बिज़नेस न्यूज़ » Economy » Infrastructureपावर सेक्‍टर के लिए मुसीबत बने गैस बेस्‍ड प्‍लांट, केवल 22% कर रहे हैं जनरेशन

पावर सेक्‍टर के लिए मुसीबत बने गैस बेस्‍ड प्‍लांट, केवल 22% कर रहे हैं जनरेशन

लगभग 24 हजार मेगावाट कैपेसिटी वाले गैस बेस्‍ड प्‍लांट्स पावर सेक्‍टर के लिए मुसीबत बनते जा रहे हैं

1 of
 
नई दिल्‍ली। लगभग 24 हजार मेगावाट कैपेसिटी वाले गैस बेस्‍ड प्‍लांट्स पावर सेक्‍टर के लिए मुसीबत बनते जा रहे हैं। ये पावर प्‍लांट केवल 22 फीसदी ही प्रोडक्शन कर रहे हैं। गैस न होने के कारण ये पावर प्‍लांट्स अपनी कैपेसिटी के मुताबिक जनरेशन नहीं कर पा रहे हैं। सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी द्वारा जारी नेशनल इलेक्ट्रिसिटी प्‍लान में कहा गया है कि इन प्‍लांट्स को  117.45 एमएमएससीएमडी गैस की जरूरत है, जबकि अभी केवल 29.59 एमएमएससीएमडी गैस ही उपलब्‍ध है। दिलचस्‍प बात यह है कि हर साल गैस से चलने वाले पावर प्‍लांट्स की कैपेसिटी बढ़ रही है, जबकि जनरेशन कम होता जा रहा है। 

 
क्‍या है वर्तमान स्थिति 
सीइए की रिपोर्ट के मुताबिक, गैस से चलने वाले पावर प्‍लांट्स के लिए औसतन 117.45 एमएमएससीएमडी (मिलियन मीट्रिक स्‍टैडर्ड क्‍यूबिक मीटर पर डे)  गैस की जरूरत है। जिसमें से साल 2016-17 में 87.05 एमएमएससीएमडी  डोमेस्टिक गैस अलोकेट की गई थी, जिसमें से केवल 29.59 एमएमएससीएमडी ही सप्‍लाई की गई। रिपोर्ट बताती है कि साल 2010-11 में सबसे अधिक औसतन 59.31 एमएमएससीएमडी गैस सप्‍लाई की गई थी। लेकिन उसके बाद से गैस सप्‍लाई लगातार कम हो रही है, जबकि जनरेशन कैपेसिटी बढ़ने के कारण डिमांड बढ़ती जा रही है। 
 
कैसे बढ़ रही है डिमांड 
साल              : गैस (एमएमएससीएमडी में) 
2009-10      : 78.09 
2010-11      : 81.42 
2011-12      : 81.78 
2012-13        : 90.70 
2013-14        :  97.90 
2014-15 :  104 
2015-16        :  113.63 
2016-17  :  117.45 
 
2009-10 तक सही थे हालात 
सीईए के मुताबिक, कोयले से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए पावर सेक्‍टर ने गैस बेस्‍ड पावर प्‍लांट्स पर फोकस किया था और साल 2009-10 तक हालात ठीक थे। 2009-10 में गैस बेस्‍ड पावर प्‍लांट पीएलएफ (प्‍लांट लोड फैक्‍टर) 67 फीसदी था, जबकि इससे पिछले साल 2008-09 में 55 फीसदी था, लेकिन इसके बाद पीएलएफ लगातार कम होने लगा और 2014-15 में 20.93 फीसदी तक पहुंच गया। मोदी सरकार के प्रयासों से अगले साल थोड़े से हालात सुधरे और पीएलएफ 23.4 फीसदी पहुंच गया था, लेकिन फिर से पीएलएफ गिर कर 22.8 पर पहुंच गया। यहां यह उल्‍लेखनीय है कि पीएलएफ से आशय कैपेसिटी के मुकाबले जनरेशन से है। यानी कि पावर प्‍लांट्स जनरेशन के मुकाबले 22.8 फीसदी ही जनरेशन कर रहे हैं। 
 
क्‍यों है गैस बेस्‍ड पावर प्‍लांट की जरूरत 
सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी का कहना है कि  दुनिया भर में गैस बेस्‍ड पावर प्‍लांट्स की संख्‍या बढ़ाई जा रही है। दुनिया में गैस बेस्‍ड पावर का शेयर 22 फीसदी है, जबकि भारत में केवल 8 फीसदी है। गैस बेस्‍ड पावर प्‍लांट लगाने के फायदे हैं। जैसे - 
- कोयले से चलने वाले पावर प्‍लांट के मुकाबले गैस बेस्‍ड प्‍लांट लगाने के लिए कम जमीन और पानी की जरूरत पड़ती है। 
- गैस बेस्‍ड पावर जनरेशन से कार्बन एमीशन कम पैदा होता है और पर्यावरण की दृष्टि से फायदेमंद होते हैं। 
- गैस से चलने वाले पावर प्‍लांट में फ्यूल पर खर्च दूसरे प्‍लांट्स के मुकाबले कम होता है। 
prev
next
मनी भास्कर पर पढ़िए बिज़नेस से जुड़ी ताज़ा खबरें Business News in Hindi और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट