को नहीं मिल रहा है।

 

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