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200 किमी की रफ्तार से दौड़ेगा यह रेल इंजन, रेलवे इंजीनियर्स ने किया तैयार

चलती ट्रेन से होगी एक्सीडेंट की रिकॉर्डिंग, 5 से 6 करोड़ रुपए भी बचाए

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शेखर घोष|नई दिल्ली

भारतीय रेल के इंजीनियरों ने डब्ल्यूएपी 5 लोको के इंजन को अपग्रेड कर एेसा शक्तिशाली और स्मार्ट एयरोडायनामिक इंजन तैयार कर लिया है कि जो ट्रैक, पैनल बोर्ड, लोको, असिस्टेंट पायलेट के साथ पैन्टोग्राफ की हाईक्वालिटी ऑडियो व वीडियो रिकार्डिंग करते हुए प्रति घंटा 200 किलोमीटर के स्पीड से दौड़ सकती है। इस इंजन में लगे सीसीटीवी के ऑडियो-विडियो  रिकार्डिंग क्लाउड पर सेव होती रहेगी और यह डेटा 90 दिनों तक सुरक्षित रहेगी। इस ट्रेन की दुर्घटना की स्थिति में ट्रैक से लेकर पायलेट, पेन्टोग्राफ की खड़ावियो का भी सीसीटीवी फूटेज से जांच की जा सकती है। यही नहीं अधिकारी लाइव सिंगल क्लिक से पायलेट, ट्रैक, पेटोग्राफ की निगरानी कर सकते हैं। 

 

नई दिल्ली से भोपाल के बीच हो सकती है शुरुआत 

इस हाइटेकइंजन को उत्तर रेलवे दिल्ली ग्वालियर के बीच गतिमान व नई दिल्ली से भोपाल शताब्दी व राजधानी एक्सप्रेस में लगाने जा रही है। दिल्ली के डीआरएम आरएन सिहं ने बताया कि रेलवे के लिए परेशानी है यह है कि इस इंजन की जितनी रफ्तार है उस लायक अभी ट्रैक नहीं है। आशा है कि एक वर्ष में ट्रैक अपग्रेडेशन के कार्य को नई दिल्ली से भोपाल रूट पर पुरा कर लिया जाएगा इसके बाद यह इंजन 200 किलोमीटर के स्पीड से दौड़ेगी। इसके बाद नई दिल्ली से भोपाल के बीच यात्रा में 35-40 फिसदी की कमी आ जाएगी क्योंकि अभी इस रूट पर चल रही शताब्दी और राजधानी औसतन 100-120 किलोमीटर के स्पीड से दौड़ पाती है।  

 

इंजन को और भी बनाया जा सकता है शक्तिशाली

रेलवे के इंजीनियरों ने चितरंजन रेल कारखाना कोलकत्ता में बनी 5 लोको नं 30164 के गेयर अप्रेड कर इंजन की स्पीड बढ़ाने में कामयाबी हासिल कर ली है। इस तरह के तीन इंजन को तैयार करने के बाद गाजियाबाद इलैक्ट्रिक इंजन शेड में ट्रायल किया गया है। जिस ट्रायल में सफल रहने के बाद आज डीआरएम के समक्ष नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर अवलोकन करवाया गया।  इंजीनियर ने इस इंजन को 6000 हॉर्सपावर तक शक्ति और स्पीड भी आगे वढ़ा सकते है। उन्होने बताया कि एयरोडायनामिक होने के कारण  इंधन भी बचाती है। इसमें पहले के अपेक्षा विजन भी वढ़ाया गया है। इसके अलावा  लोको पायलेट द्वारा झंडे से सिग्नल देने के बजाय गार्ड व स्वचालित फाटकों , स्टेशनमास्टर डीजिटल एलईडी इंडिकेटर लगाए गए है। जो चलती ट्रेन में ग्रीन सिगनल देगी।

 

आगे पढ़ें : क्या हैं खासियतें 

यह है विशेषताएं

-चार कैमरे-ट्रैक, लोको-सह लोको पायलेट, कंट्रोल पैनल, पेटोंग्राफ पर रखेगी नजर सिस्टम में 90 दिन और क्लाउड पर हमेशा ऑडियो-विडियो डेटा उपलब्ध

-लोको पायलेट के द्वारा गार्ड व स्वचालित फाटकों , स्टेशनमास्टर को सिग्नल के देने के लिए डीजिटल एलईडी इंडिकेटर

-इंजन के व्यू को बढ़ाया गया

-मौजूदा इंजनों के मुकाबले कम शोर, कम कंपन

 

आगे पढ़ें : कैसे की बचत 

 

 

बचाए 5 से 6 करोड़ रुपए 

उत्तर रेलवे के सीपीआरओ दीपक कुमार ने कहा कि अपग्रेड डब्ल्यूएपी 5 लोको इंजन भारतीय रेलवे के इंजीनियरों के इंजीनियरिंग का बेमिशाल नमूना है। डब्ल्यूएपी 5 लोको इंजन का पावर 5000हार्स पावर है। पहले यह अधिकतम 140 किलोमीटर के गति तक दौड़ सकती थी। इस इंजन के गीयर में अपग्रेडेशन कर इस इंजन के स्पीड को बढ़ाने के साथ मौजुदा परिस्थितियों के अनुसार स्मार्ट भी बना दिया है। डब्ल्यूएपी 5 लोको इंजन की कीमत 13करोड़ रुपए है, पर अपग्रेड इंजन सुरक्षा और गति में कई देशों के इंजनों से बेहतर है। इस तरह की मौजूदा इंजन की 18-19करोड़ रुपए है। इंजीनियरों ने प्रति इंजन 5-6करोड़ बचाए हैं। 

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