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सोलर का टारगेट घटा विंड पावर पर फोकस बढ़ाएगी सरकार, 1 लाख MW बिजली की संभावना

सोलर पावर सेक्‍टर के लिए साल 2017-18 बेहतर नहीं रहा है

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नई दिल्‍ली. मोदी सरकार अब सोलर पावर की बजाय विंड पावर जनरेशन पर फोकस बढ़ाएगी। इसकी बड़ी वजह यह है कि सोलर पावर पर सरकार को वांछित सफलता नहीं मिल रही है। सोलर पावर सेक्‍टर के लिए साल 2017-18 बेहतर नहीं रहा है। खासकर, रूफटॉप सोलर पावर का टारगेट हासिल करने में सरकार को चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। यही वजह है कि सरकार ने हाल ही में एक स्‍टडी में कराई, जिसमें पाया कि देश के कुछ हिस्‍सों में विंड पावर प्रोजेक्‍ट्स लगाकर 1 लाख मेगावाट बिजली हासिल की जा सकती है। यहां यह उल्‍लेखनीय है कि सरकार ने साल 2022 में विंड पावर से 60 हजार मेगावाट का टारगेट रखा गया है। 

 

विंड पावर की संभावना 
मिनिस्‍ट्री ऑफ न्‍यू एंड रिन्‍यूएबल एनर्जी (एमएनआरई) की एक रिपोर्ट के मुताबिक हाल ही में एक स्‍टडी कराई गई, जिसमें पाया गया कि देश के कुछ हिस्‍सों मे विंड पावर जनरेशन की काफी क्षमता है। यहां यदि 80 मीटर ऊंचे टरबाइन लगाए जाते हैं तो देश को 1 लाख 2788 मेगावाट बिजली मिल सकती है। वहीं, यदि 100 मीटर ऊंचे टरबाइन लगाए जाएं तो 3 लाख 2 हजार मेगावाट बिजली हासिल की जा सकती है। 

 

सोलर पर था सरकार फोकस 
सत्‍ता संभालने के बाद मोदी सरकार ने साल 2022 तक 1.70 लाख मेगावाट रिन्‍यूएबल एनर्जी जनरेशन का टारगेट रखा था। इसमें सोलर पावर से 1 लाख मेगावाट, विंड पावर से 60 हजार मेगावाट और अन्‍य से 10 हजार मेगावाट का टारगेट रखा गया था। इसके बाद से सरकार ने अपना पूरा फोकस सोलर पावर पर कर दिया और एक के बाद एक पॉलिसी निर्णय लिए गए। इसका शुरू-शुरू में अच्‍छे परिणाम देखने को मिले। खासकर सोलर पावर की कीमतों में अप्रत्‍याशित कमी आई। परंतु पिछले एक साल के दौरान सोलर पावर सेक्‍टर की स्थिति ठीक नहीं है। मिनिस्‍ट्री के मुताबिक साल 2017-18 में रूफटॉप सोलर पावर का टारगेट 10000 मेगावाट का रखा गया था, लेकिन साल भर में केवल 1063 मेगावाट (10 फीसदी) रूफटॉप सोलर प्‍लांट ही कमीशन हो पाए। 

 

टारगेट घटाया 
पिछले साल से सबक लेते हुए अब मिनिस्‍ट्री ने रूफटॉप सोलर पावर का टारगेट घटा दिया है। मिनिस्‍ट्री के मुताबिक, साल 2018-19 में रूफटॉप सोलर पावर का टारगेट केवल 1000 मेगावाट का रखा गया है। वहीं, ग्राउंड माउंटेंड का टारगेट 10 हजार मेगावाट रखा गया है। 

 

इस रिपोर्ट ने बदला फोकस 
पिछले दिनों प्रकाशित एक स्‍टडी रिपोर्ट में कहा गया था कि सरकार साल 2022 तक सोलर पावर का टारगेट हासिल नहीं कर सकती। रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 तक सोलर से लगभग 66 हजार मेगावाट बिजली ही हासिल हो सकेगी, जो टारगेट का 66 फीसदी है। वहीं, इंडियन विंड टरबाइन मैन्‍युफैक्‍चरर्स एसोसिएशन ने दावा किया था कि विंड पावर का 60 हजार मेगावाट का टारगेट समय से पहले पूरा कर लिया जाएगा, क्‍योंकि अब तक देश में 32848 मेगावाट कैपेसिटी के विंड पावर प्‍लांट लग चुके हैं। 
 

यह उठाए जा रहे हैं कदम 
मिनिस्‍ट्री ने विंड पावर का प्रमोट करने के लिए अलग-अलग पॉलिसी पर काम करना शुरू कर दिया है। मिनिस्‍ट्री ने कुछ समय पहले विंड सोलर  हाइब्रिड पॉलिसी का ड्रॉफ्ट तैयार किया था, लेकिन इसको अब तक अप्रूवल नहीं मिल पाई है। अब मिनिस्‍ट्री़ ने इसे जल्‍द से जल्‍द अप्रूवल दिलाने की तैयारी शुरू कर दी है। वहीं, मिनिस्‍ट्री द्वारा विंड टरबाइन मैन्‍युफैक्‍चरर्स से  भी बात करने का निर्णय लिया है, ताकि उन्‍हें टरबाइन मैन्‍युफैक्‍चरिंग कैपेसिटी बढ़ाने को कहा जाए। 

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